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Saharanpur News: ड्रग लाइसेंस जारी करने में सुस्ती, पोर्टल पर अटके आवेदन
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सहारनपुर। जिले में नए ड्रग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। लाइसेंस के लिए किए गए आवेदन पोर्टल पर लंबित पड़े हैं, जबकि शासन स्तर से निर्धारित व्यवस्था के तहत आवेदन का निस्तारण अधिकतम 15 दिन में किया जाना चाहिए। इसके बावजूद पिछले करीब दो महीने में बहुत कम लाइसेंस जारी हो सके हैं। इससे मेडिकल स्टोर और दवा कारोबार शुरू करने की तैयारी कर रहे आवेदकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में करीब पांच हजार मेडिकल स्टोर हैं। पूर्व औषधि निरीक्षक पर आगरा में रहते हुए एक मामले में कार्रवाई के बाद से संभल के औषधि निरीक्षक पर जिले का अतिरिक्त प्रभार है। अतिरिक्त प्रभार होने के कारण अधिकारी सप्ताह में तीन दिन ही सहारनपुर में उपलब्ध रहते हैं। कई बार आ भी नहीं पाते। ऐसे में लाइसेंस के आवेदनों की जांच, स्थलीय निरीक्षण और पोर्टल पर अंतिम कार्रवाई की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। आवेदनकर्ता परेशान होकर कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। हाल यह है कि दो महीने में नाममात्र ही ड्रग लाइसेंस बन पाए हैं। जिन्होंने ड्रग लाइसेंस नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है वह भी परेशान हैं।
-- होलसेल लाइसेंस सत्यापन की जांच भी धीमी
सिर्फ नए लाइसेंस ही नहीं, बल्कि होलसेल ड्रग लाइसेंस के सत्यापन की जांच भी प्रभावित है। अब तक केवल करीब 215 होलसेल ड्रग लाइसेंसों का ही सत्यापन किया जा सका है। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नए होलसेल ड्रग लाइसेंस जारी किए जा सकेंगे। ऐसे में विभागीय अधिकारियों के सामने समय पर होलसेल लाइसेंस सत्यापन की जांच चुनौती बनी हुई है।
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-- वर्जन
जिले में स्थायी औषधि निरीक्षक की तैनाती नहीं हुई है। संभल जिले के औषधि निरीक्षक को ही अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इसी वजह से पोर्टल पर आवेदन अटके हुए हैं।
- नरेश मोहन दीपक, सहायक आयुक्त औषधि
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जिले में करीब पांच हजार मेडिकल स्टोर हैं। पूर्व औषधि निरीक्षक पर आगरा में रहते हुए एक मामले में कार्रवाई के बाद से संभल के औषधि निरीक्षक पर जिले का अतिरिक्त प्रभार है। अतिरिक्त प्रभार होने के कारण अधिकारी सप्ताह में तीन दिन ही सहारनपुर में उपलब्ध रहते हैं। कई बार आ भी नहीं पाते। ऐसे में लाइसेंस के आवेदनों की जांच, स्थलीय निरीक्षण और पोर्टल पर अंतिम कार्रवाई की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। आवेदनकर्ता परेशान होकर कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। हाल यह है कि दो महीने में नाममात्र ही ड्रग लाइसेंस बन पाए हैं। जिन्होंने ड्रग लाइसेंस नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है वह भी परेशान हैं।
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सिर्फ नए लाइसेंस ही नहीं, बल्कि होलसेल ड्रग लाइसेंस के सत्यापन की जांच भी प्रभावित है। अब तक केवल करीब 215 होलसेल ड्रग लाइसेंसों का ही सत्यापन किया जा सका है। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नए होलसेल ड्रग लाइसेंस जारी किए जा सकेंगे। ऐसे में विभागीय अधिकारियों के सामने समय पर होलसेल लाइसेंस सत्यापन की जांच चुनौती बनी हुई है।
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जिले में स्थायी औषधि निरीक्षक की तैनाती नहीं हुई है। संभल जिले के औषधि निरीक्षक को ही अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इसी वजह से पोर्टल पर आवेदन अटके हुए हैं।
- नरेश मोहन दीपक, सहायक आयुक्त औषधि