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चौपट हौजरी कारोबार हजारों हुए बेरोजगार
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 29 Dec 2016 12:31 AM IST
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खाली बैठे दुकानदार।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में नोटबंदी के कारण सहारनपुर का प्रसिद्ध हौजरी कारोबार बंद होने की कगार पर है। ऑर्डर न मिलने की वजह से उत्पादन बंद है, जिसकी वजह से 20 हजार से अधिक मजदूरों के हाथ से काम छिन गया है।
बेरोजगार हुए यह लोग अब परिवार का पेट पालने के लिए ठेला लगाने और रिक्शा तक चलाने को मजबूर हैं। नोटबंदी के 50 दिन में होजरी कारोबारियों को 50 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
हौजरी के क्षेत्र में सहारनपुर अपनी पहचान रखता है। यह कारोबार यहां शहर से लेकर देहात क्षेत्र तक फैला है। वर्तमान में जनपद में होजरी के सामान के करीब 400 उत्पादक और निर्यातक हैं।
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यहां बनने वाला अंडर गारमेंट का सामान 90 फीसदी दिल्ली सप्लाई होता है। वहां से देश के अनेक हिस्सों में भेजा जाता है। इस कारोबार से जनपद में करीब 30 हजार लोग जुड़े हैं।
इनमें उत्पादक, निर्यातक और कारीगर शामिल हैं। नोटबंदी के बाद से ऑर्डर मिलना बंद है, जिसकी वजह से उत्पादकों ने उत्पादन बंद किया हुआ है।ऐसे में काम करने वाले मजदूर हाथ पर हाथ धरकर बैठे हैं।
बेरोजगार हुए लोगों की संख्या 20 हजार के आसपास मानी जा रही है। इनमें से ज्यादातर लोग परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए सब्जी और फलों का ठेला लगाने के साथ ही रिक्शा तक चला रहे हैं।
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बेरोजगार हुए यह लोग अब परिवार का पेट पालने के लिए ठेला लगाने और रिक्शा तक चलाने को मजबूर हैं। नोटबंदी के 50 दिन में होजरी कारोबारियों को 50 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
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हौजरी के क्षेत्र में सहारनपुर अपनी पहचान रखता है। यह कारोबार यहां शहर से लेकर देहात क्षेत्र तक फैला है। वर्तमान में जनपद में होजरी के सामान के करीब 400 उत्पादक और निर्यातक हैं।
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यहां बनने वाला अंडर गारमेंट का सामान 90 फीसदी दिल्ली सप्लाई होता है। वहां से देश के अनेक हिस्सों में भेजा जाता है। इस कारोबार से जनपद में करीब 30 हजार लोग जुड़े हैं।
इनमें उत्पादक, निर्यातक और कारीगर शामिल हैं। नोटबंदी के बाद से ऑर्डर मिलना बंद है, जिसकी वजह से उत्पादकों ने उत्पादन बंद किया हुआ है।ऐसे में काम करने वाले मजदूर हाथ पर हाथ धरकर बैठे हैं।
बेरोजगार हुए लोगों की संख्या 20 हजार के आसपास मानी जा रही है। इनमें से ज्यादातर लोग परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए सब्जी और फलों का ठेला लगाने के साथ ही रिक्शा तक चला रहे हैं।