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Saharanpur News: विद्यार्थियों की मनोवैज्ञानिक समस्याएं दूर करेंगी शिक्षण संस्थाएं
Wed, 25 Jan 2023 11:04 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 25 Jan 2023 11:04 PM IST
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सहारनपुर। उच्च शिक्षण संस्थान अब विद्यार्थियों को केवल पढ़ाने का ही काम नहीं करेंगी, बल्कि विद्यार्थियों की मनोवैज्ञानिक समस्याओं का समाधान भी करेंगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शासन ने सभी उच्च शिक्षण संस्थाओं में विद्यार्थियों की मदद के लिए मेंटरिंग एवं मनोवैज्ञानिक परामर्श प्रकोष्ठ गठित करने के आदेश दिए हैं। मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय की ओर से भी इस संबंध में संबद्घ सभी उच्च शिक्षण संस्थाओं को पत्र जारी कर कदम उठाने को कहा गया है।
प्रतिस्पर्धा के दौर में विद्यार्थी एक दूसरे को पछाड़ने की होड़ में लगे हुए हैं, लेकिन जब परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं आता है तो वह तनाव में चले जाते हैं। कई बार यह तनाव अवसाद में बदल जाता है, जो विद्यार्थियों को गलत कदम उठाने तक के लिए मजबूर कर देता है। प्रत्येक वर्ष परीक्षा परिणाम आने के बाद इस प्रकार की घटनाएं सुनने और देखने को मिलती हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति निर्धारकों ने इस पहल को ध्यान में रखते हुए ही प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान में मेंटरिंग एवं मनोवैज्ञानिक परामर्श प्रकोष्ठ गठित करने का प्रावधान रखा है। विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव वीरेंद्र कुमार मौर्य ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर महाविद्यालयों और निजी उच्च शिक्षण संस्थाओं को पत्र जारी किया गया है। प्रकोष्ठ का गठन कराने के बाद विश्वविद्यालय को अवगत कराने की भी बात प्राचार्यों और प्रबंधकों से कही गई है।
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यह उठाए जाएंगे कदम
- विद्यार्थियों के लिए समय-समय पर मनोवैज्ञानिक परामर्श कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
- मनोवैज्ञानिक समस्याओं से जूझ रहे विद्यार्थियों को चिह्नित कर उनके परिवारों को अवगत कराया जाएगा।
- प्रत्येक विद्यार्थी के लिए प्रवेश के समय एक शिक्षक को मेंटर नियुक्त किया जाएगा।
- संस्थाओं में मेंटर-मेंटी योजना तैयार की जाएगी।
- विद्यार्थियों के जीवन कौशल एवं व्यक्तित्व विकास के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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प्रतिस्पर्धा के दौर में विद्यार्थी एक दूसरे को पछाड़ने की होड़ में लगे हुए हैं, लेकिन जब परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं आता है तो वह तनाव में चले जाते हैं। कई बार यह तनाव अवसाद में बदल जाता है, जो विद्यार्थियों को गलत कदम उठाने तक के लिए मजबूर कर देता है। प्रत्येक वर्ष परीक्षा परिणाम आने के बाद इस प्रकार की घटनाएं सुनने और देखने को मिलती हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति निर्धारकों ने इस पहल को ध्यान में रखते हुए ही प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान में मेंटरिंग एवं मनोवैज्ञानिक परामर्श प्रकोष्ठ गठित करने का प्रावधान रखा है। विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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विश्वविद्यालय के कुलसचिव वीरेंद्र कुमार मौर्य ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर महाविद्यालयों और निजी उच्च शिक्षण संस्थाओं को पत्र जारी किया गया है। प्रकोष्ठ का गठन कराने के बाद विश्वविद्यालय को अवगत कराने की भी बात प्राचार्यों और प्रबंधकों से कही गई है।
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यह उठाए जाएंगे कदम
- विद्यार्थियों के लिए समय-समय पर मनोवैज्ञानिक परामर्श कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
- मनोवैज्ञानिक समस्याओं से जूझ रहे विद्यार्थियों को चिह्नित कर उनके परिवारों को अवगत कराया जाएगा।
- प्रत्येक विद्यार्थी के लिए प्रवेश के समय एक शिक्षक को मेंटर नियुक्त किया जाएगा।
- संस्थाओं में मेंटर-मेंटी योजना तैयार की जाएगी।
- विद्यार्थियों के जीवन कौशल एवं व्यक्तित्व विकास के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।