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यमुना पार खेतों में जाने को जान जोखिम में डाल रहे किसान
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चौ रणवीर सिंह
- फोटो : SAHARANPUR
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साढ़ौली कदीम (सहारनपुर)। यमुना नदी में लगातार बढ़े हुए जल स्तर के चलते निकटवर्ती गांवों के किसान एवं मजदूर दूसरे छोर पर स्थित अपने खेतों पर जाने के लिए जान जोखिम में डाल रहे हैं। हथिनीकुंड बैराज के रास्ते हरियाणा होते हुए खेतों में जाने के लिए 70 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है, जिसमें ट्रैक्टर से पांच से छह घंटे का समय लगता है। इसमें समय और धन दोनों का अपव्यय होता है। ऐसे में ग्रामीणों ने यमुना पर पुल बनवाने की मांग की है।
यमुना के तटवर्ती नुनयारी, जोधेबांस, टटोहल, रसूली, धौलरा, नानौली, बरथा असलमपुर व बरथा कोरसी सहित लगभग 25 गांवों के किसानों के खेत यमुना के उस पार हैं। पुल नहीं होने के कारण उन्हें अपने खेतों पर जाने के लिए किसानों और मजदूरों को प्रतिदिन किश्ती, पैदल या ट्रैक्टर पर सवार होकर जान जोखिम में डाल यमुना पार करनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई माह से यमुना में जल स्तर बढ़ा हुआ है। इसके चलते वे समय पर अपनी फसलों का उठान भी नहीं कर पा रहे हैं। यमुना के दूसरे किनारे पर स्थित खेतों से पशुओं के लिए नियमित चारा भी नहीं ला पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यमुना के दूसरे किनारे पर यूपी की सीमा में हरियाणा के खनन माफिया बढे़ हुए जल स्तर का लाभ उठा अवैध खनन धड़ल्ले से कर रहे हैं।
चारा लेने गए मां बेटे की यमुना में डूब हो गई थी मौत
तहसील बेहट के गांव छज्जा निवासी निर्दोषो व उसका पुत्र गौरव इसी साल 7 फरवरी को यमुना पार अपने पशुओं के लिए चारे लेने गये थे। पानी के तेज बहाव में गौरव अचानक पैर फिसल कर गिर गया उसकी मां निर्दोषों उसे बचाने के लिए पानी की तेज धार की ओर बढ़ी तो दोनों मां बेटे यमुना में समा गए। दोनों की लाश भी कई दिनों की मशक्कत के बाद मिल पायी थी।
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किश्ती के सहारे पहुंचते हैं उस पार
गांव बरथा असलमपुर निवासी चौ. रणवीर सिंह का कहना है कि यमुना नदी पार करने को किश्ती का सहारा लेना पड़ता है, लेकिन उससे फसल नहीं आ पाती है। उन्हें अपनी गन्ने एवं सरसों की फसल उठान करने की चिंता सता रही है। उन्होंने यमुना नदी पर पुल निर्माण की मांग की है।
गन्ना औने पौने दाम हरियाणा में बेचने को मजबूर
गांव जोधेबांस निवासी किसान शम्भू राम कांबोज का कहना है कि यमुना के पार उनकी गन्ने की फसल खड़ी है जिसका उन्हें अपनी चीनी मिल के क्रय केन्द्र पर तौल करना है। यमुना में लगातार बढे़ हुए जलस्तर के चलते गन्ने की बुग्गी नहीं ला पा रहे हैं। मजबूरी में उन्हें हरियाणा में कोल्हू पर औने पौने दाम में गन्ना बेचना पड़ रहा है।
पशुओं के लिए हुआ चारे का भी संकट खड़ा
गांव नुनयारी निवासी मनोज कुमार का कहना है कि यमुना के दूसरे छोरे पर उनके खेतों में पशुओं के लिए चारे की फसल खड़ी है यमुना में ज्यादा पानी होने के चलते वे अपने पशुओं के लिए नियमित चारा भी नहीं ला पा रहे हैं।
घर इधर और घेर है यमुना पार
