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इलाज की जगह संक्रमण ना घर ले जाएं मरीज

Sun, 02 May 2021 12:01 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 02 May 2021 12:01 AM IST
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Do not take infection home instead of treatment
सहारनपुर। जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में इलाज कराने पहुंच रहे मरीजों की संख्या अधिक होने से सोशल डिस्टेंसिंग ध्वस्त हो रही है। वार्ड में एक बेड पर दो-दो मरीजों को रखा जा रहा है, जिससे कोरोना संक्रमण के फैलने का खतरा बना हुआ है। जबकि इमरजेंसी वार्ड से सटे रैन बसेरे में गद्दों और बेड शीट के साथ खाली पड़े बेड धूल फांक रहे हैं।
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इमरजेंसी वार्ड मात्र 10 बेड का है, मगर इन दिनों सौ से अधिक तक गंभीर मरीज इमरजेंसी वार्ड में पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर को सांस लेने में तकलीफ की शिकायत है। जिनमें से शायद कई को कोरोना संक्रमण भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में उक्त मरीजों को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ रखने की जरूरत है, मगर अस्पताल प्रशासन ने दस बेड के इमरजेंसी वार्ड में एक साथ 40 से 50 मरीजों को रखा हुआ है। ज्यादातर मरीजों को बरामदे में बेंचों पर लिटाया जा रहा है। एक-एक बेड पर दो-दो मरीज रखे जा रहे हैं। बरामदे में पैर रखने तक की जगह डॉक्टरों और स्टाफ को नहीं मिल रही है। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो रही है। सोशल डिस्टेंसिंग नहीं होने और एक बेड पर दो-दो मरीज रखने से कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ा हुआ है। वहीं दूसरी ओर इमरजेंसी वार्ड की बगल रैन बसेरे में बेड खाली पड़े धूल फांक रहे हैं। यदि विभाग चाहे तो रैन बसेेरे का इस्तेमाल अस्थाई वार्ड के रूप में किया जा सकता है, जहां इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर और स्टाफ आसानी से इलाज कर सकता है। रैन बसेरे में एक साथ 20 से 25 बेड डाले जा सकते है।
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रैन बसेरे को वार्ड के रूप में इस्तेमाल करने के लिए उच्चाधिकारियों से बात हुई है। उन्होंने स्पष्ट मना किया है, क्योंकि शासन के आदेश हैं कि रैन बसेरा जरूर होना चाहिए, जिसमें तीमारदार आदि ठहर सकें। चूंकि रैन बसेरे का इस्तेमाल तीमारदार नहीं करते हैं, ऐसे में हम उसमें से कुछ बेड जरूर ले सकते हैं।
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- डॉ. आभा वर्मा, सीएमएस, एसबीडी जिला अस्पताल।
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