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ड्रोन कैमरों से होगी मां शाकंभरी देवी मेले की निगरानी

Wed, 06 Oct 2021 12:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 06 Oct 2021 12:09 AM IST
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Drone cameras will be monitored in Maa Shakambhari Devi fair
लगने वाले शाकंभरी देवी मेले के बारे में जानकारी देते जिला पंचायत अध्यक्ष मांगेराम चौधरी - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। प्राचीन सिद्धपीठ मां शाकंभरी देवी मंदिर में लगने वाले मेले का शुभारंभ आज (बुधवार) प्रदेश सरकार के पंचायतीराज मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह करेंगे। जिला पंचायत अध्यक्ष मांगेराम चौधरी ने कहा कि मेले में साफ सफाई से लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष फोकस रहेगा। पहली बार मेले की निगरानी ड्रोन कैमरों से की जाएगी। सात वाटर प्रूफ टेंट भी लगाए जाएंगे। ताकि रात में रुकने वाले श्रद्घालुओं को परेशानी का सामना ना करना पड़े।
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मंगलवार को जिला पंचायत स्थित कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता में जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा मां शाकंभरी मेले का भव्य आयोजन होगा। मेला परिसर में अचानक आने वाले पानी की पांच किलोमीटर ऊपर से निगरानी की जाएगी। अचानक पानी आने से पहले ही वहां मौजूद फोर्स के व्यक्ति मेला परिसर में लगे सायरन बजाकर इसकी सूचना देंगे। ताकि मेला परिसर में मौजूद श्रद्घालु सुरक्षित स्थान पर पहुंच जाएं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए मेला परिसर में दस सीसीटीवी लगाए हैं। माता के मंदिर से 700 मीटर तक बैरिकेडिंग के साथ ही मैट भी पहली बार बिछाए जा रहे हैं। ताकि नंगे पांव आए श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना ना करना पड़े। साथ ही पेयजल के लिए पांच टैंकर और 150 टोंटी की व्यवस्था की है। 1400 मीटर क्षेत्र में लाइट की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि मेला परिसर में अब मोबाइल रेंज की परेशानी नहीं रहेगी। इसके लिए बीएसएनएल अस्थायी टावर की व्यवस्था कर रहा है। इस दौरान अपर मुख्याधिकारी डॉक्टर सुमनलता, अभियंता इलम चंद, चौधरी बिजेंद्र प्रमुख आदि मौजूद रहे।
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बेहद प्राचीन है मंदिर
शिवालिक के पर्वत पर स्थित मां शाकंभरी देवी मंदिर बेहद प्राचीन है। कामाख्या, रजरप्पा पीठ, तारापीठ, विंध्याचल पीठ की भांति यह भी एक सिद्ध पीठ है, क्योंकि यहां मां की प्रतिमा स्वयं सिद्ध है, जोकि दुर्लभ क्षेत्रों में ही होती है। केदार खंड के अनुसार यह शाकंभरी क्षेत्र है, इसकी महिमा अपार है। पुराण और आगम ग्रंथों में यह परम पीठ, शक्तिपीठ, सती पीठ और सिद्ध पीठ नामों से जाना जाता है। भगवती सती का शीश इसी क्षेत्र में गिरा था, इसलिए इसकी गणना देवी के प्रसिद्ध शक्तिपीठों में होती है। उत्तर भारत की नौ देवियों की प्रसिद्ध यात्रा मां शाकंभरी देवी के दर्शन बिना पूर्ण नहीं होती। शाकंभरी देवी मंदिर से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले ही बाबा भूरा देव का मंदिर है। माता शाकंभरी देवी के वरदान स्वरूप सर्वप्रथम यात्री बाबा भूरा देव की पूजा करते हैं।
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दोबार लगता है मेला
शाकंभरी देवी मंदिर के दर्शन के लिए वेस्ट यूपी के जिलों के अलावा हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के लोग बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। शारदीय और चैत्र नवरात्र परसाल में दो बार यहां मेले का आयोजन होता है। एक बार आयोजन जिला पंचायत कराती है जबकि दूसरी बार जसमौर राज परिवार कराता है।

माता का मुख्य प्रसाद
भक्तों द्वारा मां शाकंभरी को नारियल, चुनरी, हलवा- पूरी, खील, बताशे, ईलायचीदाना, मेवे - मिश्री व अन्य मिष्ठानो का भोग लगाया जाता है, लेकिन मां का प्रिय फल सराल है। सराल एक विशेष प्रकार का कंद मूल है जो केवल शिवालिक पहाड़ियों और उसके आसपास क्षेत्र में ही पाया जाता है। यह शकरकंद की तरह का होता है।
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