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किताबों पर ओवर रेटिंग कर काटी जा रही अभिभावकों की जेब
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 19 Apr 2017 01:33 AM IST
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किताबों पर की गई ओवर रेटिंग।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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प्रशासन सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। उधर, मान्यता प्राप्त स्कूल चुपचाप तरीके से अभिभावकों का उत्पीड़न करने में लगे हैं। अनेक मान्यता प्राप्त स्कूल किताबों पर ओवर रेटिंग कर खासकर देहात क्षेत्र के लोगों की जेब पर डाका डाल रहे हैं।
पुराना कलसिया रोड स्थित एक मान्यता प्राप्त इंटर कॉलेज बच्चों को खुद ही किताबें उपलब्ध करा रहा है। हैरत की बात यह है कि प्रत्येक कक्षा में कोर्स की ज्यादातर किताबों पर ओवर रेटिंग की गई है। 40 रुपये की किताब पर 66 और 120 रुपये की किताब पर 185 रुपये का टैग लगाया गया है। इस संबंध में जब स्कूल संचालक से बात की गई तो उनका कहना था कि ऊपर से ही किताबों पर रेट डलकर आ रहे हैं।
अब सवाल यह है कि सरकार से मान्यता प्राप्त स्कूलों के प्रति प्रशासन खासकर बेसिक शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा विभाग इतने नरम क्यों हैं। कई साल से अधिकारियों ने इन स्कूलों का की हकीकत जानने तक की जरूरत नहीं समझी है। जिले में करीब पांच हजार मान्यता प्राप्त स्कूल चल रहे हैं। देहात क्षेत्र में जगह-जगह खुले स्कूलों ने अपने बोर्ड पर इंग्लिश मीडियम लिखा है, जबकि उनकी मान्यता हिंदी मीडियम की है।
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दस से 15 % बढ़ा रहे फीस
मान्यता प्राप्त स्कूल भी फीस बढ़ाने में पीछे नहीं हैं। ज्यादातर स्कूल दस से 15 फीसदी फीस हर साल बढ़ा देते हैं। स्कूलों में 200 से 500 रुपये तक फीस ली जा रही है, जिसे देने में लोगों असमर्थ है।
पिछले दिनों हुई स्कूल संचालकों की बैठक में डीएम ने बीएसए को बिना मान्यता के चलने वाले स्कूलों को बंद कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही किताबों, यूनिफार्म और अन्य सामान की बिक्री करने वाले मान्यता प्राप्त स्कूलों पर भी कार्रवाई करने को कहा गया है। यदि किसी स्कूल की शिकायत मिलती है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
- आरके तिवारी, डीआईओएस।
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पुराना कलसिया रोड स्थित एक मान्यता प्राप्त इंटर कॉलेज बच्चों को खुद ही किताबें उपलब्ध करा रहा है। हैरत की बात यह है कि प्रत्येक कक्षा में कोर्स की ज्यादातर किताबों पर ओवर रेटिंग की गई है। 40 रुपये की किताब पर 66 और 120 रुपये की किताब पर 185 रुपये का टैग लगाया गया है। इस संबंध में जब स्कूल संचालक से बात की गई तो उनका कहना था कि ऊपर से ही किताबों पर रेट डलकर आ रहे हैं।
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अब सवाल यह है कि सरकार से मान्यता प्राप्त स्कूलों के प्रति प्रशासन खासकर बेसिक शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा विभाग इतने नरम क्यों हैं। कई साल से अधिकारियों ने इन स्कूलों का की हकीकत जानने तक की जरूरत नहीं समझी है। जिले में करीब पांच हजार मान्यता प्राप्त स्कूल चल रहे हैं। देहात क्षेत्र में जगह-जगह खुले स्कूलों ने अपने बोर्ड पर इंग्लिश मीडियम लिखा है, जबकि उनकी मान्यता हिंदी मीडियम की है।
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दस से 15 % बढ़ा रहे फीस
मान्यता प्राप्त स्कूल भी फीस बढ़ाने में पीछे नहीं हैं। ज्यादातर स्कूल दस से 15 फीसदी फीस हर साल बढ़ा देते हैं। स्कूलों में 200 से 500 रुपये तक फीस ली जा रही है, जिसे देने में लोगों असमर्थ है।
पिछले दिनों हुई स्कूल संचालकों की बैठक में डीएम ने बीएसए को बिना मान्यता के चलने वाले स्कूलों को बंद कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही किताबों, यूनिफार्म और अन्य सामान की बिक्री करने वाले मान्यता प्राप्त स्कूलों पर भी कार्रवाई करने को कहा गया है। यदि किसी स्कूल की शिकायत मिलती है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
- आरके तिवारी, डीआईओएस।