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फतवे पर विवाद: एनसीपीसीआर की कार्रवाई पर दारुल उलूम ने रखा पक्ष, संस्था के मोहतमिम बोले...

Mon, 17 Jan 2022 07:21 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर
अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Mon, 17 Jan 2022 07:21 PM IST
सार

देवबंद से जारी फतवे का मामला राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग पहुंचा। वहीं देवबंद ने एनसीपीसीआर की कार्रवाई पर अपना पक्ष रखा है। जानिए आखिर मामला क्या है।

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Darul Uloom Saharanpur: Darul Uloom has given his favor on the action of NCPCR
दारुल उलूम देवबंद - फोटो : डेमो

विस्तार

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) द्वारा दारुल उलूम की वेबसाइट की जांच कर दस दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के निर्देश के बाद दारुल उलूम ने अपना पक्ष रखा है। संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि फतवा शरीयत के मानने वालों और उस पर अमल करने वालों के लिए होता है। यह उस को ही दिया जाता है जो शरीयत की रोशनी में फतवा लेता है।   

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दारुल उलूम से लिए जाने वाले कई फतवों को एक शख्स ने विवादास्पद और भ्रामक बताते हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। इसमें उक्त व्यक्ति ने संस्था के वेबसाइट से कुछ फतवे उठाकर उसकी सूची भी एनसीपीसीआर को सौंपी है। जिसमें कहा गया है कि यह फतवे भारतीय कानून के प्रावधानों के खिलाफ हैं। जिसके चलते आयोग ने यूपी सरकार के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर वेबसाइट की जांच कर दस दिन के भीतर इसकी रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। 
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वहीं मामले पर पक्ष रखते हुए संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि उन्हें पोर्टल की जांच संबंधी जानकारी मीडिया से ही प्राप्त हो रही है। अभी उनके पास कोई नोटिस या पत्र नहीं पहुंचा है। जब उनसे इस संबंध में जानकारी मांगी जाएगी वह कानून की रोशनी में उसका जवाब देंगे। मौलाना नोमानी ने बताया कि संस्था खुद से फतवे जारी नहीं करती। मुस्लिम समाज का कोई भी व्यक्ति शरीयत की रोशनी में कोई फतवा लेता है तो उसी को फतवा दिया जाता है। फतवा केवल शरीयत के मानने वालों और उस पर अमल करने वालों के लिए ही होता है। इसे जबरन किसी पर नहीं थोपा जाता है। किसी सवाल के जवाब को शरीयत की रोशनी में दिए जाने को फतवा कहते हैं। 
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यह था मामला
शिकायत दर्ज कराने वाले शख्स ने आयोग को बताया कि दारुल उलूम अपने फतवों में यह कहता है कि बच्चा गोद तो लिया जा सकता है, लेकिन परिपक्व होने के बाद उसका संपत्ति में हिस्सा नहीं होगा, साथ ही किसी भी मामले में वह वारिस नहीं होगा। इस तरह के उक्त शख्स ने बच्चों से संबंधित कई अन्य फतवों का जिक्र कर उनकी सूची आयोग को दी है। 

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प्रतिवर्ष जारी होते हैं डेढ़ हजार से अधिक फतवे 
दारुल उलूम में स्थापित दारुल इफ्ता में निकाह, हलाल, हराम, तलाक, विरासत आदि से संबंधित सवाल पूछे जाते हैं। विभाग से जुड़े मुफ्ती शरीयत की रोशनी में इनका जवाब देते हैं। प्रतिवर्ष करीब डेढ़ हजार से अधिक फतवे संस्था से जारी होते हैं। दुनियाभर के मुस्लिम अपनी समस्याओं का हल शरीयत की रोशनी में निकल सकें। इसलिए इन्हें पोर्टल पर भी अपलोड किया जाता है।

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