गांव रसूली निवासी चौधरी विश्वास लंबरदार का कहना है कि यमुना के एक किनारे पर उनका घर है तो दूसरे किनारे पर बैठक व पशुशाला है। उन्हें नियमित ही यमुना पार अपने डेरे पर जाना पड़ता है। कई बार सामान ज्यादा होने पर ट्रैक्टर के सहारे भी जान जोखिम में डाल यमुना पार करना पड़ता है।
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यमुना के तटवर्ती नुनयारी, जोधेबांस, टटोहल, रसूली, धौलरा, नानौली, बरथा असलमपुर व बरथा कोरसी सहित लगभग 25 गांवों के किसानों के खेत यमुना के उस पार हैं। पुल नहीं होने के कारण उन्हें अपने खेतों पर जाने के लिए किसानों और मजदूरों को प्रतिदिन किश्ती, पैदल या ट्रैक्टर पर सवार होकर जान जोखिम में डाल यमुना पार करनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई माह से यमुना में जल स्तर बढ़ा हुआ है। इसके चलते वे समय पर अपनी फसलों का उठान भी नहीं कर पा रहे हैं। यमुना के दूसरे किनारे पर स्थित खेतों से पशुओं के लिए नियमित चारा भी नहीं ला पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यमुना के दूसरे किनारे पर यूपी की सीमा में हरियाणा के खनन माफिया बढे़ हुए जल स्तर का लाभ उठा अवैध खनन धड़ल्ले से कर रहे हैं।
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चारा लेने गए मां बेटे की यमुना में डूब हो गई थी मौत
तहसील बेहट के गांव छज्जा निवासी निर्दोषो व उसका पुत्र गौरव इसी साल 7 फरवरी को यमुना पार अपने पशुओं के लिए चारे लेने गये थे। पानी के तेज बहाव में गौरव अचानक पैर फिसल कर गिर गया उसकी मां निर्दोषों उसे बचाने के लिए पानी की तेज धार की ओर बढ़ी तो दोनों मां बेटे यमुना में समा गए। दोनों की लाश भी कई दिनों की मशक्कत के बाद मिल पायी थी।
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किश्ती के सहारे पहुंचते हैं उस पार
गांव बरथा असलमपुर निवासी चौ. रणवीर सिंह का कहना है कि यमुना नदी पार करने को किश्ती का सहारा लेना पड़ता है, लेकिन उससे फसल नहीं आ पाती है। उन्हें अपनी गन्ने एवं सरसों की फसल उठान करने की चिंता सता रही है। उन्होंने यमुना नदी पर पुल निर्माण की मांग की है।
गन्ना औने पौने दाम हरियाणा में बेचने को मजबूर
गांव जोधेबांस निवासी किसान शम्भू राम कांबोज का कहना है कि यमुना के पार उनकी गन्ने की फसल खड़ी है जिसका उन्हें अपनी चीनी मिल के क्रय केन्द्र पर तौल करना है। यमुना में लगातार बढे़ हुए जलस्तर के चलते गन्ने की बुग्गी नहीं ला पा रहे हैं। मजबूरी में उन्हें हरियाणा में कोल्हू पर औने पौने दाम में गन्ना बेचना पड़ रहा है।
पशुओं के लिए हुआ चारे का भी संकट खड़ा
गांव नुनयारी निवासी मनोज कुमार का कहना है कि यमुना के दूसरे छोरे पर उनके खेतों में पशुओं के लिए चारे की फसल खड़ी है यमुना में ज्यादा पानी होने के चलते वे अपने पशुओं के लिए नियमित चारा भी नहीं ला पा रहे हैं।
घर इधर और घेर है यमुना पार
गांव रसूली निवासी चौधरी विश्वास लंबरदार का कहना है कि यमुना के एक किनारे पर उनका घर है तो दूसरे किनारे पर बैठक व पशुशाला है। उन्हें नियमित ही यमुना पार अपने डेरे पर जाना पड़ता है। कई बार सामान ज्यादा होने पर ट्रैक्टर के सहारे भी जान जोखिम में डाल यमुना पार करना पड़ता है।

शम्भू राम काम्बोज- फोटो : SAHARANPUR

मनोज कुमार- फोटो : SAHARANPUR

ट्रैक्टर पर बैठ कर यमुना पार करती महिला- फोटो : SAHARANPUR