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Kushinagar News: जिंदा को मृत बताकर करा ली वसीयत
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पडरौना। सेवरही क्षेत्र के व्यक्ति को अभिलेखों में मृत दर्शाकर उसकी पैतृक जमीन की फर्जी वसीयत और नामांतरण का मामला सामने आया है।
एससी-एसटी विशेष न्यायालय ने सेवरही पुलिस को नायब तहसीलदार समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर सात दिन में रिपोर्ट मांगी है। पुलिस ने एससी-एसटी विशेष न्यायालय के आदेश से अनभिज्ञता जताई है।
सेवरही थाना क्षेत्र निवासी विश्वनाथ का आरोप है कि वह बाहर रहकर कमाता था। घर लौटने के बाद जमीन का इंतखाब निकलवाया तो अभिलेखों में खुद को मृत दर्शाए जाने और जमीन दूसरे लोगों के नाम दर्ज होने की जानकारी मिली।
आरोप है कि सुनील कुमार जायसवाल पुत्र विश्वनाथ जायसवाल और शारदा देवी पत्नी स्व. विश्वनाथ ने तत्कालीन हलका लेखपाल और कानूनगो की मिलीभगत से तुर्कवलिया साहबगंज स्थित गाटा संख्या 271, 694 और 712 की जमीन अपने नाम दर्ज करा ली।
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पीड़ित का कहना है कि उसने अथवा उसके पूर्वजों ने उक्त जमीन का कभी बैनामा या वसीयत नहीं की। आरोप है कि उसे मृत दर्शाकर अनुसूचित जाति की जमीन पर सुनील कुमार जायसवाल और उसकी मां शारदा देवी के नाम कथित फर्जी वसीयत दर्ज करा दी गई। पीड़ित के अनुसार, तुर्कवलिया साहबगंज स्थित आरजी नंबर 712 की जमीन को भी 13 दिसंबर 2017 को पश्चिमी चंपारण निवासी फुलपति देवी पत्नी इंद्रदेव यादव के नाम बैनामा कर दिया गया।
इसकी शिकायत पीड़ित ने एसडीएम और तहसीलदार तमकुहीराज से की थी। आरोप है कि तत्कालीन नायब तहसीलदार कुंदन वर्मा ने 12 जनवरी 2026 को आरोपियों के प्रभाव में आदेश पारित कर दिया। जबकि, हलका लेखपाल ने पीड़ित के पक्ष में पांच गवाहों के बयान और मौके की रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसके बावजूद नायब तहसीलदार ने उसे मृत घोषित करते हुए नामांतरण का आदेश पारित कर दिया।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि 15 जून 2026 को वह सुनील जायसवाल और शारदा देवी से बातचीत करने गया था। जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उससे मारपीट की गई। पीड़ित ने आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद सेवरही पुलिस कोई कार्रवाई नहीं की। थक-हार कर एससी-एसटी विशेष न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
इस संबंध में थानाध्यक्ष सेवरही मनोज कुमार वर्मा का कहना है कि न्यायालय के आदेश की जानकारी उन्हें नहीं है। आदेश मिलने के बाद प्राथमिकी दर्ज कर मामले की विवेचना की जाएगी। उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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एससी-एसटी विशेष न्यायालय ने सेवरही पुलिस को नायब तहसीलदार समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर सात दिन में रिपोर्ट मांगी है। पुलिस ने एससी-एसटी विशेष न्यायालय के आदेश से अनभिज्ञता जताई है।
सेवरही थाना क्षेत्र निवासी विश्वनाथ का आरोप है कि वह बाहर रहकर कमाता था। घर लौटने के बाद जमीन का इंतखाब निकलवाया तो अभिलेखों में खुद को मृत दर्शाए जाने और जमीन दूसरे लोगों के नाम दर्ज होने की जानकारी मिली।
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आरोप है कि सुनील कुमार जायसवाल पुत्र विश्वनाथ जायसवाल और शारदा देवी पत्नी स्व. विश्वनाथ ने तत्कालीन हलका लेखपाल और कानूनगो की मिलीभगत से तुर्कवलिया साहबगंज स्थित गाटा संख्या 271, 694 और 712 की जमीन अपने नाम दर्ज करा ली।
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पीड़ित का कहना है कि उसने अथवा उसके पूर्वजों ने उक्त जमीन का कभी बैनामा या वसीयत नहीं की। आरोप है कि उसे मृत दर्शाकर अनुसूचित जाति की जमीन पर सुनील कुमार जायसवाल और उसकी मां शारदा देवी के नाम कथित फर्जी वसीयत दर्ज करा दी गई। पीड़ित के अनुसार, तुर्कवलिया साहबगंज स्थित आरजी नंबर 712 की जमीन को भी 13 दिसंबर 2017 को पश्चिमी चंपारण निवासी फुलपति देवी पत्नी इंद्रदेव यादव के नाम बैनामा कर दिया गया।
इसकी शिकायत पीड़ित ने एसडीएम और तहसीलदार तमकुहीराज से की थी। आरोप है कि तत्कालीन नायब तहसीलदार कुंदन वर्मा ने 12 जनवरी 2026 को आरोपियों के प्रभाव में आदेश पारित कर दिया। जबकि, हलका लेखपाल ने पीड़ित के पक्ष में पांच गवाहों के बयान और मौके की रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसके बावजूद नायब तहसीलदार ने उसे मृत घोषित करते हुए नामांतरण का आदेश पारित कर दिया।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि 15 जून 2026 को वह सुनील जायसवाल और शारदा देवी से बातचीत करने गया था। जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उससे मारपीट की गई। पीड़ित ने आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद सेवरही पुलिस कोई कार्रवाई नहीं की। थक-हार कर एससी-एसटी विशेष न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
इस संबंध में थानाध्यक्ष सेवरही मनोज कुमार वर्मा का कहना है कि न्यायालय के आदेश की जानकारी उन्हें नहीं है। आदेश मिलने के बाद प्राथमिकी दर्ज कर मामले की विवेचना की जाएगी। उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।