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कचरा डालने की बजाए कचरे में फेंक दिए डस्टबिन
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चकराता मार्ग पर टूटे पडे कूढेदान
- फोटो : SAHARANPUR
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कचरा डालने की बजाए कचरे में फेंक दिए डस्टबिन
सहारनपुर। करीब पांच माह पहले 49 लाख रुपये खर्च कर बाजारों में लगवाए गए डस्टबिन ज्यादातर जगहों से गायब हो गए हैं। जिन डस्टबिनों में कचरा रखा जाना था वे कई जगहों पर कचरे में पड़े हैं।
स्व्च्छ भारत मिशन के तहत शहर को साफ और सुंदर बनाने के लिए नगर निगम ने गीले और सूखे कचरे के लिए हरे और नीले रंग के डस्टबिन के जोड़े बाजारों में सड़कों किनारे और डिवाइडर के बीच में रखवाए थे। ताकि लोग खुले में कचरा डालने की बजाय इन डस्टबिनों का इस्तेमाल करें। लेकिन पांच माह बाद ही बाजारों और सड़कों से डस्टबिन गायब हो चुके हैं। पुल जोगियान से चकराता रोड की ओर जाने वाले मार्केट के बाहर केवल डस्टबिन के स्टैंड नजर आ रहे हैं। कई जगहों पर डस्टबिन कचरे में पड़े हैं। इतना ही नहीं, जिन जगहों पर डस्टबिन लगे हैं वहां भी उनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। निगम के सूत्रों ने बताया कि कई बाजारों में डस्टबिन को हटवाने के लिए स्थानीय लोगों ही ने आग के हवाले कर दिया।
डस्टबिन की कीमत
डस्टबिन की खरीद जैम पोर्टल के तहत किया गया। इसके एक जोड़े की कीमत 4200 रुपये थी, जो जीएसटी लगने के बाद नगर निगम को 4900 रुपये में पड़ी है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि एक हजार डस्टबिन खरीदे गए थे, जिनकी लागत 49 लाख रुपये आई थी।
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शौचालयों से भी सामान गायब
नगर निगम ने कुछ समय पहले सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों में मग, सीट साफ करने के लिए ब्रश और क्लीनर रखवाए थे। नगर निगम सूत्रों ने बताया कि लगभग सभी शौचालयों से ये सभी सामान गायब है।
शहर को स्वच्छ बनाने के लिए रखे गए डस्टबिन कई जगहों से गायब है। सूचना मिली है कि लोगों ने डस्टबिन को जला दिया। इसके अलावा हम शौचालयों में सुविधा के लिए बार-बार सामान दे रहे हैं। वह भी चोरी हो रहे हैं। आम नागरिक को शहर के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
श्यामबिहारी अग्रहरि, गैराज प्रभारी।
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सहारनपुर। करीब पांच माह पहले 49 लाख रुपये खर्च कर बाजारों में लगवाए गए डस्टबिन ज्यादातर जगहों से गायब हो गए हैं। जिन डस्टबिनों में कचरा रखा जाना था वे कई जगहों पर कचरे में पड़े हैं।
स्व्च्छ भारत मिशन के तहत शहर को साफ और सुंदर बनाने के लिए नगर निगम ने गीले और सूखे कचरे के लिए हरे और नीले रंग के डस्टबिन के जोड़े बाजारों में सड़कों किनारे और डिवाइडर के बीच में रखवाए थे। ताकि लोग खुले में कचरा डालने की बजाय इन डस्टबिनों का इस्तेमाल करें। लेकिन पांच माह बाद ही बाजारों और सड़कों से डस्टबिन गायब हो चुके हैं। पुल जोगियान से चकराता रोड की ओर जाने वाले मार्केट के बाहर केवल डस्टबिन के स्टैंड नजर आ रहे हैं। कई जगहों पर डस्टबिन कचरे में पड़े हैं। इतना ही नहीं, जिन जगहों पर डस्टबिन लगे हैं वहां भी उनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। निगम के सूत्रों ने बताया कि कई बाजारों में डस्टबिन को हटवाने के लिए स्थानीय लोगों ही ने आग के हवाले कर दिया।
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डस्टबिन की कीमत
डस्टबिन की खरीद जैम पोर्टल के तहत किया गया। इसके एक जोड़े की कीमत 4200 रुपये थी, जो जीएसटी लगने के बाद नगर निगम को 4900 रुपये में पड़ी है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि एक हजार डस्टबिन खरीदे गए थे, जिनकी लागत 49 लाख रुपये आई थी।
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शौचालयों से भी सामान गायब
नगर निगम ने कुछ समय पहले सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों में मग, सीट साफ करने के लिए ब्रश और क्लीनर रखवाए थे। नगर निगम सूत्रों ने बताया कि लगभग सभी शौचालयों से ये सभी सामान गायब है।
शहर को स्वच्छ बनाने के लिए रखे गए डस्टबिन कई जगहों से गायब है। सूचना मिली है कि लोगों ने डस्टबिन को जला दिया। इसके अलावा हम शौचालयों में सुविधा के लिए बार-बार सामान दे रहे हैं। वह भी चोरी हो रहे हैं। आम नागरिक को शहर के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
श्यामबिहारी अग्रहरि, गैराज प्रभारी।