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मुख्य विकास अधिकारी के खिलाफ विकास भवन पर धरना
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 31 Mar 2017 12:44 AM IST
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विकास भवन पर धरना देते प्रधान ओर सचिव।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में मुख्य विकास अधिकारी के खिलाफ ग्राम प्रधानों एवं ग्राम पंचायत सचिवों ने दूसरे दिन विकास भवन पहुंचकर धरना दिया और जमकर हंगामा किया। सीडीओ पर उत्पीड़न का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि उत्पीड़न नहीं रोका गया तो पूर्ण रूप से कार्य बहिष्कार कर दिया जाएगा।
बृहस्पतिवार को ग्राम प्रधान एवं ग्राम पंचायत सचिव एकत्रित होकर विकास भवन पहुंचे और धरना देकर हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने सीडीओ पर शौचालय निर्माण में जबरन गड़बड़ी थोपकर उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए सीडीओ के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रधानों एवं सचिवों का कहना है कि रेत बजरी एवं अन्य निर्माण सामग्री उचित दर पर उपलब्ध नहीं होने के बावजूद लगभग 25000 शौचालयों का निर्माण कराया गया।
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लेकिन सीडीओ ने नोडल अधिकारियों पर दबाव बनाकर जबरन शौचालय निर्माण में कमियां निकलवाई और गलत जांच रिपोर्ट बनाकर बिना सुनवाई, बिना कार्य में सुधार का अवसर दिए वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी है।
उन्होंने कहा कि इतने बड़े काम में कुछ मानवीय भूल की संभावना भी रहती है। कहीं लाभार्थी खुद तोड़फोड़ कर बदल देता है, सोख्ता गड्ढा तोड़कर लाभार्थी पक्का बना लेता है, कुछ प्रार्थी शौचालय को स्टोर ही बना देते हैं। पानी भरने का हौज तोड़ दिया जाता है।
इन व्यवहारिक समस्याओं की अनदेखी कर इसका दोष ग्राम प्रधानों एवं ग्राम पंचायत सचिवों को दोषी मान लिया और वसूली शुरू करा दी। जांच के लिए जाने वाले अधिकारी अभद्रता करते हैं। जबकि उन्होंने जो शौचालय बना दिए हैं उनका पैसा तक नहीं दिया गया, पैसा लेने पहुंचे तो मना कर दिया गया।
जिससे प्रधानों पर कर्ज हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि उत्पीड़नात्मक कार्रवाई बंद नहीं की गई तो प्रधान एवं सचिव कार्य बहिष्कार करेंगे।
इस संबंध में उन्होंने सीडीओ को ज्ञापन सौंपा। हंगामा करने वालों में योगेंद्र कुमार, नेत्रपाल सिंह, सतवीर सिंह समेत अनेक ग्राम प्रधान एवं सचिव मौजूद रहे।
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बृहस्पतिवार को ग्राम प्रधान एवं ग्राम पंचायत सचिव एकत्रित होकर विकास भवन पहुंचे और धरना देकर हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने सीडीओ पर शौचालय निर्माण में जबरन गड़बड़ी थोपकर उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए सीडीओ के खिलाफ नारेबाजी की।
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प्रधानों एवं सचिवों का कहना है कि रेत बजरी एवं अन्य निर्माण सामग्री उचित दर पर उपलब्ध नहीं होने के बावजूद लगभग 25000 शौचालयों का निर्माण कराया गया।
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लेकिन सीडीओ ने नोडल अधिकारियों पर दबाव बनाकर जबरन शौचालय निर्माण में कमियां निकलवाई और गलत जांच रिपोर्ट बनाकर बिना सुनवाई, बिना कार्य में सुधार का अवसर दिए वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी है।
उन्होंने कहा कि इतने बड़े काम में कुछ मानवीय भूल की संभावना भी रहती है। कहीं लाभार्थी खुद तोड़फोड़ कर बदल देता है, सोख्ता गड्ढा तोड़कर लाभार्थी पक्का बना लेता है, कुछ प्रार्थी शौचालय को स्टोर ही बना देते हैं। पानी भरने का हौज तोड़ दिया जाता है।
इन व्यवहारिक समस्याओं की अनदेखी कर इसका दोष ग्राम प्रधानों एवं ग्राम पंचायत सचिवों को दोषी मान लिया और वसूली शुरू करा दी। जांच के लिए जाने वाले अधिकारी अभद्रता करते हैं। जबकि उन्होंने जो शौचालय बना दिए हैं उनका पैसा तक नहीं दिया गया, पैसा लेने पहुंचे तो मना कर दिया गया।
जिससे प्रधानों पर कर्ज हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि उत्पीड़नात्मक कार्रवाई बंद नहीं की गई तो प्रधान एवं सचिव कार्य बहिष्कार करेंगे।
इस संबंध में उन्होंने सीडीओ को ज्ञापन सौंपा। हंगामा करने वालों में योगेंद्र कुमार, नेत्रपाल सिंह, सतवीर सिंह समेत अनेक ग्राम प्रधान एवं सचिव मौजूद रहे।