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गन्ना बीज बेचने वाले किसानों को कराना होगा पंजीकरण
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सहारनपुर। प्रदेश सरकार ने गन्ने का बीज बेचने वाले किसानों के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया है। पंजीकरण गन्ना शोध परिषद में कराना होगा। इसके बाद ही उन्हें निर्धारित मूल्य पर गन्ना बीज बेचने का अधिकार होगा। इससे गन्ना बीज के मूल्य पर हो रही मनमानी पर अंकुश लगने में मदद मिलेगी।
गन्ना बीज के मनमाने रेट वसूलने से परेशान किसानों को जल्द ही राहत मिलेगी। कुछ किसान गन्ने के नई प्रजातियों की नर्सरी तैयार कर बीज को मनमाने रेट पर दूसरे किसानों को बेच रहे हैं। इस पर नियंत्रण के लिए गन्ना विभाग ने गन्ना बीज बेचने वाले किसानों के लिए गन्ना शोध परिषद में पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया है। सिर्फ पंजीकृत किसानों को ही गन्ना बीज बेचने का अधिकार होगा। इससे न सिर्फ गन्ना बीज के मनमाने रेट पर अंकुश लगेगा बल्कि नए बीज की धोखाधड़ी पर भी रोक लग सकेगी। गन्ना शोध परिषद में पंजीकरण के लिए एक हजार रुपये की फीस रखी गई है। उनका पंजीकरण तीन वर्षों के लिए मान्य होगा। इनके बाद उन्हें दोबारा नवीनीकरण कराना पडे़गा। पंजीकृत किसान बीज गन्ना उत्पादक किसान कहलाएंगे।
नई प्रजातियों की काफी मांग
गन्ने की लोकप्रिय अगेती प्रजाति सीओ-0238 में लाल सड़न आदि रोगों के बढ़ने के चलते किसान गन्ने की प्रजाति में बदलाव कर रहे हैं। गन्ना विभाग भी नई और उन्नतशील गन्ना प्रजातियों को बढ़ावा दे रहा है। इनमें कोलक-14201, कोशा- 13235, को- 15023 आदि नवीनतम प्रजाति शामिल हैं।
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गन्ने की नवीनतम प्रजातियों के बीज की उपलब्धता मांग की अपेक्षा कम है। इसके चलते कई किसानों ने प्रमाणित और अप्रमाणित दोनों स्रोतों से इन प्रजातियों का बीज प्राप्त कर नर्सरी तैयार कर रहे हैं। जिसे बीज के रूप में मनमाने दामों पर अन्य किसानों को बेचा जा रहा है। पंजीकरण होने से न सिर्फ बीज प्रजाति की शुद्घता की गारंटी होगी बल्कि मनमाने रेट पर भी अंकुश लग सकेगा। --- डॉ. दिनेश्वर मिश्र, उप गन्ना आयुक्त।
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गन्ना बीज के मनमाने रेट वसूलने से परेशान किसानों को जल्द ही राहत मिलेगी। कुछ किसान गन्ने के नई प्रजातियों की नर्सरी तैयार कर बीज को मनमाने रेट पर दूसरे किसानों को बेच रहे हैं। इस पर नियंत्रण के लिए गन्ना विभाग ने गन्ना बीज बेचने वाले किसानों के लिए गन्ना शोध परिषद में पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया है। सिर्फ पंजीकृत किसानों को ही गन्ना बीज बेचने का अधिकार होगा। इससे न सिर्फ गन्ना बीज के मनमाने रेट पर अंकुश लगेगा बल्कि नए बीज की धोखाधड़ी पर भी रोक लग सकेगी। गन्ना शोध परिषद में पंजीकरण के लिए एक हजार रुपये की फीस रखी गई है। उनका पंजीकरण तीन वर्षों के लिए मान्य होगा। इनके बाद उन्हें दोबारा नवीनीकरण कराना पडे़गा। पंजीकृत किसान बीज गन्ना उत्पादक किसान कहलाएंगे।
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नई प्रजातियों की काफी मांग
गन्ने की लोकप्रिय अगेती प्रजाति सीओ-0238 में लाल सड़न आदि रोगों के बढ़ने के चलते किसान गन्ने की प्रजाति में बदलाव कर रहे हैं। गन्ना विभाग भी नई और उन्नतशील गन्ना प्रजातियों को बढ़ावा दे रहा है। इनमें कोलक-14201, कोशा- 13235, को- 15023 आदि नवीनतम प्रजाति शामिल हैं।
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गन्ने की नवीनतम प्रजातियों के बीज की उपलब्धता मांग की अपेक्षा कम है। इसके चलते कई किसानों ने प्रमाणित और अप्रमाणित दोनों स्रोतों से इन प्रजातियों का बीज प्राप्त कर नर्सरी तैयार कर रहे हैं। जिसे बीज के रूप में मनमाने दामों पर अन्य किसानों को बेचा जा रहा है। पंजीकरण होने से न सिर्फ बीज प्रजाति की शुद्घता की गारंटी होगी बल्कि मनमाने रेट पर भी अंकुश लग सकेगा। --- डॉ. दिनेश्वर मिश्र, उप गन्ना आयुक्त।