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डीपीआर तैयार, जल्द बनेगा जूता उद्योग का सीएफसी
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सिद्घार्थ यादव उपआयुक्त उद्योग
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। जनपद में जूता उद्योग के लिए शीघ्र ही 15 करोड़ रुपये की लागत से कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनेगा। इसके लिए सोमवार को सर्वे के बाद डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) भी तैयार हो चुकी है। जनपद के 10 हजार से अधिक जूता कारीगरों को इसका लाभ मिलेगा।
जिले में करीब 100 वर्ष से जूते बनाने का काम हो रहा है। अभी जिले में लगभग 500 जूता निर्माण इकाइयां हैं। जिनका वार्षिक कारोबार 120 से 130 करोड़ के आसपास है। जिले के करीब 10 हजार कारीगर जूता निर्माण उद्योग से प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से जुडे़ हुए हैं, लेकिन परंपरागत तरीके और हाथ से जूता बनाने के चलते यहां का जूता बाहर के ब्रांडों से कंपटीशन नहीं कर पाते। जिसके चलते स्थानीय जूता उद्योग उतनी तरक्की नहीं कर पा रहा है जितनी मेहनत यहां के कारीगर कर रहे हैं। जूता निर्माण के लिए उद्योग विभाग के सहयोग से कॉमन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना की जा रही है। जिसके लिए सर्वे से लेकर डीपीआर तक तैयार हो चुकी है।
सीएफसी में होंगी यह सुविधाएं
कॉमन फैसिलिटी सेंटर में नवीनतम तकनीक युक्त मशीनें लगेंगी। इसमें जूतों की डिजाइनिंग, सिलाई, लास्टिंग आदि की भी उन्नत व्यवस्था की जाएगी। उद्यमी कम दरों पर अपना काम सीएफसी में करा सकेंगे। इसके अलावा रॉ मैटीरियल बैंक भी स्थापित किया जाएगा। जिससे सस्ते दामों पर कच्चा माल उपलब्ध कराया जा सके।
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कई कॉलोनियों में बनते हैं जूते
महानगर की कई कॉलोनियों में जूते बनाने का काम होता है। इनमें जाटव नगर, आदर्श नगर, किशनपुरा, मैदा मिल फाटक, शारदा नगर, रामघाट, जेल चुंगी, शेखपुरा, गढ़ी मलूक आदि शामिल हैं।
तेजी से बन रहा वुड कार्विंग का सीएफसी
सहारनपुर। पिलखनी में ही वुड कार्विंग का सीएफसी भी बन रहा है। उसकी बुनियाद भरकर तैयार हो गई है तथा ऊपर का निर्माण भी शुरू हो चुका है। करीब 30 प्रतिशत निर्माण अभी तक हो गया है। इसका निर्माण भी वुड़ कार्विंग कारोबार से जुड़े उद्यमी और कारीगरों को उन्नत तकनीक सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
सीएफसी बनने से स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को काफी लाभ होगा। इससे उद्यमी सस्ती दरों पर तकनीकी मशीनों पर काम करा सकेंगे। इसके लिए सोमवार को सर्वे हो गया है। -- प्रवीण कर्दम, अध्यक्ष सुगत लेदर क्रिएशन कलस्टर।
सीएफसी का निर्माण जूताउद्योग के लिए संजीवनी का काम करेगा। इससे स्थानीय कारीगरों से लेकर उद्यमियों तक को नवीनतम तकनीक की जानकारी होगी। जिससे जूते की क्वालिटी को सुधारने में मदद मिलेगी। -- अंकित जाटव, उद्यमी।
कॉमन फैसिलिटी सेंटर के लिए करीब 15 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार हो गई है। इससे स्थानीय जूता उद्यमियों को काफी फायदा होगा। उद्यमियों को उच्च तकनीकी सुविधाएं कम रेट पर मुहैया हो सकेंगी। सीएफसी बनने के बाद स्थानीय जूता उद्योग तेजी से तरक्की करेगा। -- सिद्धार्थ यादव, उपायुक्त उद्योग।
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जिले में करीब 100 वर्ष से जूते बनाने का काम हो रहा है। अभी जिले में लगभग 500 जूता निर्माण इकाइयां हैं। जिनका वार्षिक कारोबार 120 से 130 करोड़ के आसपास है। जिले के करीब 10 हजार कारीगर जूता निर्माण उद्योग से प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से जुडे़ हुए हैं, लेकिन परंपरागत तरीके और हाथ से जूता बनाने के चलते यहां का जूता बाहर के ब्रांडों से कंपटीशन नहीं कर पाते। जिसके चलते स्थानीय जूता उद्योग उतनी तरक्की नहीं कर पा रहा है जितनी मेहनत यहां के कारीगर कर रहे हैं। जूता निर्माण के लिए उद्योग विभाग के सहयोग से कॉमन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना की जा रही है। जिसके लिए सर्वे से लेकर डीपीआर तक तैयार हो चुकी है।
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सीएफसी में होंगी यह सुविधाएं
कॉमन फैसिलिटी सेंटर में नवीनतम तकनीक युक्त मशीनें लगेंगी। इसमें जूतों की डिजाइनिंग, सिलाई, लास्टिंग आदि की भी उन्नत व्यवस्था की जाएगी। उद्यमी कम दरों पर अपना काम सीएफसी में करा सकेंगे। इसके अलावा रॉ मैटीरियल बैंक भी स्थापित किया जाएगा। जिससे सस्ते दामों पर कच्चा माल उपलब्ध कराया जा सके।
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कई कॉलोनियों में बनते हैं जूते
महानगर की कई कॉलोनियों में जूते बनाने का काम होता है। इनमें जाटव नगर, आदर्श नगर, किशनपुरा, मैदा मिल फाटक, शारदा नगर, रामघाट, जेल चुंगी, शेखपुरा, गढ़ी मलूक आदि शामिल हैं।
तेजी से बन रहा वुड कार्विंग का सीएफसी
सहारनपुर। पिलखनी में ही वुड कार्विंग का सीएफसी भी बन रहा है। उसकी बुनियाद भरकर तैयार हो गई है तथा ऊपर का निर्माण भी शुरू हो चुका है। करीब 30 प्रतिशत निर्माण अभी तक हो गया है। इसका निर्माण भी वुड़ कार्विंग कारोबार से जुड़े उद्यमी और कारीगरों को उन्नत तकनीक सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
सीएफसी बनने से स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को काफी लाभ होगा। इससे उद्यमी सस्ती दरों पर तकनीकी मशीनों पर काम करा सकेंगे। इसके लिए सोमवार को सर्वे हो गया है। -- प्रवीण कर्दम, अध्यक्ष सुगत लेदर क्रिएशन कलस्टर।
सीएफसी का निर्माण जूताउद्योग के लिए संजीवनी का काम करेगा। इससे स्थानीय कारीगरों से लेकर उद्यमियों तक को नवीनतम तकनीक की जानकारी होगी। जिससे जूते की क्वालिटी को सुधारने में मदद मिलेगी। -- अंकित जाटव, उद्यमी।
कॉमन फैसिलिटी सेंटर के लिए करीब 15 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार हो गई है। इससे स्थानीय जूता उद्यमियों को काफी फायदा होगा। उद्यमियों को उच्च तकनीकी सुविधाएं कम रेट पर मुहैया हो सकेंगी। सीएफसी बनने के बाद स्थानीय जूता उद्योग तेजी से तरक्की करेगा। -- सिद्धार्थ यादव, उपायुक्त उद्योग।

प्रवीन कर्दम- फोटो : SAHARANPUR

अंकित जाटव- फोटो : SAHARANPUR