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मृतकों की पहचान को परिजनों की होगी डीएनए जांच
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सहारनपुर। उत्तराखंड के जनपद चमोली में हुई जलप्रलय में मारे गए लोगों के अंगों की पहचान के लिए लापता लोगों के परिजनों की डीएनए जांच कराई जाएगी। इसके लिए प्रदेश के लापता हुए 67 लोगों के परिजनों का ब्लड सैंपल विधि विज्ञान प्रयोगशाला देहरादून भिजवाया जाएगा।
उत्तर प्रदेश की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार की ओर से संबंधित जिलाधिकारियों को लिखे पत्र में कहा गया है कि सात फरवरी को चमोली जनपद में हुई प्राकृतिक आपदा में लापता लोगों के शव क्षत-विक्षत मिल रहे हैं। जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। अज्ञात शवों की पहचान के लिए उनका डीएनए लिया गया है। जिनका मिलान लापता लोगों के परिजनों के डीएनए से कराया जाएगा। डीएनए का सैंपल लेने के लिए पहली वरीयता माता पिता दोनों का सैंपल लेने की है। यदि माता पिता में एक जीवित है तो उनका सैंपल, माता नहीं होने की स्थिति में लापता व्यक्ति के बच्चों में से किसी एक का ब्लड सैंपल लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन सैंपलों को एफटीए कार्ड में संकलित कराकर देहरादून की विधि विज्ञान प्रयोगशाला भिजवाए जाएं। सहारनपुर के 10 लोगों का नहीं लगा सुराग चमोली जल प्रलय के बाद से सहारनपुर जनपद के 11 लोग लापता हुए।
जांच के लिए हैदराबाद भेजा जाएगा विक्की की मां का डीएनए
देवबंद। उत्तराखंड त्रासदी का शिकार हुए विक्की कुमार की माता राजेश देवी का डीएनए सैंपल जांच के लिए हैदराबाद भेजा जाएगा। उसके बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि चमोली में मिला हाथ विक्की का है या नहीं।
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हरिद्वार की एक निजी कंपनी में कार्यरत मनोहरपुर गांव निवासी विक्की कुमार उत्तराखंड त्रासदी में हादसे का शिकार हुए थे। कई दिन तक विक्की की जानकारी नही मिलने पर परिजन तलाश में उत्तराखंड के चमोली में गए थे। इस बीच अस्पताल में मानव अंगों की पहचान के दौरान विक्की के भाई मोहित ने जले के निशान वाले हाथ की पहचान कर उसे विक्की का बताया था। जिसे कार्रवाई पूरी करने के बाद वह घर ले आए थे। 12 फरवरी को गांव में हाथ का अंतिम संस्कार किया गया था। विक्की के भाई अमित कुमार ने बताया कि चार दिन पूर्व मां राजेश देवी का उत्तराखंड में डीएनए सैंपल जांच के लिए लिया गया। जिसे हैदराबाद प्रयोगशाला भेजा जाएगा। वहां अधिकारियों ने बताने पर इतना ही कहा कि डीएनए की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकेगा।
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उत्तर प्रदेश की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार की ओर से संबंधित जिलाधिकारियों को लिखे पत्र में कहा गया है कि सात फरवरी को चमोली जनपद में हुई प्राकृतिक आपदा में लापता लोगों के शव क्षत-विक्षत मिल रहे हैं। जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। अज्ञात शवों की पहचान के लिए उनका डीएनए लिया गया है। जिनका मिलान लापता लोगों के परिजनों के डीएनए से कराया जाएगा। डीएनए का सैंपल लेने के लिए पहली वरीयता माता पिता दोनों का सैंपल लेने की है। यदि माता पिता में एक जीवित है तो उनका सैंपल, माता नहीं होने की स्थिति में लापता व्यक्ति के बच्चों में से किसी एक का ब्लड सैंपल लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन सैंपलों को एफटीए कार्ड में संकलित कराकर देहरादून की विधि विज्ञान प्रयोगशाला भिजवाए जाएं। सहारनपुर के 10 लोगों का नहीं लगा सुराग चमोली जल प्रलय के बाद से सहारनपुर जनपद के 11 लोग लापता हुए।
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जांच के लिए हैदराबाद भेजा जाएगा विक्की की मां का डीएनए
देवबंद। उत्तराखंड त्रासदी का शिकार हुए विक्की कुमार की माता राजेश देवी का डीएनए सैंपल जांच के लिए हैदराबाद भेजा जाएगा। उसके बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि चमोली में मिला हाथ विक्की का है या नहीं।
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हरिद्वार की एक निजी कंपनी में कार्यरत मनोहरपुर गांव निवासी विक्की कुमार उत्तराखंड त्रासदी में हादसे का शिकार हुए थे। कई दिन तक विक्की की जानकारी नही मिलने पर परिजन तलाश में उत्तराखंड के चमोली में गए थे। इस बीच अस्पताल में मानव अंगों की पहचान के दौरान विक्की के भाई मोहित ने जले के निशान वाले हाथ की पहचान कर उसे विक्की का बताया था। जिसे कार्रवाई पूरी करने के बाद वह घर ले आए थे। 12 फरवरी को गांव में हाथ का अंतिम संस्कार किया गया था। विक्की के भाई अमित कुमार ने बताया कि चार दिन पूर्व मां राजेश देवी का उत्तराखंड में डीएनए सैंपल जांच के लिए लिया गया। जिसे हैदराबाद प्रयोगशाला भेजा जाएगा। वहां अधिकारियों ने बताने पर इतना ही कहा कि डीएनए की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकेगा।