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माह ए रमजान की सीख पूरी जिंदगी अमल करें
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सहारनपुर। रमजान का महीना बहुत कुछ सिखाता है। गुनाह से तौबा करके सच्चे दिल से संकल्प लें कि दोबारा गुनाह नहीं होगा। इबादत के दौरान अल्लाह ने जो रहमत बख्शी है, उसके शुक्रगुजार बनें। रमजान माह में मिली सीख का पूरी जिंदगी अमल करें।
यह बात जमीयत दावातुल मुसलीमीन के संरक्षक व इमाम सहारनपुर मौलाना कारी इसहाक़ गोरा ने रोजेदारों को हेल्पलाइन पर सवाल पूछे जाने के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि रमजान माह बहुत तेजी से गुजर रहा है। इसमें रब से आजिजी के साथ गुनाहों की माफी मांगें। सच्चे दिल से इबादत कर रब को राजी करें। माह ए रमजान को एक प्रकार से ट्रेनिंग का महीना मानें। इसमें इबादत के दौरान जो सीख मिले और जिस तरह गुनाहों से तोबा कर खुदा का प्यार हासिल किया है उस पर पूरे जीवन अमल करें।
हेल्पलाइन पर पूछे गए सवाल और उनके जवाब
सवाल - नखासा बाजार निवासी महफ़ूज अहमद ने पूछा कि अगर कोई बीमार हो और वह जोहार से पहले ठीक हो जाए तो उसका रोजे के लिए शरीयत में क्या हुकुम है?
जवाब- अगर कोई ऐसा काम नहीं किया है जो रोजे को बातिल करता है तो नीयत कर ले रोजा ठीक होगा।
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सवाल- जनपद रामपुर निवासी रईस ने पूछा कि उनके भाई घर पर परिवार को तरावीह पढ़ा रहे थे, अब उनका स्वास्थ्य अच्छा नहीं है। अब हमारे घर में चार सूरतों से ज्यादा किसी को याद नहीं है तो हम तरावीह कैसे पढ़ें?
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जवाब - लॉकडाउन में तरावीह पढ़ने मस्जिद नहीं जा सकते, अगर आपको चार ही सूरतें याद हैं तो भी 20 रकाअतों में उसको दोहराकर पढ़ लें, तरावीह हो जाएगी।
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सवाल- मोहल्ला क़ाजी निवासी दानिश सिद्दीक़ी ने पूछा कि क़ुरान की तिलावत के दरमियान सजदे वाली आयत पढ़ने के बाद तुरंत सजदा करना जरूरी है या बाद में भी कर सकते हैं?
जवाब- उसी वक़्त करना बेहतर है लेकिन बद में भी कर सकते हैं।
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यह बात जमीयत दावातुल मुसलीमीन के संरक्षक व इमाम सहारनपुर मौलाना कारी इसहाक़ गोरा ने रोजेदारों को हेल्पलाइन पर सवाल पूछे जाने के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि रमजान माह बहुत तेजी से गुजर रहा है। इसमें रब से आजिजी के साथ गुनाहों की माफी मांगें। सच्चे दिल से इबादत कर रब को राजी करें। माह ए रमजान को एक प्रकार से ट्रेनिंग का महीना मानें। इसमें इबादत के दौरान जो सीख मिले और जिस तरह गुनाहों से तोबा कर खुदा का प्यार हासिल किया है उस पर पूरे जीवन अमल करें।
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हेल्पलाइन पर पूछे गए सवाल और उनके जवाब
सवाल - नखासा बाजार निवासी महफ़ूज अहमद ने पूछा कि अगर कोई बीमार हो और वह जोहार से पहले ठीक हो जाए तो उसका रोजे के लिए शरीयत में क्या हुकुम है?
जवाब- अगर कोई ऐसा काम नहीं किया है जो रोजे को बातिल करता है तो नीयत कर ले रोजा ठीक होगा।
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सवाल- जनपद रामपुर निवासी रईस ने पूछा कि उनके भाई घर पर परिवार को तरावीह पढ़ा रहे थे, अब उनका स्वास्थ्य अच्छा नहीं है। अब हमारे घर में चार सूरतों से ज्यादा किसी को याद नहीं है तो हम तरावीह कैसे पढ़ें?
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जवाब - लॉकडाउन में तरावीह पढ़ने मस्जिद नहीं जा सकते, अगर आपको चार ही सूरतें याद हैं तो भी 20 रकाअतों में उसको दोहराकर पढ़ लें, तरावीह हो जाएगी।
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सवाल- मोहल्ला क़ाजी निवासी दानिश सिद्दीक़ी ने पूछा कि क़ुरान की तिलावत के दरमियान सजदे वाली आयत पढ़ने के बाद तुरंत सजदा करना जरूरी है या बाद में भी कर सकते हैं?
जवाब- उसी वक़्त करना बेहतर है लेकिन बद में भी कर सकते हैं।