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नवरात्र और रमजान को लेकर उत्साह
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नक्खासा बाजार में रोजो के लिये फैनी और खजला खरीदते लोग
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। एक साथ शुरू हो रहे चैत्र नवरात्र और रमजान माह को लेकर लोगों में उत्साह है। बाजारों में पूजन सामग्री और व्रत के सामान की मांग बढ़ी है। वहीं, फैनी, खजूर और खजला भी मिठाई कारोबारी तैयार करा रहे हैं।
संभावना है कि चांद का दीदार होने पर 13 अप्रैल को पहला रोजा होगा और इसके साथ ही तरावीह शुरू हो जाएगी। इसी दिन पहला नवरात्र भी है। शुगर मिल किरयाना कारोबारी देशराज पप्पू और मोरगंज के व्यापारी दीपक मित्तल ने बताया कि कुट्टू, सिंघाड़े के आटे और सामंग के चावल की मांग बढ़ी है। इनके अतिरिक्त नारियल और पूजन सामग्री भी लोग खरीद रहे हैं। चौकी सराय के मिठाई कारोबारी नदीम अख्तर व साजिद खान ने बताया कि आर्डर पर फैनी तैयार की जा रही है। इसी तरह खजूर की मांग भी ज्यादा रहेगी।
धार्मिक स्थलों पर बरती जाएगी सावधानी
कोरोना संक्रमण बढ़ने की वजह से रात्रि कर्फ्यू है। ऐसे में मंदिरों में शाम को ही पूजा-अर्चना कर पाएंगे। धर्मस्थलों में सैनिटाजेशन, सोशल डिस्टेंसिंग एवं मास्क लगाना अनिवार्य होगा। मंदिर समितियों ने रात में कार्यक्रम निरस्त कर दिए हैं। वहीं, मुस्लिम धर्म गुरुओं ने तरावीह के लिए रात्रि कर्फ्यू दस बजे से लागू करने की मांग की है। जामा मस्जिद के प्रबंधक मौलाना मौलवी फरीद ने गाइडलाइन का पालन करने की अपील की है।
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मां के नौ रूपों की आराधना से दूर होते हैं कष्ट
बालाजी धाम के संस्थापक अतुल जोशी महाराज, आचार्य जितेंद्र शांडिल्य, आचार्य रोहित वशिष्ठ और राघवेंद्र स्वामी का कहना है कि प्रथम नवरात्र पर देवी शैलपुत्री, दूसरे पर देवी ब्रह्मचारिणी हैं। तीसरे पर देवी चंद्रघंटा, चौथे पर देवी कूष्मांडा, पांचवें पर देवी स्कंदमाता हैं। छठे पर देवी कात्यायनी हैं। सातवें पर देवी कालरात्रि, आठवें पर देवी महागौरी, नौंवे पर देवी सिद्धिदात्री की अराधना की जाती है। नौ दिनों में भगवती के नौ रूपों की पूजा कर भक्त जीवन में सुख शांति और आनंद की प्राप्ति करते हैं। भगवती के रूपों का संबंध मां पार्वती से है। श्रद्धालुओं को या देवी सर्वभूतेषु, शक्ति रूपेण संस्थिता:। नमस्तस्यै-नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम: एवं ओम ऐम ह्रीं कलीम चामुण्डायै विच्चे का जप करना चाहिए।
कलश स्थापित करने का शुभ मुहूर्त
13 अप्रैल को कलश स्थापित करने का शुभ मुहूर्त प्रात: 6:19 से 10:30 बजे तक, उसके पश्चात 10:40 से 12:06 बजे तक है।
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संभावना है कि चांद का दीदार होने पर 13 अप्रैल को पहला रोजा होगा और इसके साथ ही तरावीह शुरू हो जाएगी। इसी दिन पहला नवरात्र भी है। शुगर मिल किरयाना कारोबारी देशराज पप्पू और मोरगंज के व्यापारी दीपक मित्तल ने बताया कि कुट्टू, सिंघाड़े के आटे और सामंग के चावल की मांग बढ़ी है। इनके अतिरिक्त नारियल और पूजन सामग्री भी लोग खरीद रहे हैं। चौकी सराय के मिठाई कारोबारी नदीम अख्तर व साजिद खान ने बताया कि आर्डर पर फैनी तैयार की जा रही है। इसी तरह खजूर की मांग भी ज्यादा रहेगी।
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धार्मिक स्थलों पर बरती जाएगी सावधानी
कोरोना संक्रमण बढ़ने की वजह से रात्रि कर्फ्यू है। ऐसे में मंदिरों में शाम को ही पूजा-अर्चना कर पाएंगे। धर्मस्थलों में सैनिटाजेशन, सोशल डिस्टेंसिंग एवं मास्क लगाना अनिवार्य होगा। मंदिर समितियों ने रात में कार्यक्रम निरस्त कर दिए हैं। वहीं, मुस्लिम धर्म गुरुओं ने तरावीह के लिए रात्रि कर्फ्यू दस बजे से लागू करने की मांग की है। जामा मस्जिद के प्रबंधक मौलाना मौलवी फरीद ने गाइडलाइन का पालन करने की अपील की है।
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मां के नौ रूपों की आराधना से दूर होते हैं कष्ट
बालाजी धाम के संस्थापक अतुल जोशी महाराज, आचार्य जितेंद्र शांडिल्य, आचार्य रोहित वशिष्ठ और राघवेंद्र स्वामी का कहना है कि प्रथम नवरात्र पर देवी शैलपुत्री, दूसरे पर देवी ब्रह्मचारिणी हैं। तीसरे पर देवी चंद्रघंटा, चौथे पर देवी कूष्मांडा, पांचवें पर देवी स्कंदमाता हैं। छठे पर देवी कात्यायनी हैं। सातवें पर देवी कालरात्रि, आठवें पर देवी महागौरी, नौंवे पर देवी सिद्धिदात्री की अराधना की जाती है। नौ दिनों में भगवती के नौ रूपों की पूजा कर भक्त जीवन में सुख शांति और आनंद की प्राप्ति करते हैं। भगवती के रूपों का संबंध मां पार्वती से है। श्रद्धालुओं को या देवी सर्वभूतेषु, शक्ति रूपेण संस्थिता:। नमस्तस्यै-नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम: एवं ओम ऐम ह्रीं कलीम चामुण्डायै विच्चे का जप करना चाहिए।
कलश स्थापित करने का शुभ मुहूर्त
13 अप्रैल को कलश स्थापित करने का शुभ मुहूर्त प्रात: 6:19 से 10:30 बजे तक, उसके पश्चात 10:40 से 12:06 बजे तक है।

फव्वारा चौक पर रोजो के लिये खजूर खरीदते लोग- फोटो : SAHARANPUR

दिल्ली रोड़ पर नवरात्रि पर दुकानो पर सजा नव रात्रि का सामान- फोटो : SAHARANPUR

खलासी लाइन में नवरात्रि पर दुकान पा सजी माता की मूर्ति- फोटो : SAHARANPUR