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मादा गुलदार पिंजरे में फंसी, शावक पकड़ से दूर
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मादा गुलदार पिंजरे में फंसी, शावक पकड़ से दूर
छुटमलपुर(सहारनपुर)। गुलदार के शावक को लाठी-डंडों से पीटकर मारने की घटना के बाद वन विभाग की टीम ने पिंजरा लगा कर मंगलवार रात मादा गुलदार को पकड़ लिया। हालांकि अभी दूसरा शावक पिंजरे में नहीं आ सका है।
सामाजिक वानिकी की कैलाशपुर वन रेंज के गांव बुड्ढाखेड़ा के जंगल में सोमवार शाम ग्रामीणों ने गुलदार के एक साल के शावक को पीटकर मार डाला था। मौके से मादा गुलदार और एक शावक खेतों के रास्ते भाग निकले थे। गुलदार के शावक की हत्या के बाद वनकर्मी की तहरीर पर पुलिस ने एक नामजद सहित 25 अज्ञात के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। घटना के बाद से ही वन कर्मियों की टीमें मादा गुलदार और शावक को पकड़ने के लिए पिंजरों के साथ क्षेत्र में डटी थी।
मंगलवार रात करीब 12 बजे मादा गुलदार पिंजरे में आ गई। टीम उसे लेकर कैलाशपुर के आंबेडकर पार्क स्थित वन रेंज कार्यालय पहुंची, जहां गुलदार के पिंजरे को रखा गया है। यहीं पर पहुंचे पशु चिकित्सक डा. संजय कुमार ने उसके स्वास्थ्य की जांच की, जो सही पाया गया। वर्ल्ड वाइड लाइफ फाउंडेशन फ़ॉर नेचर की टीम के देवदत्त पंवार और अनन्या भी मौके पर पहुंचे। इस दौरान डीएफओ रणबीर सिंह, शिवालिक एसडीओ श्वेता सैन, वन क्षेत्राधिकारी उमेश चंद शर्मा आदि मौके पर रहे।
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शावकों के बिछोह से हिंसक हुई मादा गुलदार
शावक की हत्या के बाद खूंखार हुई मादा गुलदार पिंजरे में तो आ गई लेकिन अभी तक वह अपने शावकों को लेकर हिंसक बनी हुई है। ऐसे में उसके पिंजरे को कपड़े से ढक कर रखा गया है। उसे अभी जंगल में भी नहीं छोड़ा गया है। डीएफओ सामाजिक वानिकी रणविजय सिंह ने बताया कि मादा गुलदार के दोनों शावक उससे दूर हैं, ऐसे में उसे अभी जंगल में छोड़ना खतरे से खाली नहीं होगा। वह अपने शावकों की तलाश में फिर से आबादी का रुख कर सकती है। दूसरे शावक को तलाश कर उसकी मां के साथ ही जंगल में छोड़ा जाएगा। तीन पिंजरे लगाकर छह-छह लोगों की तीन टीमें तैनात की गई हैं। शावक अभी शिकार करने लायक नहीं है, ऐसे में पिंजरों में भैंसें के मांस के टुकड़े लगाने के साथ ही 200 मीटर तक मांस को डाला गया है। ग्रामीणों को खेतों की तरफ न आने के लिए मंदिरों और मस्जिदों से घोषणा कराई गई है। उन्होंने बताया कि वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ की टीम भी देहरादून से आई थी।
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छुटमलपुर(सहारनपुर)। गुलदार के शावक को लाठी-डंडों से पीटकर मारने की घटना के बाद वन विभाग की टीम ने पिंजरा लगा कर मंगलवार रात मादा गुलदार को पकड़ लिया। हालांकि अभी दूसरा शावक पिंजरे में नहीं आ सका है।
सामाजिक वानिकी की कैलाशपुर वन रेंज के गांव बुड्ढाखेड़ा के जंगल में सोमवार शाम ग्रामीणों ने गुलदार के एक साल के शावक को पीटकर मार डाला था। मौके से मादा गुलदार और एक शावक खेतों के रास्ते भाग निकले थे। गुलदार के शावक की हत्या के बाद वनकर्मी की तहरीर पर पुलिस ने एक नामजद सहित 25 अज्ञात के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। घटना के बाद से ही वन कर्मियों की टीमें मादा गुलदार और शावक को पकड़ने के लिए पिंजरों के साथ क्षेत्र में डटी थी।
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मंगलवार रात करीब 12 बजे मादा गुलदार पिंजरे में आ गई। टीम उसे लेकर कैलाशपुर के आंबेडकर पार्क स्थित वन रेंज कार्यालय पहुंची, जहां गुलदार के पिंजरे को रखा गया है। यहीं पर पहुंचे पशु चिकित्सक डा. संजय कुमार ने उसके स्वास्थ्य की जांच की, जो सही पाया गया। वर्ल्ड वाइड लाइफ फाउंडेशन फ़ॉर नेचर की टीम के देवदत्त पंवार और अनन्या भी मौके पर पहुंचे। इस दौरान डीएफओ रणबीर सिंह, शिवालिक एसडीओ श्वेता सैन, वन क्षेत्राधिकारी उमेश चंद शर्मा आदि मौके पर रहे।
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शावकों के बिछोह से हिंसक हुई मादा गुलदार
शावक की हत्या के बाद खूंखार हुई मादा गुलदार पिंजरे में तो आ गई लेकिन अभी तक वह अपने शावकों को लेकर हिंसक बनी हुई है। ऐसे में उसके पिंजरे को कपड़े से ढक कर रखा गया है। उसे अभी जंगल में भी नहीं छोड़ा गया है। डीएफओ सामाजिक वानिकी रणविजय सिंह ने बताया कि मादा गुलदार के दोनों शावक उससे दूर हैं, ऐसे में उसे अभी जंगल में छोड़ना खतरे से खाली नहीं होगा। वह अपने शावकों की तलाश में फिर से आबादी का रुख कर सकती है। दूसरे शावक को तलाश कर उसकी मां के साथ ही जंगल में छोड़ा जाएगा। तीन पिंजरे लगाकर छह-छह लोगों की तीन टीमें तैनात की गई हैं। शावक अभी शिकार करने लायक नहीं है, ऐसे में पिंजरों में भैंसें के मांस के टुकड़े लगाने के साथ ही 200 मीटर तक मांस को डाला गया है। ग्रामीणों को खेतों की तरफ न आने के लिए मंदिरों और मस्जिदों से घोषणा कराई गई है। उन्होंने बताया कि वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ की टीम भी देहरादून से आई थी।