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Saharanpur News: बारूद के ढेर पर जिला, पटाखों का यहीं पर भंडारण
Sat, 04 Nov 2023 12:47 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 04 Nov 2023 12:47 AM IST
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सरसावा क्षेत्र में पटाखे के गोदाम पर चेकिंग करते फायर अधिकारी
सहारनपुर। कुछ दिन बाद दीपावली का त्योहार है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पश्चिमी यूपी में सहारनपुर ऐसा जिला है जो मौजूदा समय में बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है। जिले में आतिशबाजी तैयार करने और भंडारण के 101 लाइसेंस हैं। जिसमें 400 किलोग्राम से लेकर दो लाख किलोग्राम तक का भंडारण हो सकता है। खास बात यह है कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इतने लाइसेंस किसी भी जिले में नहीं हैं। इसके अलावा तमिलनाडु के शिवकाशी से भी करीब 15 से 20 करोड़ का माल यहां पर हर साल आता है। जिसका भंडारण भी यहीं पर होता है। इसके बाद यूपी के साथ-साथ हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में सप्लाई किए जाते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में लाइसेंस की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसकी वजह है कि मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़ का एनसीआर में शामिल है। बढ़ते प्रदूषण की वजह से वहां पर आतिशबाजी बैन है। ऐसे में यहां पर लाइसेंस की संख्या बढ़ गई है। इसके अलावा अवैध पटाखा फैक्टरी के भी कई मामले सामने आ चुके हैं।
आतिशबाजी तैयार करने के जिले में 35 लाइसेंस
फिलहाल जिले में आतिशबाजी तैयार करने के 35 लाइसेंस है, जो एक समय में 15 किलोग्राम का मसाला तैयार कर आतिशबाजी तैयार कर सकते हैं। 15 किलोग्राम खत्म होने के बाद दोबारा से उतनी ही मात्रा में मसाला तैयार कर सकते हैं। अगर इससे अधिक मसाला तैयार करते हैं तो वह मानकों का उल्लंघन है।
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भंडारण के अलग-अलग क्षमता के 66 लाइसेंस
इसके अलावा आतिशबाजी भंडारण के 66 लाइसेंस है। भंडारण के लिए सभी की अलग-अलग क्षमता है। अधिकतर लाइसेंस 450 किलो और 600 किलोग्राम के हैं। यानी कि इतनी मात्रा में आतिशबाजी अपने गोदामों में भंडारण कर सकते हैं। जिले में दो लाइसेंस मैगजीन भंडारण के भी हैं। जिसमें दो लाख किलोग्राम तक आतिशबाजी का भंडारण कर सकते हैं। कुछ दिन बाद दीपावली का त्योहार है ऐसे में आतिशबाजी भंडारण पर पूरा फोकस किया जा रहा है।
सहारनपुर में बनते हैं सिर्फ फुलझड़ी और अनार
जिले में जिन लोगों को आतिशबाजी तैयार करने के लाइसेंस दिए गए हैं वह सिर्फ फुलझड़ी और अनार तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा रॉकेट, माला, ग्राउंड स्पिनर, बम और अन्य तमाम तरह के पटाखे तमिलनाडु के शिवकाशी से आते हैं।
जिनके पास लाइसेंस है वहां पर समय-समय पर चेकिंग की जा रही है कि नियमों का कोई उल्लंघन तो नहीं हो रहा। तमिलनाडु से भी यहां पर बड़ी तादाद में पटाखे सप्लाई होते हैं। मानकों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई भी की जा रही है।
- प्रताप सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी सहारनपुर
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पिछले कुछ वर्षों में लाइसेंस की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसकी वजह है कि मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर, बागपत और हापुड़ का एनसीआर में शामिल है। बढ़ते प्रदूषण की वजह से वहां पर आतिशबाजी बैन है। ऐसे में यहां पर लाइसेंस की संख्या बढ़ गई है। इसके अलावा अवैध पटाखा फैक्टरी के भी कई मामले सामने आ चुके हैं।
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आतिशबाजी तैयार करने के जिले में 35 लाइसेंस
फिलहाल जिले में आतिशबाजी तैयार करने के 35 लाइसेंस है, जो एक समय में 15 किलोग्राम का मसाला तैयार कर आतिशबाजी तैयार कर सकते हैं। 15 किलोग्राम खत्म होने के बाद दोबारा से उतनी ही मात्रा में मसाला तैयार कर सकते हैं। अगर इससे अधिक मसाला तैयार करते हैं तो वह मानकों का उल्लंघन है।
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भंडारण के अलग-अलग क्षमता के 66 लाइसेंस
इसके अलावा आतिशबाजी भंडारण के 66 लाइसेंस है। भंडारण के लिए सभी की अलग-अलग क्षमता है। अधिकतर लाइसेंस 450 किलो और 600 किलोग्राम के हैं। यानी कि इतनी मात्रा में आतिशबाजी अपने गोदामों में भंडारण कर सकते हैं। जिले में दो लाइसेंस मैगजीन भंडारण के भी हैं। जिसमें दो लाख किलोग्राम तक आतिशबाजी का भंडारण कर सकते हैं। कुछ दिन बाद दीपावली का त्योहार है ऐसे में आतिशबाजी भंडारण पर पूरा फोकस किया जा रहा है।
सहारनपुर में बनते हैं सिर्फ फुलझड़ी और अनार
जिले में जिन लोगों को आतिशबाजी तैयार करने के लाइसेंस दिए गए हैं वह सिर्फ फुलझड़ी और अनार तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा रॉकेट, माला, ग्राउंड स्पिनर, बम और अन्य तमाम तरह के पटाखे तमिलनाडु के शिवकाशी से आते हैं।
जिनके पास लाइसेंस है वहां पर समय-समय पर चेकिंग की जा रही है कि नियमों का कोई उल्लंघन तो नहीं हो रहा। तमिलनाडु से भी यहां पर बड़ी तादाद में पटाखे सप्लाई होते हैं। मानकों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई भी की जा रही है।
- प्रताप सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी सहारनपुर