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Saharanpur News: पहले गुनगुनाया जन गण मन, फिर थामा बैटन और जीत ली चांदी

Fri, 06 Oct 2023 12:46 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Fri, 06 Oct 2023 12:46 AM IST
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First hummed Jana Gana Mana, then held the baton and won the silver.
प्राची चौधरी
सहारनपुर। यह इवेंट मेरी जिदंगी के लिए अभी तक का सबसे महत्वपूर्ण पल था। ट्रैक पर उतरते ही सबसे पहले ट्रैक को चूमा, जिससे जोश और जज्बा बना रहे। जब दूसरी एथलीट मेरी तरफ बैटन देने के लिए बढ़ रही थी तब दिल की धड़कन भी तेज हो गई। उस वक्त कुछ नहीं सूझा, तभी दिलो-दिमाग में राष्ट्रगान आया। मैंने वहीं पर खड़े होकर मन ही मन में जन गण मन गुनगुनाया और इसके बाद जोश के साथ हाथ में बैटन लेकर दौड़ पड़ी। राष्ट्रगान और मां से किए गए पदक के वादे से मेरे अंदर अलग ही ताकत थी। बस लक्ष्य था कि हर हाल में पदक जीतना है। यह कहना है कि सहारनपुर के झबीरण गांव की बेटी प्राची चौधरी का। जिसने हांगझोऊ में चल रहे एशियाड खेलों में 400 मीटर रिले दौड़ टीम स्पर्धा में रजत पदक जीतकर नाम रोशन किया। अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में प्राची ने इंवेंट के दौरान के अनुभव को खुलकर सांझा किया।
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पिछले एशियाड में नहीं हो सका था चयन, था मलाल
प्राची का कहना है कि वह वर्ष 2014 से खेल रही है। चार साल पहले हुए एशियाड में उसका चयन नहीं हो सका था। इसके बाद से ही मन में ठान लिया था कि 2023 में होने वाले एशियाड में शामिल भी होना है और पदक भी जीतना है। बकौल प्राची, इस बात का अफसोस है कि हमारे क्षेत्र में खिलाड़ियों को लेकर कोई भी ज्यादा सक्रिय नहीं है। पड़ोसी राज्य हरियाणा में खिलाड़ियों को बेहद मान-सम्मान मिलता है। यदि यहां पर भी खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिले तो यहां के खिलाड़ी भी किसी से कम नहीं है। बता दें, कि प्राची इससे पहले भी अलग-अलग चैंपियनशिप में काफी पदक जीत चुकी है।
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पापा उधार रुपये मांगकर मेरे लिए लाते थे स्पाइक
बातचीत के दौरान परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर प्राची भावुक भी हुई। प्राची का कहना है कि उसके पिता जयवीर सिंह खेतीबाड़ी करते हैं। रिले दौड़ के लिए उसे स्पाइक और रनिंग शूज चाहिए होते थे। कई बार ऐसा भी हुआ कि फटे हुए शूज डालकर दौड़ करनी पड़ी, लेकिन पापा नहीं चाहते थे कि बेटी को कहीं पर भी बाधा आए। इसलिए लोगों से कर्ज लेकर उसे शूज दिलाते थे। कई बार खाने की डाइट भी उस स्तर की नहीं रहती थी जो एक एथलीट के लिए जरूरी है, लेकिन माता-पिता, भाई और परिवार के सभी सदस्यों के हौसलों की बदौलत इस मुकाम तक पहुंच सकी। मेरी इस उपलब्धि में पूरे परिवार का सहयोग है।
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रालोद खेल प्रकोष्ठ करेगा सम्मान समारोह
प्राची दो या तीन दिन में अपने घर लौटेगी। प्राची की इस उपलब्धि पर रालोद खेल प्रकोष्ठ की तरफ से भी उसे सम्मानित किया जाएगा। खेल प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नीरपाल सिंह ने बताया कि प्राची को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए हर संभव मदद की जाएगी।
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