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यूपी सरकार कराएगी दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे का निर्माण
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sat, 25 Feb 2017 11:57 PM IST
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Highway
- फोटो : file photo
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सहारनपुर में दिल्ली-सहारनपुर-यमुनोत्री हाईवे (एसएच-57) के निर्माण में निर्माण कंपनी द्वारा किए गए 455 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का हाईवे के निर्माण पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
राज्य सरकार करीब तीन महीने पहले ही निर्माण खुद कराने का फैसला ले चुकी है, जिसका विज्ञापन भी निकाला जा चुका है। फिलहाल उपसा (उत्तर प्रदेश स्टेट हाईवे अथॉरिटी) ने अनुमोदन के लिए फाइल सरकार को भेजी हुई है।
उपसा अधिकारियों को उम्मीद है कि 11 मार्च के बाद प्रदेश में जो भी सरकार होगी, वही इसको हरी झंडी देगी। प्रदेश की तत्कालीन बसपा सरकार ने दिल्ली-सहारनपुर-यमुनोत्री हाईवे के निर्माण को हरी झंडी दी थी।
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एक निर्माण कंपनी को हाईवे के निर्माण का ठेका भी दे दिया गया था। कंपनी ने हाईवे को फोरलेन बनाने के लिए काम शुरू कर दिया था। हाईवे के दोनों ओर खड़े पेड़ों को काटने के लिए कंपनी को एनओसी नहीं मिली थी। इसकी वजह से काम अधर में लटक गया।
कंपनी ने मार्ग के बीच में पड़ने वाली ज्यादातर पुलिया का निर्माण करा दिया था। इसके बाद काम आगे नहीं बढ़ सका। ऐसे में हाईवे से जुड़े शहरों, कस्बों और गांवों के लोग करीब छह साल से इसके निर्माण का इंतजार कर रहे हैं।
निर्माण का ठेका लेने वाली कंपनी द्वारा कथित घोटाले की खबर ने सबको चौंका दिया। अब इस हाईवे का निर्माण प्रदेश सरकार कराएगी। प्रदेश सरकार ने तीन महीने पहले ही इसके निर्माण के लिए विज्ञापन प्रकाशित कराया है, जिसमें टेंडर की प्रक्रिया चल रही है।
उपशा की ओर से टेंडर की तिथि बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही अनुमोदन के लिए सरकार को फाइल भेजी हुई है। मगर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए लगी आचार संहिता के कारण फाइल अटकी हुई है।
उपसा के अधिकारियों को उम्मीद है कि 11 मार्च के बाद जो भी सरकार आएगी, वह इसे हरी झंडी देगी, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
हाईवे का निर्माण कंपनी को अपने धन से कराना था।
इसके बाद उसे टोल वसूल कर अपना धन पूरा करना था। निर्माण नए पैटर्न के तहत हाईवे पर होने वाले काम का भुगतान सरकार को करना होगा। हाईवे के निर्माण पर सरकार को अपना धन लगाना होगा। निर्माण के बाद सरकार निजी कंपनियों की तरह टोल टैक्स वसूलकर अपने धन की भरपाई करेगी।
हाईवे निर्माण के लिए एक अनुबंध हुआ था, जिसमें कहा गया था कि कांट्रेक्टर हाईवे निर्माण में धन लगाएगा और टोल वसूलेगा। उसने बैंकों से लोन लिया। उसके बाद कुछ काम भी कराया।
साथ ही मशीनरी आदि भी खरीदी। उपसा अधिकारियों के अनुसार हाईवे पर करीब 14 फीसदी ही काम हुआ। इसमें सरकार ने कहीं भी कोई भुगतान नहीं किया। कांट्रेक्टर आर्बिटेशन में सरकार के खिलाफ चला गया है। ऐसे में उपसा को निर्माण कंपनी के अधिकारियों के विरुद्घ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
एसएच-57 के निर्माण में निर्माण कंपनी की जो भी गड़बड़ी सामने आई है। उसका हाईवे के निर्माण पर कोई असर नहीं पड़ेगा। नए पैटर्न के तहत हाईवे पर काम का भुगतान सरकार को करना है।
