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हेल्पलाइन : ईद की नमाज से पहले सदका- ए- फितर अदा करें
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ईद की नमाज से पहले सदका-ए-फितर अदा करें
सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुस्लिमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने हेल्पलाइन पर रोजेदारों के सवालों के जवाब देेते हुए बताया कि फितरा, वो रकम होती है, जो खाते-पीते, साधन-संपन्न घरानों के लोग आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को देते हैं। ईद की नमाज से पहले इसका अदा करना जरूरी होता है। इस तरह अमीर के साथ ही गरीब की ईद भी अच्छी मन जाती है। फितरे की रकम को गरीबों, विधवाओं, यतीमों और जरूरतमंदों को देनी चाहिए।
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सवाल- खानआलमपुरा निवासी शाहबाज ने पूछा कि रोजे की हालत में कोई व्यक्ति दांत निकलवा सकता है। इससे रोजा तो नहीं टूटेगा।
जवाब:- शरीयत के मुताबिक यदि खून या दवा हलक के अंदर न जाए तो रोजे की हालत में दांत निकलवाया जा सकता है।
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सवाल:- आवास विकास कालोनी निवासी शोएब ने पूछा कि उनकी पिछले वर्ष की कुछ जकात अदा करनी बाकी रह गई थी। इस बार क्या पिछली और इस बार की जकात अदा करनी जरूरी है।
जवाब:- जी हां, जकात अदा करना हर साहिब-ए-निसाब पर बड़ी जिम्मेदारी है। हर मालदार को अपनी जकात जिम्मेदारी से अदा करनी चाहिए, जिस वर्ष की जकात हो, उसी साल पूरी अदा करनी चाहिए। अब शरीयत के अनुसार पिछले वर्ष और इस बार की जकात दोनों अदा करनी जरूरी है।
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इन नंबरों पर पूछें सवाल
सहारनपुर। इन नंबरों पर 09897399207, 9557757705, 9368399214 पर दोपहर 12:00 से 3:00 बजे तक कॉल और व्हाट्सएप कर सवाल पूछ सकते हैं।
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सहारनपुर। जमीयत दावतुल मुस्लिमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने हेल्पलाइन पर रोजेदारों के सवालों के जवाब देेते हुए बताया कि फितरा, वो रकम होती है, जो खाते-पीते, साधन-संपन्न घरानों के लोग आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को देते हैं। ईद की नमाज से पहले इसका अदा करना जरूरी होता है। इस तरह अमीर के साथ ही गरीब की ईद भी अच्छी मन जाती है। फितरे की रकम को गरीबों, विधवाओं, यतीमों और जरूरतमंदों को देनी चाहिए।
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सवाल- खानआलमपुरा निवासी शाहबाज ने पूछा कि रोजे की हालत में कोई व्यक्ति दांत निकलवा सकता है। इससे रोजा तो नहीं टूटेगा।
जवाब:- शरीयत के मुताबिक यदि खून या दवा हलक के अंदर न जाए तो रोजे की हालत में दांत निकलवाया जा सकता है।
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सवाल:- आवास विकास कालोनी निवासी शोएब ने पूछा कि उनकी पिछले वर्ष की कुछ जकात अदा करनी बाकी रह गई थी। इस बार क्या पिछली और इस बार की जकात अदा करनी जरूरी है।
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जवाब:- जी हां, जकात अदा करना हर साहिब-ए-निसाब पर बड़ी जिम्मेदारी है। हर मालदार को अपनी जकात जिम्मेदारी से अदा करनी चाहिए, जिस वर्ष की जकात हो, उसी साल पूरी अदा करनी चाहिए। अब शरीयत के अनुसार पिछले वर्ष और इस बार की जकात दोनों अदा करनी जरूरी है।
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इन नंबरों पर पूछें सवाल
सहारनपुर। इन नंबरों पर 09897399207, 9557757705, 9368399214 पर दोपहर 12:00 से 3:00 बजे तक कॉल और व्हाट्सएप कर सवाल पूछ सकते हैं।