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नहीं मिला बच्चे के घर का पता
Thu, 16 Apr 2020 06:55 PM IST
Anonymous User
सहारनपुर अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर अमर उजाला ब्यूरो
Published by: Anonymous User
Updated Thu, 16 Apr 2020 06:55 PM IST
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अपने माता पिता और परिवार से बिछड़ा एक आठ साल का बच्चा पते के चक्कर में इधर उधर भटकता रहा। पहले वह एक शख्स को मिला। इसके बाद चाइल्ड लाइन संस्था के पास पहुंचा। यहां से नगर कोतवाली। वहां से फिर चाइल्ड लाइन और अब आखिर में उसे राजकीय बाल गृह रामपुर में भेज दिया गया है।
लापता बच्चों को अभिभावकों तक पहुंचाने के लिए काम कर रही संस्था चाइल्ड लाइन के डायरेक्टर मंसूर हुसैन ने बताया कि एक व्यक्ति को यह बच्चा तीन दिसंबर को किसी जगह पर गुमशुदा हालत में मिला था। वह उसकी मदद के लिए चाइल्ड लाइन के पास ले आया।
यहां बच्चे की काफी काउंसलिंग की गई। इसमें बच्चा इतना ही बता पाया कि उसका नाम वंश है। माता का नाम पूनम है। वह घर पर रहती है। बच्चे ने पिता का नाम बताया अरविंद। यह भी बताया कि वह केबिल नेटवर्क का काम करता है। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद बच्चा यह नहीं बता पाया कि उसका सही पता क्या है। कभी कभी चांदपुर जैसी किसी जगह का नाम उसने जरूर लिया।
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इस हालत को देखते हुए बच्चे को नगर कोतवाली पुलिस को सौंपा गया। मगर पुलिस भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। बाद में बच्चे को फिर चाइल्ड लाइन को ही सौंप दिया गया। हुसैन ने बताया कि अब संस्था ने बच्चे की सुरक्षा की दृष्टि से उसे राजकीय बाल गृह रामपुर भिजवाया है। हुसैन के मुताबिक यह बच्चा कुछ हद तक मानसिक रूप से रोगी नजर आता है। शायद इसी वजह से यह पता नहीं बता पाया।
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लापता बच्चों को अभिभावकों तक पहुंचाने के लिए काम कर रही संस्था चाइल्ड लाइन के डायरेक्टर मंसूर हुसैन ने बताया कि एक व्यक्ति को यह बच्चा तीन दिसंबर को किसी जगह पर गुमशुदा हालत में मिला था। वह उसकी मदद के लिए चाइल्ड लाइन के पास ले आया।
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यहां बच्चे की काफी काउंसलिंग की गई। इसमें बच्चा इतना ही बता पाया कि उसका नाम वंश है। माता का नाम पूनम है। वह घर पर रहती है। बच्चे ने पिता का नाम बताया अरविंद। यह भी बताया कि वह केबिल नेटवर्क का काम करता है। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद बच्चा यह नहीं बता पाया कि उसका सही पता क्या है। कभी कभी चांदपुर जैसी किसी जगह का नाम उसने जरूर लिया।
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इस हालत को देखते हुए बच्चे को नगर कोतवाली पुलिस को सौंपा गया। मगर पुलिस भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। बाद में बच्चे को फिर चाइल्ड लाइन को ही सौंप दिया गया। हुसैन ने बताया कि अब संस्था ने बच्चे की सुरक्षा की दृष्टि से उसे राजकीय बाल गृह रामपुर भिजवाया है। हुसैन के मुताबिक यह बच्चा कुछ हद तक मानसिक रूप से रोगी नजर आता है। शायद इसी वजह से यह पता नहीं बता पाया।