सरकार करीब तीन महीने पहले ही हाईवे के निर्माण के लिए विज्ञापन जारी कर चुकी है। हमने टेंडर की तिथि बढ़ाने के लिए सरकार को फाइल भेजी गई है। जैसे ही सरकार से अनुमोदन मिलेगा तो टेंडर को मैच्योर कर लिया जाएगा। इसके बाद हाईवे के निर्माण का काम शुरू कराया जाएगा। - एमपी सिंह, एई, उपसा।
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राज्य सरकार करीब तीन महीने पहले ही निर्माण खुद कराने का फैसला ले चुकी है, जिसका विज्ञापन भी निकाला जा चुका है। फिलहाल उपसा (उत्तर प्रदेश स्टेट हाईवे अथॉरिटी) ने अनुमोदन के लिए फाइल सरकार को भेजी हुई है।
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उपसा अधिकारियों को उम्मीद है कि 11 मार्च के बाद प्रदेश में जो भी सरकार होगी, वही इसको हरी झंडी देगी। प्रदेश की तत्कालीन बसपा सरकार ने दिल्ली-सहारनपुर-यमुनोत्री हाईवे के निर्माण को हरी झंडी दी थी।
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एक निर्माण कंपनी को हाईवे के निर्माण का ठेका भी दे दिया गया था। कंपनी ने हाईवे को फोरलेन बनाने के लिए काम शुरू कर दिया था। हाईवे के दोनों ओर खड़े पेड़ों को काटने के लिए कंपनी को एनओसी नहीं मिली थी। इसकी वजह से काम अधर में लटक गया।
कंपनी ने मार्ग के बीच में पड़ने वाली ज्यादातर पुलिया का निर्माण करा दिया था। इसके बाद काम आगे नहीं बढ़ सका। ऐसे में हाईवे से जुड़े शहरों, कस्बों और गांवों के लोग करीब छह साल से इसके निर्माण का इंतजार कर रहे हैं।
निर्माण का ठेका लेने वाली कंपनी द्वारा कथित घोटाले की खबर ने सबको चौंका दिया। अब इस हाईवे का निर्माण प्रदेश सरकार कराएगी। प्रदेश सरकार ने तीन महीने पहले ही इसके निर्माण के लिए विज्ञापन प्रकाशित कराया है, जिसमें टेंडर की प्रक्रिया चल रही है।
उपशा की ओर से टेंडर की तिथि बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही अनुमोदन के लिए सरकार को फाइल भेजी हुई है। मगर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए लगी आचार संहिता के कारण फाइल अटकी हुई है।
उपसा के अधिकारियों को उम्मीद है कि 11 मार्च के बाद जो भी सरकार आएगी, वह इसे हरी झंडी देगी, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
हाईवे का निर्माण कंपनी को अपने धन से कराना था।
इसके बाद उसे टोल वसूल कर अपना धन पूरा करना था। निर्माण नए पैटर्न के तहत हाईवे पर होने वाले काम का भुगतान सरकार को करना होगा। हाईवे के निर्माण पर सरकार को अपना धन लगाना होगा। निर्माण के बाद सरकार निजी कंपनियों की तरह टोल टैक्स वसूलकर अपने धन की भरपाई करेगी।
हाईवे निर्माण के लिए एक अनुबंध हुआ था, जिसमें कहा गया था कि कांट्रेक्टर हाईवे निर्माण में धन लगाएगा और टोल वसूलेगा। उसने बैंकों से लोन लिया। उसके बाद कुछ काम भी कराया।
साथ ही मशीनरी आदि भी खरीदी। उपसा अधिकारियों के अनुसार हाईवे पर करीब 14 फीसदी ही काम हुआ। इसमें सरकार ने कहीं भी कोई भुगतान नहीं किया। कांट्रेक्टर आर्बिटेशन में सरकार के खिलाफ चला गया है। ऐसे में उपसा को निर्माण कंपनी के अधिकारियों के विरुद्घ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
एसएच-57 के निर्माण में निर्माण कंपनी की जो भी गड़बड़ी सामने आई है। उसका हाईवे के निर्माण पर कोई असर नहीं पड़ेगा। नए पैटर्न के तहत हाईवे पर काम का भुगतान सरकार को करना है।
सरकार करीब तीन महीने पहले ही हाईवे के निर्माण के लिए विज्ञापन जारी कर चुकी है। हमने टेंडर की तिथि बढ़ाने के लिए सरकार को फाइल भेजी गई है। जैसे ही सरकार से अनुमोदन मिलेगा तो टेंडर को मैच्योर कर लिया जाएगा। इसके बाद हाईवे के निर्माण का काम शुरू कराया जाएगा। - एमपी सिंह, एई, उपसा।