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Saharanpur News: कूटरचित ई-स्टांप फर्जीवाड़ा, अधिकारी समेत तीन मिले दोषी
Sat, 28 Jun 2025 12:24 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 28 Jun 2025 12:24 AM IST
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सहारनपुर। नगर निगम के पार्किंग के ठेकों में कूटरचित ई-स्टांप लगाने का मामला एक बार फिर उठा है। मामले में एक तत्कालीन कर निर्धारण अधिकारी और मौजूदा दो लिपिक को दोषी पाया गया है। तत्कालीन कर निर्धारण अधिकारी पर कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई है, जबकि दो लिपिकों पर कार्रवाई के लिए नगर निगम के अधिकारियों को लिखा गया है।
नगर निगम के संपत्ति अनुभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2022-23 और 2023-24 में विभिन्न पार्किंग स्थलों के ठेके किए गए थे। ठेकेदारों द्वारा अनुबंध की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए संपत्ति अनुभाग में विभिन्न मूल्यों के ई-स्टांप प्रस्तुत किए गए थे। ठेकेदार द्वारा ई-स्टांप मूल्य में 100 गुणा तक वृद्धि करते हुए कूटरचना की गई थी। उदाहरण के तौर पर 280 रुपये के स्टांप को 28,000 रुपये कर दिया गया था।
खास बात यह है कि स्टांप पर अंकित चेतावनी का अधिकारियों ने पालन नहीं किया और कूटरचित स्टांप पर ही अधिकारियों ने अनुबंध जारी कर दिया था।
मुख्य नगर लेखा परीक्षक की ओर से कुछ समय पहले विशेष आपत्ति दर्ज की गई है। अधिष्ठान लिपिक द्वारा नगर आयुक्त और अपर नगर आयुक्त को पत्र लिखकर संबंधित दोनों लिपिकों पर निलंबन की कार्रवाई के लिए कहा गया है, जबकि तत्कालीन कर निर्धारण अधिकारी के निलंबन की कार्रवाई के लिए पूर्व में शासन से संस्तुति की जा चुकी है। (संवाद)
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नगर निगम के संपत्ति अनुभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2022-23 और 2023-24 में विभिन्न पार्किंग स्थलों के ठेके किए गए थे। ठेकेदारों द्वारा अनुबंध की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए संपत्ति अनुभाग में विभिन्न मूल्यों के ई-स्टांप प्रस्तुत किए गए थे। ठेकेदार द्वारा ई-स्टांप मूल्य में 100 गुणा तक वृद्धि करते हुए कूटरचना की गई थी। उदाहरण के तौर पर 280 रुपये के स्टांप को 28,000 रुपये कर दिया गया था।
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खास बात यह है कि स्टांप पर अंकित चेतावनी का अधिकारियों ने पालन नहीं किया और कूटरचित स्टांप पर ही अधिकारियों ने अनुबंध जारी कर दिया था।
मुख्य नगर लेखा परीक्षक की ओर से कुछ समय पहले विशेष आपत्ति दर्ज की गई है। अधिष्ठान लिपिक द्वारा नगर आयुक्त और अपर नगर आयुक्त को पत्र लिखकर संबंधित दोनों लिपिकों पर निलंबन की कार्रवाई के लिए कहा गया है, जबकि तत्कालीन कर निर्धारण अधिकारी के निलंबन की कार्रवाई के लिए पूर्व में शासन से संस्तुति की जा चुकी है। (संवाद)
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