सहारनपुर। खादी को बढ़ावा देने के लिए शुरू हुए खादी आश्रम घाटा झेल रहे हैं। कोरोना काल की वजह से खादी उत्पादों की बिक्री पर बुरा प्रभाव पड़ा और कारोबार आधा रह गया। इस कारण घाटे के दौर में श्री गांधी आश्रम से जुड़े कर्मचारियों को आधी तनख्वाह में ही गुजारा करना पड़ रहा है। सरकार की तरफ से इस तरफ ध्यान नहीं देने से उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
सहारनपुर में श्री गांधी आश्रम का क्षेत्रीय कार्यालय है, जिससे सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली के अलावा हरिद्वार जनपद के भी गांधी आश्रमों का संचालन यहीं से होता है। चारों जिले में वर्तमान में 115 कर्मी कार्यरत हैं। पूर्व में इन चारों जिलों में गांधी आश्रमों से करीब 12 करोड़ रुपये के खादी एवं अन्य उत्पादों की बिक्री होती थी, लेकिन अब यह छह से सात करोड़ रह गई है। घंटाघर स्थित गांधी आश्रम की ही बात करें तो यहां सालाना टर्नओवर करीब डेढ़ करोड़ का था जो अब 70 से 80 लाख रह गया है। खास बात यह है कि उत्पाद तैयार करने में लागत भी ज्यादा आ रही है, क्योंकि सूत की कताई और बुनाई का कार्य लोगों से कराया जाता है तो काफी महंगा पड़ता है। इस कारण उत्पाद भी महंगा बिकता है। श्री गांधी आश्रम क्षेत्रीय कार्यालय के प्रबंधक महातम यादव का कहना है कि बीते वित्तीय वर्ष में ही 94 लाख का घाटा सामने आया था। फिलहाल कर्मचारियों को आधी तनख्वाह दी जा रही है। सभी कर्मियों के वेतन आदि का खर्च करीब ढाई करोड़ रुपये है, जबकि उत्पादों की ढुलाई आदि का खर्च अलग है। इसी कारण घाटा होता है, यदि सरकार कुछ प्रयास करे तो स्थिति बेहतर हो सकती है। वहीं, घंटाघर स्थित श्री गांधी आश्रम के प्रबंधक रामजन्म मौर्य भी कहते हैं कि कोरोना की वजह से गांधी आश्रमों के उत्पादों की बिक्री ज्यादा प्रभावित हुई है।

श्री गांधी आश्रम के क्षेत्रीय कार्यालय में रखा सूत- फोटो : SAHARANPUR

- श्री गांधी आश्रम क्षेत्रीय कार्यालय के भवन में जर्जर लिंटर- फोटो : SAHARANPUR