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समस्याओं का हो समाधान तो हट जाएंगे सब व्यवधान
ब्यूरो/ अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 18 Sep 2015 12:09 AM IST
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देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले लघु, सूक्ष्म और मध्यम उपक्रम की परिचर्चा में उद्यमियों ने सरकारों की नीतियों को जमकर कोसा। पहले अपनी समस्याएं गिनाई और फिर समाधान पर भी विस्तार से चर्चा की। सरकारी योजनाओं में आ रही बाधा पर भी विचार-विमर्श हुआ। फिर उद्यमी बोले, दूसरे राज्य उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बहुत कोशिश कर रहे हैं लेकिन यूपी में माहौल नहीं बनाया जा रहा है। चर्चा-परिचर्चा के दौर में चेतावनी भी दी कि मूलभूत सुविधाएं नहीं मिली तो उद्योग दूसरे राज्यों में शिफ्ट हो जाएंगे।
सहारनपुर के उद्योगों से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा और उसके समाधान तलाशने को बृहस्पतिवार को दिल्ली रोड स्थित सभागार में अमर उजाला ने एक मंच मुहैया कराया। उद्यमियों ने बिजली, पानी, कच्चा माल सहित कई ज्वलंत समस्याओं को उठाया। 1945 से बने कानून, विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार, सरकारी असहयोग जैसे विषयों पर प्रदेश सरकार को कोसा।
वुडकार्विग उद्योग ने कलस्टर, मंडी, एक्सपोर्ट में प्रोत्साहन और टैक्स से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की। इस दौरान उद्यमियों ने कहा कि मेक इन यूपी का सपना साकार करने के लिए हम तैयार हैं, लेकिन बिना प्रोत्साहन और सहयोग के यह संभव नहीं होगा। इसके लिए उद्योगों को सुविधाओं के अलावा प्रशिक्षित कर्मचारी भी मुहैया होने चाहिए। कई राज्यों की सीमा से जुड़े सहारनपुर में कनेक्टिविटी का मुद्दा भी चर्चा में सामने आया।
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वुडकार्विंग उद्यमियों ने शहर में लकड़ी की मंडी बनाए जाने की भी मांग की। इसके बाद सबने अमर उजाला के इस प्रयास की जमकर सराहना की। इस दौरान आईआईए के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद मिगलानी, रामजी सुनेजा, कृष्ण राजीव सिंघल, वुडकार्विंग ऐसोसिएशन के अध्यक्ष शेख फैजान, इरफानुल हक, परविंदर सिंह, पवनीश जैन, मनोज जैन, एसआईए के अध्यक्ष शिवकुमार गौड़, रविंद्र मिगलानी आदि मौजूद रहे।
उद्योगों के विकास के तलाशे गए रास्ते
सरकारें उद्योगों के विकास की बातें तो करती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नहीं होता। मूलभूत सुविधाओं के लिए लंबे समय से मांग उठ रही हैं। मगर औद्योगिक इलाकों की हालत ऐसी है कि वहां उद्योग चलाना ही भारी पड़ रहा है।
- सतीश कुमार अरोड़ा, उद्यमी कानून भी बन रहे बाधा
उद्योगों पर लागू कानून 1945 में बनाए गए थे और अब तक उनमें बदलाव नहीं हुए। पुराने नियमों के चलते कई समस्याएं बनी हैं और इन पर कभी चर्चा नहीं होती। समय के साथ नियम और कानून में बदलाव आवश्यकत है।
- कृष्ण राजीव सिंघल, उद्यमी सरकार का सपोर्ट जरूरी
सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार चरम पर है। छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी दफ्तरों में पैसे देने पड़ते हैं। सहारनपुर के उद्यमियों ने वुडकार्विंग का एक्सपोर्ट तीन गुना कर दिया। सरकार का सपोर्ट नहीं मिलने से हालत बदतर होते जा रहे हैं।
- रामजी सुनेजा, उद्यमी
राज्य और केन्द्र स्तर पर कई समस्याएं हैं। बिना लेंड्यूज चेंज किए इंडस्ट्रियल प्लाट को फ्री होल्ड होना चाहिए। नए इंडस्ट्रीयल डेवलप होना जरुरी है। वेस्टर्न यूपी के उद्योगों के लिए विशेष पैकेज दिए जाएं और सरकारी दफ्तरों में काम ऑनलाइन होना चाहिए। इंटरप्रोन्योर्स के लिए प्रोग्राम चलाए जाएं और बिजली की कीमतों को दूसरे राज्यों के बराबर किया जाए।
- प्रमोद मिगलानी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, आईआईए
फुड इंडस्ट्री में समस्याओं का पहाड़ है। मगर, सबसे महत्वपूर्ण इंडस्ट्री सरकार की प्राथमिकताओं में ही नहीं है। कृषि क्षेत्र के बाद एमएसएमई का अर्थव्यवस्था में योगदान है, मगर इस पर किसी तरह के प्रोत्साहन के प्रयास नहीं होते।
- संजय बजाज, उद्यमी
वर्तमान में एमएमएमई में माहौल निराशावादी हो गया है। सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार है और इस पर रोकथाम सबसे ज्यादा जरूरी है। पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाया जाए तो सकरात्मक माहौल बनाया जा सकता है।
- अशोक गांधी, उद्यमी
सहारनपुर की पहचान वुडकार्विंग उद्योग से है, मगर अब धीरे-धीरे यह उद्योग अपनी पहचान खोता जा रहा है। वुडकार्विंग एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए सरकारों को नियमों में बदलाव के साथ प्रोत्साहन देना चाहिए।
- परविंदर सिंह, वुडकार्विंग निर्यातक
वुडकार्विंग में मजदूरों की कमी धीरे-धीरे बढ़ने लगी है और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण स्कील्ड लेबर का नहीं होना है। छोटे-छोटे प्रशिक्षण केन्द्र खोले जाए और वहां स्कील्ड लेबर तैयार हो ताकि काम की गुणवत्ता बढ़े।
- पवनीश जैन, वुडकार्विंग निर्यातक
लकड़ी के इतने बड़े कारोबार के बावजूद भी हमें लकड़ी खरीदने के लिए दूसरे जिले और प्रदेशों में जाना पड़ता है। यहां गोदाम बनाया जाए और लकड़ी की मंडी से अच्छी क्वालिटी का रॉ मैटेरियल यहीं मुहैया होना चाहिए।
- सोम कुमार गोयल, उद्यमी
सरकार और सरकारी अधिकारियों की मानसिकता उद्योग और व्यापार को लेकर बेहद ही खराब है। नकारात्मक सोच की वजह से कई बार काम रोके जाते हैं और समस्याएं उत्पन्न होती हैं। ऐसे में मानसिकता भी बदलनी होगी।
- मनोज जैन, उद्यमी
बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएं हमारे विकास में बाधक हैं, मगर सरकार नई सोच के साथ इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। शिक्षामित्र की तर्ज पर उद्योग मित्र बनाए जाएं और सारे विभागों से उनका समन्वय हो तो आधी समस्याएं हल हो जाएंगी।
- शिव कुमार गौड़, अध्यक्ष, सहारनपुर इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन
जिला उद्योग और मंडलीय उद्योग बंधु की बैठकों में निर्णय होते हैं, मगर उन पर अमल नहीं होता। बिजली की समस्या से निजात के बिना उद्योगों का विकास संभव नहीं है। मजदूर भी अब बड़ी समस्या बन रहे हैं और इसके लिए प्रशिक्षण बेहद जरूरी है।
