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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Eyes set on polarization

ध्रुवीकरण पर टिकी निगाहें

Sun, 07 Feb 2016 01:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Sun, 07 Feb 2016 01:18 AM IST
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इस्लामिक तालीम के सबसे बड़े मरकज दारुल उलूम के जरिये दुनियाभर में पहचान बनाने वाले देवबंद में हो रहे उपचुनाव में राजनीतिक दल ध्रुवीकरण के जरिये जीत की राह तलाश रहे हैं।
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यही कारण है कि मुजफ्फरनगर से लेकर सहारनपुर दंगों की याद दिलाकर सियासी दल कहीं सेक्यूलिरज्म का पाठ पढ़ाने की कोशिश कर रही हैं तो कहीं सीधे तौर पर जातीय समीकरण को तोड़ ध्रुवीकरण की पुरजोर कोशिश जारी है।
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चुनावी दंगल में बसपा, रालोद सहित अन्य प्रमुख दलों की गैरमौजूदगी से मुकाबला बेहद ही रोमांचक होने की उम्मीद है। उधर, मैदान में ताल ठोक रहे सियासी दलों की पैनी नजर बसपा के बेस दलित वोट बैंक पर भी टिकी है।
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मिशन-2017 के सेमीफाइनल के रूप में ट्रायल कर रहे राजनीतिक दलों के लिए देवबंद उपचुुनाव का परिणाम काफी मायने रखेगा। कारण, विश्वविख्यात दारुल उलूम के चलते देवबंद सीट पर हो रहे पूरे देश की निगाहें रहती है।

दुनिया भर के मुस्लिमों से सीधा जुड़ाव होने के कारण इस उपचुनाव में सियासी दलों को यहां की जीत-हार मायने रखती है। यही कारण है कि राजनीतिक दल यहां जीत के लिए हर हथकंडे को अपनाने से नहीं चूक रहे हैं।

मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में दंगे के बाद से देवबंद बेहद संवेदनशील हो गया है। छोटी-छोटी बातों पर सांप्रदायिक तनाव यहां आम हो चुका है। यही कारण है कि मोदी लहर के जरिये केंद्र में सत्ताधारी भाजपा सीधे तौर पर हिंदू मतों को एकजुट कर जीत की राह तलाश रही है।

अतिसंवेदनशील देवबंद में भाजपा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक रामपाल पुंडीर को अपना प्रत्याशी बनाकर साफ संदेश दे दिया है। चुनावी सरगर्मी तेज होने के साथ ही भाजपा आत्मसम्मान और दूसरे समुदाय के डर को मुद्दा बनाने में जुटी है। इसके जरिये जातीय समीकरण को समाप्त कर हिंदू मतों को पाले में करने की कवायद कर रही है।

राजेंद्र राणा के निधन से खाली हुई सीट पर उनकी पत्नी मीना राणा को प्रत्याशी बनाकर सपा मतदाताओं की सहानुभूति हासिल करना चाहती है। इसके लिए  हर हाल में मुस्लिम मतों को अपने पाले में कर हिंदू मतों को सहानुभूति के आधार पर अपने साथ करने की कोशिश कर रही है।

पार्टी हिंदू मतों में जातीय समीकरण साधने के लिए मजबूत पकड़ रखने वाले नेताओं की फौज भी उतार दी है। उधर, नगर पालिका चेयरमैन माविया अली को प्रत्याशी बनाकर कांग्रेस मुस्लिमों के बीच अपना संदेश देना चाह रही है।


अपनी खोई जमीन तलाश रही कांग्रेस की निगाह किसी जमाने में उसकी ताकत रही मुसलमान मतों पर है। इसके अलावा बसपा की गैरमौजूदगी में दलित मतों में  सेंधमारी करना चाहती है।

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