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एसडीआे और क्लर्क सस्पेंड
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sat, 23 Jul 2016 12:57 AM IST
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crime
- फोटो : demo pic
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सहारनपुर में एकमुश्त समाधान योजना एवं बिलों में गड़बड़ी को ठीक करने के नाम उपभोक्ताओं से लेकर जमा न कराए जाने के लगभग 55 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है।
विद्युत निगम ने मामले में विद्युत खंड अधिकारी एवं लिपिक को सस्पेंड कर दिया है। मामला इसी वर्ष के फरवरी माह का है। आईटीआई बिजलीघर कार्यालय पर ओटीएस (एकमुश्त समाधान योजना) के तहत किसानों द्वारा बिल जमा कराया गया।
इसके अलावा अन्य उपभोक्ताओं द्वारा बिलों में संशोधन कर बिल का भुगतान कराया गया। बताया जा रहा है कि उन बिलों का भुगतान कोष में जमा कराया ही नहीं गया।
इस मामले में अधिशासी अभियंता स्तर की टीम गठित कर जांच कराई गई। जिसमें लगभग 55 लाख रुपये का गोलमाल सामने आया। इस गोलमाल का आरोप तत्कालीन विद्युत उपखंड अधिकारी शैलेंद्र कुमार और क्लर्क कुलदीप पर लगा।
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जांच टीम ने जांच रिपोर्ट मुख्य अभियंता को सौंप दी। मुख्य अभियंता ने जांच रिपोर्ट को विद्युत निगम के उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया। इस मामले में विद्युत निगम ने कार्रवाई करते हुए तत्कालीन एसडीओ रहे शैलेंद्र कुमार और क्लर्क कुलदीप को सस्पेंड कर दिया है।
वर्तमान में शैलेंद्र कुमार अधिशासी अभियंता के पद पर तैनात हैं। गबन और कार्रवाई से निगम में खलबली मच गई है। बताया जा रहा है कि अब मंडल के सभी जिलों में जांच कराई जा रही है। मुख्य अभियंता ईश्वर पाल सिंह ने इस कार्रवाई पर सहमति जताई है।
प्राइवेट कांट्रेक्टर भी रहा शामिल ः लगभग 55 लाख रुपये के गोलमाल में विद्युत निगम का एक प्राईवेट कांट्रेटर भी शामिल रहा। जिसके माध्यम से उपभोक्ताओं से वसूली कराई गई। विद्युत निगम ने एसडीओ और क्लर्क पर तो कार्रवाई कर दी है, लेकिन अभी तक प्राइवेट कांट्रेक्टर पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
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विद्युत निगम ने मामले में विद्युत खंड अधिकारी एवं लिपिक को सस्पेंड कर दिया है। मामला इसी वर्ष के फरवरी माह का है। आईटीआई बिजलीघर कार्यालय पर ओटीएस (एकमुश्त समाधान योजना) के तहत किसानों द्वारा बिल जमा कराया गया।
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इसके अलावा अन्य उपभोक्ताओं द्वारा बिलों में संशोधन कर बिल का भुगतान कराया गया। बताया जा रहा है कि उन बिलों का भुगतान कोष में जमा कराया ही नहीं गया।
इस मामले में अधिशासी अभियंता स्तर की टीम गठित कर जांच कराई गई। जिसमें लगभग 55 लाख रुपये का गोलमाल सामने आया। इस गोलमाल का आरोप तत्कालीन विद्युत उपखंड अधिकारी शैलेंद्र कुमार और क्लर्क कुलदीप पर लगा।
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जांच टीम ने जांच रिपोर्ट मुख्य अभियंता को सौंप दी। मुख्य अभियंता ने जांच रिपोर्ट को विद्युत निगम के उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया। इस मामले में विद्युत निगम ने कार्रवाई करते हुए तत्कालीन एसडीओ रहे शैलेंद्र कुमार और क्लर्क कुलदीप को सस्पेंड कर दिया है।
वर्तमान में शैलेंद्र कुमार अधिशासी अभियंता के पद पर तैनात हैं। गबन और कार्रवाई से निगम में खलबली मच गई है। बताया जा रहा है कि अब मंडल के सभी जिलों में जांच कराई जा रही है। मुख्य अभियंता ईश्वर पाल सिंह ने इस कार्रवाई पर सहमति जताई है।
प्राइवेट कांट्रेक्टर भी रहा शामिल ः लगभग 55 लाख रुपये के गोलमाल में विद्युत निगम का एक प्राईवेट कांट्रेटर भी शामिल रहा। जिसके माध्यम से उपभोक्ताओं से वसूली कराई गई। विद्युत निगम ने एसडीओ और क्लर्क पर तो कार्रवाई कर दी है, लेकिन अभी तक प्राइवेट कांट्रेक्टर पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।