- सुशील भारद्वाज, उद्यमी
वुडकार्विंग उद्योग ने अपने दम पर 700 करोड़ रुपए का निर्यात किया है। अगर, हमें सुविधाएं मिले तो इसे 1200 करोड़ रुपए तक ले जाया जा सकता है। सबसे पहले वुडकार्विंग कलस्टर बनाया जाए। वुड डिपो बनाया जाए और सुविधाओं के लिए लगातार काम किया जाए। सरकार इस उद्योग को बढ़ाने की बजाय अपने प्लांट को प्राइवेट पार्टी को देने में जुटी है हम इसका भी विरोध कर रहे हैं।
- शेख फैजान, अध्यक्ष, वुडकार्विंग एसोसिएशन
दिल्ली से कनेक्टिविटी नहीं होने की वजह से विदेशी बॉयर यहां आने से कतराते हैं। इसे बेहतर बनाया जाए और पीएफ खाता खुलवाने की लिमिट 20 से बढ़ाकर 50 वर्कर की हो। कंटेनर पर मिलने वाले रिटर्न कई सालों से लंबित है। इनकम टैक्स में भी सुविधा मिले।
- रविंद्र मिगलानी, निर्यातक
यूपी एक्सपोर्ट कारपोरेशन के सेंटर का निजीकरण इस बात को दर्शाता है कि सरकार के निर्णय उद्योगों के खिलाफ हैं। सरकार पहले हमसे टैक्स लेती है और फिर सुविधाओं के नाम पर हमें परेशानी उठानी पड़ती है। कलस्टर बनने से भी समस्याओं का हल हो जाएगा।
- इरफानुल हक, वुडकार्विंग निर्यातक
बिजली बड़ी समस्या है और उद्योगों को इसके समाधान पर काम करना चाहिए। सौर ऊर्जा के यंत्रों का उपयोग और अन्य विकल्प हमारे के लिए उपयोगी हो सकते हैं। सरकार को इन विकल्पों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
- गौरव चोपड़ा, युवा उद्यमी
दूसरे राज्यों से भी हो तुलना
कई राज्यों की सीमा पर बसे सहारनपुर के उद्यमियों ने दूसरे राज्यों में मिलने वाली सुविधाओं का भी जिक्र किया। उत्तराखंड में 24 घंटे बिजली, वन विंडो सिस्टम और सरकारी प्रोत्साहनों का जिक्र हुआ। सस्ती बिजली पर भी सरकार को कोसा। इसके अलावा उद्यमियों ने यह भी कहा कि अगर सरकार नहीं चेतेगी तो धीरे-धीरे दूसरे राज्यों के प्रोत्साहन के चलते उद्योग शिफ्ट हो जाएंगे।
इन मांगों पर जाए सरकार का ध्यान
- इंडस्ट्रीय इलाकों में बिजली, पानी और सड़क की सुविधा मिले
- औद्योगिक क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली मिले और एक्सट्रा कट बंद हो
- सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए बनाई जाए योजना
- सरकारी ऑफिस में ऑनलाइन काम हो और उसकी मॉनिटरिंग भी की जाए
- उद्योगों के प्रति सकरात्मक रवैया अपनाया जाए और मानसिकता भी बदले
- शिक्षामित्र की तर्ज पर विभागों से समन्वय के लिए बनाए जाए उद्योग मित्र
- इंडस्ट्रियल इलाके के प्लाट लीज होल्ड की जगह फ्री होल्ड किए जाए
- वेस्टर्न यूपी के उद्योगों को विशेष पैकेज मिले और सब्सिडी खाते में आए
- 1945 में बनाए गए नियमों में जरूरत के हिसाब से बदलाव भी किए जाएं
ये समस्याएं पड़ रही उद्योगों पर भारी
- बिजली कटौती के चलते हर दिन उद्योगों को बड़ा नुकसान
- सरकारी विभागों के भ्रष्टाचार से कई प्रोजेक्ट हैं लंबित
- उद्योगों में प्रशिक्षण नहीं होने से पारंगत मजदूरों की कमी
- अफसरों की बैठकों में हुए निर्णयों पर नहीं होता अमल
- पीएफ अकाउंट खोलने की बाध्यता से तकनीकी नुकसान
