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Deoband: मौलाना अरशद मदनी बोले- धार्मिक स्थलों पर निचली अदालतों के फैसलों से पैदा हो रहा भय का माहौल
Sun, 01 Dec 2024 05:49 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Sun, 01 Dec 2024 05:49 PM IST
सार
मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि संभल की घटना मामूली घटना नहीं है। यह अत्याचार है जो देश के संविधान, न्याय और धर्म निरपेक्षता को आग लगाते हुए कानून की धज्जियां उड़ा रहा है।
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मौलाना अरशद मदनी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि हमारे धार्मिक स्थलों को लेकर निचली अदालतें ऐसे फैसले दे रही हैं, जिससे देश में बिखराव और भय का माहौल पैदा हो रहा है। यह बहुत ही निराशाजनक है।
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मौलाना अरशद मदनी ने रविवार को जारी बयान में कहा कि इस प्रकार के फैसलों की आड़ में सांप्रदायिक तत्व ही नहीं, कानून के रक्षक भी मुसलमानों के साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार कर रहे हैं। यहां तक कि उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संभल की घटना कोई मामूली घटना नहीं है, बल्कि यह ऐसा अत्याचार है जो देश के संविधान, न्याय और धर्म निरपेक्षता को आग लगाते हुए कानून की धज्जियां उड़ा रहा है।
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मौलाना मदनी ने कहा कि निचली अदालतों के फैसलों से सांप्रदायिक तत्वों के हौसले इतने बढ़ गए हैं कि अब उन्होंने अजमेर में स्थित सैकड़ों वर्ष पुरानी ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह पर भी हिंदू मंदिर होने का दावा कर दिया है। आश्चर्यजनक बात तो यह है कि स्थानीय अदालत ने इस याचिका को सुनवाई के योग्य करार दिया है। ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट ही न्याय और धर्मनिरपेक्ष संविधान के अस्तित्व का अंतिम सहारा है।