उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में अनफिट बसों के इंजन व चेसिस नंबर बदलकर फर्जी तरीके से फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कराने वाला गिरोह दबोचा गया है। ये लोग बसों को फर्जी नंबर प्लेट लगाकर बेच भी रहे थे और यात्री बसों के रूप में भी संचालित करा रहे थे। पुलिस ने इसका खुलासा करके तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर छह बसें बरामद की हैं। तीन अन्य आरोपियों के भी नाम पुलिस को मालूम चले हैं, जिन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास चल रहा है।
सहारनपुर: शातिर गिरोह का पर्दाफाश, तीन आरोपी गिरफ्तार, बस की नंबर प्लेट बदलकर बेचते थे मोटे दामों पर, तस्वीरें
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एसपी सिटी राजेश कुमार ने बताया कि थाना कुतुबशेर पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर गांधी पार्क और बेहट अड्डे से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपी शानू निवासी हसनपुर चुंगी कोतवाली सदर बाजार, मोहम्मद अहमद निवासी गंदेवड़ा थाना फतेहपुर और गुलनाज निवासी मोहल्ला महाजनान कस्बा बेहट का रहने वाला है। ये सभी आरोपी सहारनपुर जिले के ही रहने वाले हैं।
तीन आरोपी मौके से फरार हो गए। आरोपियों की निशानदेही पर छह बसें और फर्जी नंबर प्लेट, इंजन एवं चेसिस नंबर बदलने में प्रयुक्त होने वाले औजार, ग्राइंडर मशीन, हथौड़ी आदि बरामद हुई है। फरार आरोपी अफजाल अहमद पिलखनतला, राजेश निवासी जनकपुरी और अब्दुल कय्यूम निवासी ढोलीखाल सहारनपुर की गिरफ्तारी को पुलिस दबिश दे रही है।
ऐसे करते थे फर्जीवाड़ा
आरोपी उन बसों को खरीदते थे, जिनको संभागीय परिवहन विभाग की ओर से अनफिट घोषित कर दिया जाता था। वह बस सड़क पर चलने लायक होती थी। इन बसों को खरीदने के बाद ऐसी बसों के रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल करते थे, जो हादसे में ज्यादा क्षतिग्रस्त हो गईं अथवा चलने लायक नहीं बची थीं। इनके इंजन और चेसिस नंबर के आधार पर ही अनफिट बसों का फर्जी तरीके से फिटनेस प्रमाणपत्र बनवा लेते थे। इसके बाद बस को या तो बेच देते थे या फिर यात्री बसों के रूप में संचालन कराने लगते थे।
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बड़े पैमाने पर चल रहा यह खेल
पुलिस का दावा है कि इस गिरोह के अन्य सदस्यों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा, जिनकी निशानदेही पर अभी और बसें बरामद की जाएंगी। आरोपी पिछले काफी समय से इस काम को अंजाम दे रहे थे। ऐसे में साफ है कि जिले में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा कर इस तरह की बसों का संचालन किया जा रहा है। उधर, पुलिस के खुलासे से संभागीय परिवहन विभाग पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्योंकि, आरोपियों द्वारा इंजन व चेसिस नंबर बदलकर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर वहीं से फिटनेस सर्टिफिकेट लिया जा रहा था।
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