वुडकार्विंग के लिए यह सुविधाओं की जरूरत
- उद्योग को सुविधाएं मुहैया कराने के लिए बनाया जाए कलस्टर
- लकड़ी की उपलब्धता के लिए वुड डिपो का किया जाए निर्माण
- एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के सेंटर का किया जाए उपयोग
- कंटेनर पर मिलने वाले रिटर्न को समय से मुहैया कराया जाए
- सेल्स टैक्स और इनकम टैक्स में भी दी जाए सहूलियत
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सहारनपुर के उद्योगों से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा और उसके समाधान तलाशने को बृहस्पतिवार को दिल्ली रोड स्थित सभागार में अमर उजाला ने एक मंच मुहैया कराया। उद्यमियों ने बिजली, पानी, कच्चा माल सहित कई ज्वलंत समस्याओं को उठाया। 1945 से बने कानून, विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार, सरकारी असहयोग जैसे विषयों पर प्रदेश सरकार को कोसा।
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वुडकार्विग उद्योग ने कलस्टर, मंडी, एक्सपोर्ट में प्रोत्साहन और टैक्स से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की। इस दौरान उद्यमियों ने कहा कि मेक इन यूपी का सपना साकार करने के लिए हम तैयार हैं, लेकिन बिना प्रोत्साहन और सहयोग के यह संभव नहीं होगा। इसके लिए उद्योगों को सुविधाओं के अलावा प्रशिक्षित कर्मचारी भी मुहैया होने चाहिए। कई राज्यों की सीमा से जुड़े सहारनपुर में कनेक्टिविटी का मुद्दा भी चर्चा में सामने आया।
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वुडकार्विंग उद्यमियों ने शहर में लकड़ी की मंडी बनाए जाने की भी मांग की। इसके बाद सबने अमर उजाला के इस प्रयास की जमकर सराहना की। इस दौरान आईआईए के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद मिगलानी, रामजी सुनेजा, कृष्ण राजीव सिंघल, वुडकार्विंग ऐसोसिएशन के अध्यक्ष शेख फैजान, इरफानुल हक, परविंदर सिंह, पवनीश जैन, मनोज जैन, एसआईए के अध्यक्ष शिवकुमार गौड़, रविंद्र मिगलानी आदि मौजूद रहे।
उद्योगों के विकास के तलाशे गए रास्ते
सरकारें उद्योगों के विकास की बातें तो करती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नहीं होता। मूलभूत सुविधाओं के लिए लंबे समय से मांग उठ रही हैं। मगर औद्योगिक इलाकों की हालत ऐसी है कि वहां उद्योग चलाना ही भारी पड़ रहा है।
- सतीश कुमार अरोड़ा, उद्यमी कानून भी बन रहे बाधा
उद्योगों पर लागू कानून 1945 में बनाए गए थे और अब तक उनमें बदलाव नहीं हुए। पुराने नियमों के चलते कई समस्याएं बनी हैं और इन पर कभी चर्चा नहीं होती। समय के साथ नियम और कानून में बदलाव आवश्यकत है।
- कृष्ण राजीव सिंघल, उद्यमी सरकार का सपोर्ट जरूरी
सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार चरम पर है। छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी दफ्तरों में पैसे देने पड़ते हैं। सहारनपुर के उद्यमियों ने वुडकार्विंग का एक्सपोर्ट तीन गुना कर दिया। सरकार का सपोर्ट नहीं मिलने से हालत बदतर होते जा रहे हैं।
- रामजी सुनेजा, उद्यमी
