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सरकारी विद्यालयों में बढ़ा बच्चों का नामांकन
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सहारनपुर। कोरोना की दोनों लहर के बाद सरकारी विद्यालयों में नामांकन बढ़ा है। नामांकन बढ़ने की प्रमुख वजह मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई जारी नहीं रखना और फीस के लिए दबाव बनाना है। नतीजा बच्चे निजी विद्यालयों से सरकारी की ओर ट्रांसफर हो गए हैं।
जनपद में परिषदीय विद्यालयों की संख्या 1438 है। सत्र 2020 -21 में जनपद के परिषदीय विद्यालयों में 1,92,180 विद्यार्थी पंजीकृत थे। जो इस बार यानी सत्र 2021-22 में बढ़कर 1,97,545 पर पहुंच चुके हैं। यानी फिलहाल तक बीते वर्ष की तुलना में 5365 नामांकन बढ़े हैं। जबकि अभी दाखिले 30 सितंबर तक चलने हैं। ऐसे में विभाग को पंजीकृत विद्यार्थियों का आंकड़ा दो लाख से ऊपर जाने की उम्मीद अधिकारी जता रहे हैं।
उधर, माध्यमिक विद्यालयों में भी यही स्थिति है। जनपद में 335 माध्यमिक विद्यालय हैं, इनमें राजकीय, एडेड और वित्त विहीन विद्यालय शामिल हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें तो इस बार दस से 20 फीसदी संख्या बढ़ी है। इसकी प्रमुख वजह ज्यादातर मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों (हिंदी माध्यम) द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई जारी नहीं रखना तथा बच्चों की कई माह की फीस जमा नहीं होना है। विद्यालय लगातार फीस जमा कराने का दबाव बना रहे हैं। कई बच्चों की करीब एक-एक साल की फीस बकाया है। इसे चुका पाने में अभिभावक सक्षम नहीं हैं। ऐसे में वह अपने बच्चों के दाखिले सरकारी विद्यालयों में करा रहे हैं। नामांकन बढ़ने को लेकर विभागीय अधिकारी और प्रधानाचार्य खुश हैं।
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परिषदीय विद्यालयों में बीते वर्ष की तुलना में इस बार नामांकन बढ़ा है। अभी तक पांच हजार से अधिक नामांकन अधिक हो चुक हैं। अब भी नामांकन चल रहे हैं। हमें उम्मीद है कि 30 सितंबर तक नामांकन दो लाख से ऊपर होगा। - अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
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जनपद में परिषदीय विद्यालयों की संख्या 1438 है। सत्र 2020 -21 में जनपद के परिषदीय विद्यालयों में 1,92,180 विद्यार्थी पंजीकृत थे। जो इस बार यानी सत्र 2021-22 में बढ़कर 1,97,545 पर पहुंच चुके हैं। यानी फिलहाल तक बीते वर्ष की तुलना में 5365 नामांकन बढ़े हैं। जबकि अभी दाखिले 30 सितंबर तक चलने हैं। ऐसे में विभाग को पंजीकृत विद्यार्थियों का आंकड़ा दो लाख से ऊपर जाने की उम्मीद अधिकारी जता रहे हैं।
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उधर, माध्यमिक विद्यालयों में भी यही स्थिति है। जनपद में 335 माध्यमिक विद्यालय हैं, इनमें राजकीय, एडेड और वित्त विहीन विद्यालय शामिल हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें तो इस बार दस से 20 फीसदी संख्या बढ़ी है। इसकी प्रमुख वजह ज्यादातर मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों (हिंदी माध्यम) द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई जारी नहीं रखना तथा बच्चों की कई माह की फीस जमा नहीं होना है। विद्यालय लगातार फीस जमा कराने का दबाव बना रहे हैं। कई बच्चों की करीब एक-एक साल की फीस बकाया है। इसे चुका पाने में अभिभावक सक्षम नहीं हैं। ऐसे में वह अपने बच्चों के दाखिले सरकारी विद्यालयों में करा रहे हैं। नामांकन बढ़ने को लेकर विभागीय अधिकारी और प्रधानाचार्य खुश हैं।
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परिषदीय विद्यालयों में बीते वर्ष की तुलना में इस बार नामांकन बढ़ा है। अभी तक पांच हजार से अधिक नामांकन अधिक हो चुक हैं। अब भी नामांकन चल रहे हैं। हमें उम्मीद है कि 30 सितंबर तक नामांकन दो लाख से ऊपर होगा। - अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।