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मनचले को पांच साल की सजा
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 09 Jun 2016 12:39 AM IST
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चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
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सहारनपुर में छेड़छाड़ से तंग आकर युवती द्वारा आत्महत्या कर लेने के मामले की अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी युवक को दोषी मानते हुए पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पांच हजार का अर्थ दंड भी लगाया है।
वादी सोनू पुत्र यशपाल ने वर्ष 2014 में नगर कोतवाली में प्रार्थना पत्र दिया था कि उसकी 18 वर्षीय बहन मीनू को पड़ोस में ही रहने वाला गोविंद छेड़छाड़ करता था।
उसकी हरकतों से तंग आकर उसकी बहन ने 13 फरवरी 2014 की पूर्वाह्न करीब साढ़े 11 बजे कमरे में पंखे से लटक कर जान दे दी थी। उस वक्त घर में कोई नहीं था। जब परिजन लौटे तो उन्हें मीनू का शव पंखे से लटका मिला था।
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वादी की तहरीर पर गोविंद के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कर लिया गया था। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या दस अयाज अहमद कर रहे थे। सुनवाई के दौरान उन्होंने पाया कि अभियुक्त सहानुुुुभूति पाने का अधिकारी नहीं है।
ऐसे में उसको कठोर दंड से दंडित किया जाए। सहायक शासकीय अधिवक्ता जेएस पंवार ने बताया कि अपर सत्र न्यायाधीश ने गोविंद को दोषी मानते हुए पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पांच हजार रुपये का अर्थ दंड भी लगाया है।
अर्थ दंड अदा न करने की स्थिति में तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अर्थ दंड प्राप्त होने पर युवती के भाइयों सोनू और अभिषेक को आधी-आधी यानी प्रत्येक 2500 हजार रुपये प्रदान किए जाएंगे। न्यायाधीश ने अभियुक्त द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने के भी आदेश दिए हैं।
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वादी सोनू पुत्र यशपाल ने वर्ष 2014 में नगर कोतवाली में प्रार्थना पत्र दिया था कि उसकी 18 वर्षीय बहन मीनू को पड़ोस में ही रहने वाला गोविंद छेड़छाड़ करता था।
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उसकी हरकतों से तंग आकर उसकी बहन ने 13 फरवरी 2014 की पूर्वाह्न करीब साढ़े 11 बजे कमरे में पंखे से लटक कर जान दे दी थी। उस वक्त घर में कोई नहीं था। जब परिजन लौटे तो उन्हें मीनू का शव पंखे से लटका मिला था।
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वादी की तहरीर पर गोविंद के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कर लिया गया था। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या दस अयाज अहमद कर रहे थे। सुनवाई के दौरान उन्होंने पाया कि अभियुक्त सहानुुुुभूति पाने का अधिकारी नहीं है।
ऐसे में उसको कठोर दंड से दंडित किया जाए। सहायक शासकीय अधिवक्ता जेएस पंवार ने बताया कि अपर सत्र न्यायाधीश ने गोविंद को दोषी मानते हुए पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही पांच हजार रुपये का अर्थ दंड भी लगाया है।
अर्थ दंड अदा न करने की स्थिति में तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अर्थ दंड प्राप्त होने पर युवती के भाइयों सोनू और अभिषेक को आधी-आधी यानी प्रत्येक 2500 हजार रुपये प्रदान किए जाएंगे। न्यायाधीश ने अभियुक्त द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने के भी आदेश दिए हैं।