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स्वजल ‘धारा’ में बह गए पांच करोड़, पानी को तरस रहे लोग
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गंगोह स्थित ओवर हैड टैंक
- फोटो : SAHARANPUR
स्वजल ‘धारा’ में बह गए पांच करोड़, पानी को तरस रहे लोग
सहारनपुर/गंगोह। जल निगम भले ही स्वजल धारा योजना के तहत अपनी झोली से करीब पांच करोड़ रुपये इलाके के लोगों को शुद्ध जल पिलाने के लिए खर्च कर दिया हो लेकिन गंगोह क्षेत्र के हजारों घरों को अब भी शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो रहा है। इसके चलते लोग हैंडपंपों से दूषित पानी पीने से गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
वर्ष 2015 में स्वजल धारा योजना के तहत क्षेत्र में पेयजल के लिए पाइपलाइन डाली गई। साथ ही लखनौती गांव में 5000 लीटर की क्षमता का ओवरहेड टैंक बनाया गया था। पूरी परियोजना पर तीन करोड़ 46 लाख रुपये की लागत आई थी। लेकिन पंचायत को टंकी हस्तांतरित करने के बाद यह बंद हो गई। करीब पांच साल से बंद पड़ी इस टंकी की सुध लेने की जरूरत अधिकारी नहीं समझ रहे हैं। कई बार ग्रामीण इसके लिए प्रदर्शन कर चुके हैं।पेयजल आपूर्ति बंद होने की वजह से क्षेत्र के गुरु नानकपुरा, पखनपुरा, हरनामगढ़, चमनपुरा, भगवानपुर आदि की गावों की करीब 20 हजार आबादी पेयजल के लिए भटक रही है। इसी तरह गांव बल्लामजरा में एक करोड़ 25 लाख रुपये की लागत से की गई पेयजल व्यवस्था पांच साल से बंद पड़ी है। ग्रामीण कई बार अधिकारियों से मिलकर गुहार लगा चुके हैं। आपूर्ति चालू नहीं की जा रही है। ऐसे में लोग हैंडपंपों पर आश्रित रहने को मजबूर हैं।
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संवेदनशील क्षेत्रों में भी पानी की व्यवस्था नहीं
क्षेत्र के कुंड़ाकला, थानवा, रंधेडी, बहादुर नगर और बसी जैसे ऐसे गांव हैं जो गंभीर बीमारियों के लिहाज से संवेदनशील हैं। चिकित्सा विभाग भी मानता है कि जिले में जब भी कोई बीमारी की शुरुआत होती है तो वह गंगोह के इन्हीं गांवों से सामने आती हैं। बीमारियां होने की वजह इन गांवों का यमुना के खादर क्षेत्र के करीब होना है भी एक कारण है, जहां नमी अधिक है। इसके बाद भी क्षेत्र की पेयजल व्यवस्था कभी पटरी पर नहंी लौट पाई है। पाइप लाइनों के बार-बार फटने से आपूर्ति बाधित होती रहती है।
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बोले क्षेत्रवासी
-- पूर्व ग्राम प्रधान अब्बास चौधरी ने बताया कि पाइपलाइन जर्जर होने की वजह से आपूर्ति प्रभावित है। पाइपलाइन को बदलने की जरूरत है। यह कार्य जितना जल्दी होगा उतनी जल्दी आपूर्ति सही हो जाएगी।
-- क्षेत्रवासी मसरूर राना ने बताया कि गांव कुंडाकला, थानवा, रंधेड़ी आदि गांवों में भी पेयजल आपूर्ति सुचारु रूप से नहीं चल रही है। इसकी वजह से लोग हैंडपंपों पर आश्रित रहने का मजबूर हैं।
----- वर्जन
गंगोह क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि सभी जगह पेयजल आपूर्ति प्रभावित है, जहां भी खामियां हैं उन्हें दूर कराया जा रहा है।
- पवन कुमार, अवर अभियंता, जल निगम।
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सहारनपुर/गंगोह। जल निगम भले ही स्वजल धारा योजना के तहत अपनी झोली से करीब पांच करोड़ रुपये इलाके के लोगों को शुद्ध जल पिलाने के लिए खर्च कर दिया हो लेकिन गंगोह क्षेत्र के हजारों घरों को अब भी शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो रहा है। इसके चलते लोग हैंडपंपों से दूषित पानी पीने से गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
वर्ष 2015 में स्वजल धारा योजना के तहत क्षेत्र में पेयजल के लिए पाइपलाइन डाली गई। साथ ही लखनौती गांव में 5000 लीटर की क्षमता का ओवरहेड टैंक बनाया गया था। पूरी परियोजना पर तीन करोड़ 46 लाख रुपये की लागत आई थी। लेकिन पंचायत को टंकी हस्तांतरित करने के बाद यह बंद हो गई। करीब पांच साल से बंद पड़ी इस टंकी की सुध लेने की जरूरत अधिकारी नहीं समझ रहे हैं। कई बार ग्रामीण इसके लिए प्रदर्शन कर चुके हैं।पेयजल आपूर्ति बंद होने की वजह से क्षेत्र के गुरु नानकपुरा, पखनपुरा, हरनामगढ़, चमनपुरा, भगवानपुर आदि की गावों की करीब 20 हजार आबादी पेयजल के लिए भटक रही है। इसी तरह गांव बल्लामजरा में एक करोड़ 25 लाख रुपये की लागत से की गई पेयजल व्यवस्था पांच साल से बंद पड़ी है। ग्रामीण कई बार अधिकारियों से मिलकर गुहार लगा चुके हैं। आपूर्ति चालू नहीं की जा रही है। ऐसे में लोग हैंडपंपों पर आश्रित रहने को मजबूर हैं।
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संवेदनशील क्षेत्रों में भी पानी की व्यवस्था नहीं
क्षेत्र के कुंड़ाकला, थानवा, रंधेडी, बहादुर नगर और बसी जैसे ऐसे गांव हैं जो गंभीर बीमारियों के लिहाज से संवेदनशील हैं। चिकित्सा विभाग भी मानता है कि जिले में जब भी कोई बीमारी की शुरुआत होती है तो वह गंगोह के इन्हीं गांवों से सामने आती हैं। बीमारियां होने की वजह इन गांवों का यमुना के खादर क्षेत्र के करीब होना है भी एक कारण है, जहां नमी अधिक है। इसके बाद भी क्षेत्र की पेयजल व्यवस्था कभी पटरी पर नहंी लौट पाई है। पाइप लाइनों के बार-बार फटने से आपूर्ति बाधित होती रहती है।
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बोले क्षेत्रवासी
-- पूर्व ग्राम प्रधान अब्बास चौधरी ने बताया कि पाइपलाइन जर्जर होने की वजह से आपूर्ति प्रभावित है। पाइपलाइन को बदलने की जरूरत है। यह कार्य जितना जल्दी होगा उतनी जल्दी आपूर्ति सही हो जाएगी।
-- क्षेत्रवासी मसरूर राना ने बताया कि गांव कुंडाकला, थानवा, रंधेड़ी आदि गांवों में भी पेयजल आपूर्ति सुचारु रूप से नहीं चल रही है। इसकी वजह से लोग हैंडपंपों पर आश्रित रहने का मजबूर हैं।
----- वर्जन
गंगोह क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि सभी जगह पेयजल आपूर्ति प्रभावित है, जहां भी खामियां हैं उन्हें दूर कराया जा रहा है।
- पवन कुमार, अवर अभियंता, जल निगम।