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Saharanpur News: जीवों के लिए जानलेवा बनी ढमोला

Sat, 02 Dec 2023 12:54 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Sat, 02 Dec 2023 12:54 AM IST
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Dhamola became deadly for living beings
सहारनपुर के ढमोला नदी में बहता गंदा पानी
सहारनपुर। महानगर के बीच से निकल रही ढमोला नदी का पानी विषैला हो चुका है। अक्तूबर माह में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से छह अलग-अलग स्थानों पर पानी के सैंपल लिए गए थे। इसकी रिपोर्ट चौंकाने वाली है। बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) तीन मिलीग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए, जो 40 तक पहुंच गई है। इसके अलावा सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) 10 मिलीग्राम प्रतिलीटर की बजाय 136 पर पहुंच गई है। इसी तरह एफसी (फिकल कोलिफोरम) बैक्टीरिया का मानक 500 एमपीएन होना चाहिए, लेकिन वह भी 270000 तक पहुंचा हुआ है। पानी में ऑक्सीजन की मात्रा घट गई तो वहीं बैक्टीरिया काफी बढ़ गए हैं। हालात यह है कि अब ढमोला का पानी न जलीय जीवों के लिए सुरक्षित है और न ही इंसान के लिए।
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इन स्थानों से लिए गए थे सैंपल
नदी बीओडी सीओडी एफसी
ढमोला ड्रेन 40 136 270000
स्टार पेपर मिल 32 148 2700
बजाज शुगर मिल ड्रेन 30 92 2100
नागदेई ड्रेन 30 128 3900
बदई खुर्द ड्रेन 56 152 510000
ढस्का ड्रेन 42 220 270000
नोट : यह आंकड़े उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से उपलब्ध कराएं गए हैं, जो 23 और 27 अक्टूबर को लिए गए सैंपलों की रिपोर्ट पर आधारित है।

यह है मानक
पर्यावरणविद् डॉ. उमर सैफ का कहना है कि नदी के अंदर बीओडी का मानक तीन मिलीग्राम प्रतिलीटर होना चाहिए। बीओडी की मात्रा जितनी अधिक होगी पानी में ऑक्सीजन उतनी ही कम होगी, जिसका सीधा असर जलीय जीवों पर पड़ता है और वह जीवित नहीं रह सकते। इसी तरह एफसी बैक्टीरिया का मानक 500 एमपीएन है। अगर इससे ज्यादा है तो वह खतरनाक श्रेणी में आते हैं। सीओडी का मानक 10 मिलीग्राम प्रतिलीटर होना चाहिए। ढमोला का पानी इतना दूषित हो चुका है कि जिससे व्यक्ति भी चर्म रोग और सांस की बीमारी का शिकार हो सकता है।
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संसारपुर गांव तक नदी का पानी है साफ
पर्यावरणविद् डॉ. सैफ के अनुसार, ढमोला नदी का जल स्त्रोत कोठरी बहलोलपुर गांव से है, जो शिवालिक की पहाड़ियों से निकलता है। इसके बाद संसारपुर होते हुए सहारनपुर में प्रवेश करती है। यह नदी करीब 59 किलोमीटर लंबी है। कोठरी बहलोलपुर से संसारपुर तक नदी का पानी बिल्कुल स्वच्छ है। इससे आगे नदी में नाले छोड़ दिए गए तो कहीं सीवर डाल दिए गए। आगे जाकर यह नदी हिंडन में मिल जाती है, जो गंगा तक पहुंचती है। अगर गंगा को स्वच्छ करना है तो ढमोला को साफ करना पड़ेगा।
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वर्जन
फिलहाल 38 एमएलडी का एसटीपी है, जबकि शहर के 100 एमएलडी से अधिक दूषित पानी निकलता है। 90 एमएलडी का एसटीपी प्रस्तावित है, जिसके बनने के बाद ढमोला नदी को साफ किया जा सकता है।
- महेंद्र सिंह, अवर अभियंता उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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