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पूर्व मंत्री रशीद मसूद बसपा में शामिल
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 24 Apr 2017 12:24 AM IST
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काजी रशीद मसूद।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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लखनऊ/सहारनपुर के पूर्व केंद्रीय मंत्री रशीद मसूद परिवार के दो अन्य सदस्यों और समर्थकों के साथ सपा छोड़ बसपा में शामिल हो गए हैं। हालांकि इसका आधिकारिक एलान सहारनपुर में एक सम्मेलन आयोजित कर किया जाएगा।
रविवार को पूर्व मंत्री रशीद मसूद, बेटे शादान मसूद, पोते शायान मसूद व अन्य समर्थकों के साथ यहां बसपा सुप्रीमो मायावती से मिले। बसपा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद शादान ने बताया कि हम सभी पूर्व मुख्यमंत्री के समक्ष सपा छोड़कर बसपा में शामिल हो गए हैं।
बीजेपी को हराने के लिए लोगों को जोड़ने का काम करेंगे। शामिल होने वालों में सपा छात्रसभा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लोकेश भाटी भी शामिल हैं। शादान ने बताया कि 10-15 दिन के भीतर सहारनपुर में एक बड़ा सम्मेलन कराया जाएगा।
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उधर, विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद अब बहुजन समाज पार्टी ने बेहद मजबूत गढ़ सहारनपुर की किलेबंदी में जुट गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और एमबीबीएस सीट घोटाले में सजायाफ्ता रशीद मसूद को बसपा अपने पाले में कर रही है।
उनके बेटे शाजान मसूद के जरिए पार्टी सहारनपुर में दलित-मुस्लिम गठजोड़ के जरिए किलेबंदी करने की कवायद में है। माना जा रहा है कि सपा नेता शाजान मसूद जल्द ही बसपा में शामिल होंगे। इसकी पूरी पटकथा तैयार की जा चुकी है।
विधानसभा चुनाव में जमीन खिसकने के बाद बसपा अब नए समीकरण बनाने में जुटी है। इसी कवायद में पूर्व सांसद रशीद मसूद का परिवार बसपा के पाले में जाता दिखाई दे रहा है।
दो बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके शाजान मसूद जल्द ही बसपा की सदस्यता लेंगे। इससे पहले बसपा सुप्रीमो मायावती से उनकी मुलाकात हो चुकी है।
दरअसल, इस नए समीकरण के पीछे समाजवादी पार्टी में हुई टूट और काजी परिवार को उचित तवज्जों नहीं मिलना है।
हालांकि सपा सरकार के वक्त काजी रशीद मसूद के पोते और शाजान मसूद के बेटे शायान मसूद को दुग्ध संघ का सलाहकार बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा दिया था।
मगर, चुनाव से ऐन पहले सपा परिवार में हुई टूट के बाद यह परिवार अलग-थलग पड़ गया था। इसके बाद सपा-कांग्रेस गठबंधन में सहारनपुर में काजी रशीद मसूद को तवज्जों नहीं मिली।
जबकि उनके धूर विरोधी कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष और उनके भतीजे इमरान मसूद ने सहारनपुर के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि वे खुद चुनाव हार गए, मगर गठबंधन के खाते में तीन सीटें आ गई।
ऐसे में अब बसपा दलित-मुस्लिम गठजोड़ को मजबूत करने के लिए नई रणनीति बनाने में जुटी है। आपको बता दें कि वर्ष 2012 से पहले काजी रशीद मसूद समाजवादी पार्टी में बेहद मजबूत नेता के रूप में थे।
मगर, उस वक्त विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे की नाराजगी के चलते उन्होंने कांग्रेस का हाथ लिया था और राज्यसभा सांसद के साथ ही एपिडा चेयरमैन बनाया।
