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Saharanpur News: महादेव मंदिर की प्रॉपर्टी का विवाद बढ़ा, 11 लोगों पर केस दर्ज
Sat, 30 Aug 2025 01:47 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 30 Aug 2025 01:47 AM IST
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सहारनपुर। देहात कोतवाली क्षेत्र में महादेव मंदिर की प्रॉपर्टी का विवाद बढ़ता जा रहा है। युवक ने मंदिर की प्रॉपर्टी के फर्जी दस्तावेज तैयार कर कब्जाने का आरोप लगाया है। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने पांच नामजद सहित 11 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
थाना जनकपुरी क्षेत्र में गोविंद विहार निवासी पार्थ ग्रोवर ने देहात कोतवाली में तहरीर देकर बताया कि महादेव मंदिर का निर्माण उसके बड़ों ने कराया था। मंदिर की जमीन खसरा संख्या 734, खेवट संख्या 73 नुमाइश कैंप में आती हैं। पुराने अभिलेखों में यह जमीन मंदिर महादेव के नाम दर्ज है। आरोप है कि विक्रम सिंह और उसके परिजनों ने 13 दिसंबर 1995 को एक व्यक्ति को आशाराम का नाम बताकर खड़ा किया, जबकि असली आशाराम वर्ष 1954 में ही लापता हो गए थे। उनके नाम से फर्जी वसीयत तैयार की गई। आरोप है कि वसीयत में यह भी झूठा लिखा गया कि प्रॉपर्टी उन्हें उनके बुजुर्गों से मिली है।
यह मामला पूर्व में भी मामला उठा था। कोर्ट ने 28 मई 2011 को आदेश दिया था कि असली आशाराम 1954 में लापता हो गए थे और आरोपी पक्ष ने आशाराम फर्जी प्रस्तुत किया है। आरोप यह भी है कि स्थानीय लोगों को डराकर व कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराकर अपने पक्ष में गलत साक्ष्य तैयार किए गए। इस मामले की 12 अगस्त 2025 को एसएसपी से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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इसके बाद पीड़ित ने कोर्ट में न्याय की गुहार लगाई। कोर्ट ने सभी दस्तावेजों को देखते हुए केस दर्ज करने के आदेश पुलिस को दिए। अब पुलिस ने विक्रम सिंह, उदय सिंह, अभिषेक अरोड़ा, राजेश कुमार, संजीव ग्रोवर और छह अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की है।
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थाना जनकपुरी क्षेत्र में गोविंद विहार निवासी पार्थ ग्रोवर ने देहात कोतवाली में तहरीर देकर बताया कि महादेव मंदिर का निर्माण उसके बड़ों ने कराया था। मंदिर की जमीन खसरा संख्या 734, खेवट संख्या 73 नुमाइश कैंप में आती हैं। पुराने अभिलेखों में यह जमीन मंदिर महादेव के नाम दर्ज है। आरोप है कि विक्रम सिंह और उसके परिजनों ने 13 दिसंबर 1995 को एक व्यक्ति को आशाराम का नाम बताकर खड़ा किया, जबकि असली आशाराम वर्ष 1954 में ही लापता हो गए थे। उनके नाम से फर्जी वसीयत तैयार की गई। आरोप है कि वसीयत में यह भी झूठा लिखा गया कि प्रॉपर्टी उन्हें उनके बुजुर्गों से मिली है।
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यह मामला पूर्व में भी मामला उठा था। कोर्ट ने 28 मई 2011 को आदेश दिया था कि असली आशाराम 1954 में लापता हो गए थे और आरोपी पक्ष ने आशाराम फर्जी प्रस्तुत किया है। आरोप यह भी है कि स्थानीय लोगों को डराकर व कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराकर अपने पक्ष में गलत साक्ष्य तैयार किए गए। इस मामले की 12 अगस्त 2025 को एसएसपी से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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इसके बाद पीड़ित ने कोर्ट में न्याय की गुहार लगाई। कोर्ट ने सभी दस्तावेजों को देखते हुए केस दर्ज करने के आदेश पुलिस को दिए। अब पुलिस ने विक्रम सिंह, उदय सिंह, अभिषेक अरोड़ा, राजेश कुमार, संजीव ग्रोवर और छह अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की है।