राज्य और केन्द्र स्तर पर कई समस्याएं हैं। बिना लेंड्यूज चेंज किए इंडस्ट्रियल प्लाट को फ्री होल्ड होना चाहिए। नए इंडस्ट्रीयल डेवलप होना जरुरी है। वेस्टर्न यूपी के उद्योगों के लिए विशेष पैकेज दिए जाएं और सरकारी दफ्तरों में काम ऑनलाइन होना चाहिए। इंटरप्रोन्योर्स के लिए प्रोग्राम चलाए जाएं और बिजली की कीमतों को दूसरे राज्यों के बराबर किया जाए।
- प्रमोद मिगलानी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, आईआईए
फुड इंडस्ट्री में समस्याओं का पहाड़ है। मगर, सबसे महत्वपूर्ण इंडस्ट्री सरकार की प्राथमिकताओं में ही नहीं है। कृषि क्षेत्र के बाद एमएसएमई का अर्थव्यवस्था में योगदान है, मगर इस पर किसी तरह के प्रोत्साहन के प्रयास नहीं होते।
- संजय बजाज, उद्यमी
वर्तमान में एमएमएमई में माहौल निराशावादी हो गया है। सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार है और इस पर रोकथाम सबसे ज्यादा जरूरी है। पूरे प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाया जाए तो सकरात्मक माहौल बनाया जा सकता है।
- अशोक गांधी, उद्यमी
सहारनपुर की पहचान वुडकार्विंग उद्योग से है, मगर अब धीरे-धीरे यह उद्योग अपनी पहचान खोता जा रहा है। वुडकार्विंग एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए सरकारों को नियमों में बदलाव के साथ प्रोत्साहन देना चाहिए।
- परविंदर सिंह, वुडकार्विंग निर्यातक
वुडकार्विंग में मजदूरों की कमी धीरे-धीरे बढ़ने लगी है और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण स्कील्ड लेबर का नहीं होना है। छोटे-छोटे प्रशिक्षण केन्द्र खोले जाए और वहां स्कील्ड लेबर तैयार हो ताकि काम की गुणवत्ता बढ़े।
- पवनीश जैन, वुडकार्विंग निर्यातक
लकड़ी के इतने बड़े कारोबार के बावजूद भी हमें लकड़ी खरीदने के लिए दूसरे जिले और प्रदेशों में जाना पड़ता है। यहां गोदाम बनाया जाए और लकड़ी की मंडी से अच्छी क्वालिटी का रॉ मैटेरियल यहीं मुहैया होना चाहिए।
- सोम कुमार गोयल, उद्यमी
सरकार और सरकारी अधिकारियों की मानसिकता उद्योग और व्यापार को लेकर बेहद ही खराब है। नकारात्मक सोच की वजह से कई बार काम रोके जाते हैं और समस्याएं उत्पन्न होती हैं। ऐसे में मानसिकता भी बदलनी होगी।
- मनोज जैन, उद्यमी
बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएं हमारे विकास में बाधक हैं, मगर सरकार नई सोच के साथ इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। शिक्षामित्र की तर्ज पर उद्योग मित्र बनाए जाएं और सारे विभागों से उनका समन्वय हो तो आधी समस्याएं हल हो जाएंगी।
- शिव कुमार गौड़, अध्यक्ष, सहारनपुर इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन
जिला उद्योग और मंडलीय उद्योग बंधु की बैठकों में निर्णय होते हैं, मगर उन पर अमल नहीं होता। बिजली की समस्या से निजात के बिना उद्योगों का विकास संभव नहीं है। मजदूर भी अब बड़ी समस्या बन रहे हैं और इसके लिए प्रशिक्षण बेहद जरूरी है।
- सुशील भारद्वाज, उद्यमी
वुडकार्विंग उद्योग ने अपने दम पर 700 करोड़ रुपए का निर्यात किया है। अगर, हमें सुविधाएं मिले तो इसे 1200 करोड़ रुपए तक ले जाया जा सकता है। सबसे पहले वुडकार्विंग कलस्टर बनाया जाए। वुड डिपो बनाया जाए और सुविधाओं के लिए लगातार काम किया जाए। सरकार इस उद्योग को बढ़ाने की बजाय अपने प्लांट को प्राइवेट पार्टी को देने में जुटी है हम इसका भी विरोध कर रहे हैं।
