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कृषि विविधिकरण अपनाकर बढ़ाई किसानों ने आमदनी

Sun, 12 Dec 2021 12:21 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 12 Dec 2021 12:21 AM IST
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Farmers increased income by adopting agricultural diversification
मशरूम की खेती - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। जनपद के किसानों ने पिछले 35 वर्षों में न सिर्फ खेती की नवीनतम तकनीक को आत्मसात किया बल्कि कृषि विविधीकरण को भी अपनाया है। जिससे कृषि और बागवानी के क्षेत्र में कई बदलाव आए हैं। किसानों का रुझान मशरूम उत्पादन से लेकर जैविक खेती की ओर हुआ। जिससे न केवल युवाओं को स्वरोजगार मिला है बल्कि किसानों की आमदनी भी बढ़ी है।
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जिले में गन्ना, गेहूं और धान सहित अन्य परम्परागत खेती भी होती है। पिछले तीन दशकों में किसानों ने खेती की नई तकनीकों को भी अपनाया है। जिससे फसलों का उत्पादन बढ़ने के साथ ही किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हुई है। जनपद के प्रगतिशील एक किसान जहां खेत में ही सिंघाड़ा का उत्पादन कर रहे हैं वहीं दो दर्जन से अधिक किसान जैविक खेती कर मृदा और मानव के स्वास्थ्य का ख्याल रख रहे हैं। इस दरमियान किसानों ने औषधीय खेती भी शुरू की है। इसमें लेमन ग्रास, सफेद मूसली, तुलसी, अश्वगंधा, एलोवेरा, शतावर की खेती शामिल हैं। सब्जियों की खेती में लौकी, खीरा, केरला, बैंगन और बागवानी में लीची, अमरूद, लोकाट, आम, पुलम, एप्पल बेर का क्षेत्रफल बढ़ा है। पिछले 35 वर्षों में आम की बागवानी में भी काफी इजाफा हुआ है। पहले करीब 15 हजार हेेक्टेयर में आम की बागवानी थी, जो अब बढ़कर 25 हजार हेक्टेयर से अधिक हो गया है। लीची का क्षेत्रफल 3200 हेक्टेयर, लोकाट का 50 और आडू का रकबा 400 हेक्टेयर हो गया।
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कई देशों में हो रहा आम का निर्यात
तीन दशकों में जनपद में आम का निर्यात होना शुरू हुआ है। मंडी समिति परिसर स्थित मैंगो पैक हाउस से प्रोसेस होने के बाद आम विश्व के कई देशों में जाता है। यहां से जापान, आस्ट्रेलिया, स्वीडन, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, कोरिया, उजबेकिस्तान, नेपाल, न्यूूजीलैंड, जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात आदि देशों में होता है। कोरोना के प्रकोप के बावजूद भी गत सीजन 727895 किलो आम का निर्यात हुआ है। विदेशों में चौसा, लंगड़ा, दशहरी, रामकेला आदि प्रजातियों को अधिक पसंद किया जाता है। साथ ही प्रायोगिक तौर पर कई सब्जियों का भी निर्यात हुआ है।
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नए प्रयोग कर रहे किसान
जनपद के कई प्रगतिशील किसान खेती में नए प्रयोग कर रहे हैं। गांव नंदी के किसान सेठपाल जहां खेत में सिंघाडे़ की खेती कर रहे हैं वहीं वे कमल ककड़ी, कमल का फूल और मछली पालन भी कर रहे हैं। किसान संजय चौहान से लेकर कई अन्य किसान गेहूं, गन्ना, धान और सब्जियों की जैविक खेती कर रहे हैं। गांव बहेड़ी गुर्जर के डॉक्टर विपिन परमार ने विश्व के सबसे महंगी मशरूम में से एक कीड़ाजड़ी का उत्पादन शुरू कर दिया है। जिले के करीब 200 से अधिक किसान मशरूम की खेती कर लाभ कमा रहे हैं।
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