{"_id":"58ac98954f1c1b0a53b248b9","slug":"financial-controller-must-answer-in-eight-months","type":"story","status":"publish","title_hn":"वित्त नियंत्रक को आठ माह में देना होगा जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वित्त नियंत्रक को आठ माह में देना होगा जवाब
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 22 Feb 2017 01:21 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बेसिक शिक्षा विभाग में एक ही संवर्ग के शिक्षकों को 4600 पे-ग्रेड पर न्यूनतम 17140 वेतन देना और अनुसूचित जाति के शिक्षकों को 2014 में तीन माह तक देकर उनसे रिकवरी कर लेना और गैर आरक्षित वर्ग के शिक्षकों को 2010 से 2014 के बीच एरियर का भुगतान भी कर देने के मामले में उच्च न्यायालय ने आदेश जारी किया है। वित्त नियंत्रक इलाहाबाद को जारी आदेश में आठ सप्ताह में एससी अध्यापकों के प्रत्यावेदन पर कारणों सहित निस्तारित करने के आदेश पारित किए गए।
जसवीर सिंह, अजीत सिंह, जयकुमार, राजपाल और तेजवीर सिंह ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर सहारनपुर जनपद में एक ही पदोन्नति आदेश पर पदोन्नति हुए शिक्षकों के वेतन निर्धारण के मामले में सामान्य, ओबीसी एवं दलित शिक्षकों के वेतन निर्धारण को चुनौती दी थी।
याचिका में याचीगणों ने मांग की थी कि वित्त एवं लेखाधिकारी द्वारा समानता के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है और संविधान के अनुच्छेद 14,15 और 16 का स्पष्ट उल्लंघन है। यहीं नही छठे वेतनमान की संस्तुतियों के आधार पर प्रदेश के अधिकांश जनपदों में 4600 पे ग्रेड पर न्यूनतम 17140 का वेतनमान दिया जा रहा है।
विज्ञापन
जनपद में 2008 में पदोन्नत हुए शिक्षकों में केवल सामान्य एवं ओबीसी के शिक्षकों को पदोन्न्ति तिथि से दिया जा रहा है। उन्हें एरियर का भी भुगतान कर दिया गया है। दलित शिक्षकों ने न्यायालय के आदेश की प्रति प्रत्यावेतन सहित फाइनेंस कंट्रोलर को भेज दी है।
विज्ञापन
जसवीर सिंह, अजीत सिंह, जयकुमार, राजपाल और तेजवीर सिंह ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर सहारनपुर जनपद में एक ही पदोन्नति आदेश पर पदोन्नति हुए शिक्षकों के वेतन निर्धारण के मामले में सामान्य, ओबीसी एवं दलित शिक्षकों के वेतन निर्धारण को चुनौती दी थी।
विज्ञापन
याचिका में याचीगणों ने मांग की थी कि वित्त एवं लेखाधिकारी द्वारा समानता के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है और संविधान के अनुच्छेद 14,15 और 16 का स्पष्ट उल्लंघन है। यहीं नही छठे वेतनमान की संस्तुतियों के आधार पर प्रदेश के अधिकांश जनपदों में 4600 पे ग्रेड पर न्यूनतम 17140 का वेतनमान दिया जा रहा है।
विज्ञापन
जनपद में 2008 में पदोन्नत हुए शिक्षकों में केवल सामान्य एवं ओबीसी के शिक्षकों को पदोन्न्ति तिथि से दिया जा रहा है। उन्हें एरियर का भी भुगतान कर दिया गया है। दलित शिक्षकों ने न्यायालय के आदेश की प्रति प्रत्यावेतन सहित फाइनेंस कंट्रोलर को भेज दी है।