- शेख फैजान, अध्यक्ष, वुडकार्विंग एसोसिएशन
दिल्ली से कनेक्टिविटी नहीं होने की वजह से विदेशी बॉयर यहां आने से कतराते हैं। इसे बेहतर बनाया जाए और पीएफ खाता खुलवाने की लिमिट 20 से बढ़ाकर 50 वर्कर की हो। कंटेनर पर मिलने वाले रिटर्न कई सालों से लंबित है। इनकम टैक्स में भी सुविधा मिले।
- रविंद्र मिगलानी, निर्यातक
यूपी एक्सपोर्ट कारपोरेशन के सेंटर का निजीकरण इस बात को दर्शाता है कि सरकार के निर्णय उद्योगों के खिलाफ हैं। सरकार पहले हमसे टैक्स लेती है और फिर सुविधाओं के नाम पर हमें परेशानी उठानी पड़ती है। कलस्टर बनने से भी समस्याओं का हल हो जाएगा।
- इरफानुल हक, वुडकार्विंग निर्यातक
बिजली बड़ी समस्या है और उद्योगों को इसके समाधान पर काम करना चाहिए। सौर ऊर्जा के यंत्रों का उपयोग और अन्य विकल्प हमारे के लिए उपयोगी हो सकते हैं। सरकार को इन विकल्पों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
- गौरव चोपड़ा, युवा उद्यमी
दूसरे राज्यों से भी हो तुलना
कई राज्यों की सीमा पर बसे सहारनपुर के उद्यमियों ने दूसरे राज्यों में मिलने वाली सुविधाओं का भी जिक्र किया। उत्तराखंड में 24 घंटे बिजली, वन विंडो सिस्टम और सरकारी प्रोत्साहनों का जिक्र हुआ। सस्ती बिजली पर भी सरकार को कोसा। इसके अलावा उद्यमियों ने यह भी कहा कि अगर सरकार नहीं चेतेगी तो धीरे-धीरे दूसरे राज्यों के प्रोत्साहन के चलते उद्योग शिफ्ट हो जाएंगे।
इन मांगों पर जाए सरकार का ध्यान
- इंडस्ट्रीय इलाकों में बिजली, पानी और सड़क की सुविधा मिले
- औद्योगिक क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली मिले और एक्सट्रा कट बंद हो
- सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए बनाई जाए योजना
- सरकारी ऑफिस में ऑनलाइन काम हो और उसकी मॉनिटरिंग भी की जाए
- उद्योगों के प्रति सकरात्मक रवैया अपनाया जाए और मानसिकता भी बदले
- शिक्षामित्र की तर्ज पर विभागों से समन्वय के लिए बनाए जाए उद्योग मित्र
- इंडस्ट्रियल इलाके के प्लाट लीज होल्ड की जगह फ्री होल्ड किए जाए
- वेस्टर्न यूपी के उद्योगों को विशेष पैकेज मिले और सब्सिडी खाते में आए
- 1945 में बनाए गए नियमों में जरूरत के हिसाब से बदलाव भी किए जाएं
ये समस्याएं पड़ रही उद्योगों पर भारी
- बिजली कटौती के चलते हर दिन उद्योगों को बड़ा नुकसान
- सरकारी विभागों के भ्रष्टाचार से कई प्रोजेक्ट हैं लंबित
- उद्योगों में प्रशिक्षण नहीं होने से पारंगत मजदूरों की कमी
- अफसरों की बैठकों में हुए निर्णयों पर नहीं होता अमल
- पीएफ अकाउंट खोलने की बाध्यता से तकनीकी नुकसान
वुडकार्विंग के लिए यह सुविधाओं की जरूरत
- उद्योग को सुविधाएं मुहैया कराने के लिए बनाया जाए कलस्टर
- लकड़ी की उपलब्धता के लिए वुड डिपो का किया जाए निर्माण
- एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के सेंटर का किया जाए उपयोग
- कंटेनर पर मिलने वाले रिटर्न को समय से मुहैया कराया जाए
- सेल्स टैक्स और इनकम टैक्स में भी दी जाए सहूलियत