मगर, इसी बीच एमबीबीएस सीट घोटाले में काजी रशीद मसूद आरोपी हो गए और पार्टी ने उनसे किनारा कर लिया। इससे पहले उनके भतीजे इमरान मसूद ने उनका साथ छोड़ दिया।
हालांकि सपा ने उनके बेटे को लोकसभा का चुनाव लड़वाया। मगर उन्हें मनचाही तवज्जों नहीं मिली। अब उनके बसपा में आने से नए समीकरण की उम्मीद है।
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रविवार को पूर्व मंत्री रशीद मसूद, बेटे शादान मसूद, पोते शायान मसूद व अन्य समर्थकों के साथ यहां बसपा सुप्रीमो मायावती से मिले। बसपा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद शादान ने बताया कि हम सभी पूर्व मुख्यमंत्री के समक्ष सपा छोड़कर बसपा में शामिल हो गए हैं।
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बीजेपी को हराने के लिए लोगों को जोड़ने का काम करेंगे। शामिल होने वालों में सपा छात्रसभा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लोकेश भाटी भी शामिल हैं। शादान ने बताया कि 10-15 दिन के भीतर सहारनपुर में एक बड़ा सम्मेलन कराया जाएगा।
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उधर, विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद अब बहुजन समाज पार्टी ने बेहद मजबूत गढ़ सहारनपुर की किलेबंदी में जुट गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और एमबीबीएस सीट घोटाले में सजायाफ्ता रशीद मसूद को बसपा अपने पाले में कर रही है।
उनके बेटे शाजान मसूद के जरिए पार्टी सहारनपुर में दलित-मुस्लिम गठजोड़ के जरिए किलेबंदी करने की कवायद में है। माना जा रहा है कि सपा नेता शाजान मसूद जल्द ही बसपा में शामिल होंगे। इसकी पूरी पटकथा तैयार की जा चुकी है।
विधानसभा चुनाव में जमीन खिसकने के बाद बसपा अब नए समीकरण बनाने में जुटी है। इसी कवायद में पूर्व सांसद रशीद मसूद का परिवार बसपा के पाले में जाता दिखाई दे रहा है।
दो बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके शाजान मसूद जल्द ही बसपा की सदस्यता लेंगे। इससे पहले बसपा सुप्रीमो मायावती से उनकी मुलाकात हो चुकी है।
दरअसल, इस नए समीकरण के पीछे समाजवादी पार्टी में हुई टूट और काजी परिवार को उचित तवज्जों नहीं मिलना है।
हालांकि सपा सरकार के वक्त काजी रशीद मसूद के पोते और शाजान मसूद के बेटे शायान मसूद को दुग्ध संघ का सलाहकार बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा दिया था।
मगर, चुनाव से ऐन पहले सपा परिवार में हुई टूट के बाद यह परिवार अलग-थलग पड़ गया था। इसके बाद सपा-कांग्रेस गठबंधन में सहारनपुर में काजी रशीद मसूद को तवज्जों नहीं मिली।
जबकि उनके धूर विरोधी कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष और उनके भतीजे इमरान मसूद ने सहारनपुर के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि वे खुद चुनाव हार गए, मगर गठबंधन के खाते में तीन सीटें आ गई।
ऐसे में अब बसपा दलित-मुस्लिम गठजोड़ को मजबूत करने के लिए नई रणनीति बनाने में जुटी है। आपको बता दें कि वर्ष 2012 से पहले काजी रशीद मसूद समाजवादी पार्टी में बेहद मजबूत नेता के रूप में थे।
मगर, उस वक्त विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे की नाराजगी के चलते उन्होंने कांग्रेस का हाथ लिया था और राज्यसभा सांसद के साथ ही एपिडा चेयरमैन बनाया।
मगर, इसी बीच एमबीबीएस सीट घोटाले में काजी रशीद मसूद आरोपी हो गए और पार्टी ने उनसे किनारा कर लिया। इससे पहले उनके भतीजे इमरान मसूद ने उनका साथ छोड़ दिया।
हालांकि सपा ने उनके बेटे को लोकसभा का चुनाव लड़वाया। मगर उन्हें मनचाही तवज्जों नहीं मिली। अब उनके बसपा में आने से नए समीकरण की उम्मीद है।