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कई को मिली कठोर कारावास की सजा
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sun, 31 Jul 2016 01:06 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : file photo
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सहारनपुर में शनिवार को कोर्ट ने दो दो अभियुक्तों को चार साल का कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा हत्या के प्रसास में पति और ससुर को कारावास की सजा सुनाई गई। झगडे़ के एक मामले में तीन लोगों को पांच वर्ष की सजा सुनाई गई।
चार साल पुराने एक मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश ने दो लोगों को चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर अर्थदंड भी लगाया गया है, जिसकी आधी राशि पीड़ित को देने के आदेश दिए गए हैं।
जिला शासकीय अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि 25 नवंबर 2012 को विकास शर्मा बाइक पर सहारनपुर से देहरादून जा रहा था। छुटमलपुर के पास एक सफेद रंग की कार सवार लोगों ने उनका पीछा किया और छुटमलपुर से बाहर निकलते ही विकास को रोक लिया।
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उन्होंने विकास को तमंचे से आतंकित करते हुए कार में डाल लिया और देहरादून की ओर चल लिए। विकास के शोर मचाने पर राहगीरों ने उसे देख लिया। इसके बाद अपहरणकर्ता विकास को चोटिल अवस्था में सड़क पर छोड़कर भाग निकले।
थाना फतेहपुर में वारदात की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश (कक्ष संख्या-5) मुकेश कुमार सिंघल ने आरोपी सुधीर और जनेश्वर को दोषी पाते हुए धारा 364 और 511 के अपराध के लिए चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
साथ ही पांच-पांच हजार रुपये का अर्थ दंड भी लगाया है। अर्थ दंड की आधी राशि पीड़ित को देने के आदेश दिए गए हैं। अर्थ दंड न चुकाने की स्थिति में छह महीने का साधारण कारावास की सजा से दंडित करने को कहा है।
उधर, दहेज की मांग को लेकर विवाहिता को आग लगाकर हत्या करने के प्रयास में अदालत ने पति और ससुर को सात वर्ष के कारावास और तीस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
एडीजे बाबूलाल केसरवानी की अदालत में चल रहे वाद में वादी पक्ष के वकील ठा. सुरेंद्रपाल सिंह ने बताया कि मेरठ के सरधना के गांव मुनहेड़ा निवासी श्याम सिंह की बेटी प्रीति का विवाह बड़गांव के अंबहेटा चांद निवासी गजे सिंह के बेटे अरुण कुमार के साथ हुआ था। आरोप था कि शादी में कार न
मिलने पर पति अरुण कुमार और ससुर श्याम सिंह प्रीति के साथ अकसर मारपीट करते थे। इसे लेकर गांव में पंचायत भी हुई और पंचायत में अरुण और गजे सिंह ने माफी भी मांगी थी। लेकिन कुछ दिनों बाद फिर से वह मारपीट पर उतारू हो गए।
सुरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि 27 मार्च 2014 को आरोपियों ने प्रीति पर मिट्टी का तेल डाल आग लगाकर उसकी हत्या करने का प्रयास किया। लेकिन शोर की आवाज सुनकर मोहल्लेवासियों ने किसी तरह उसे बचा लिया था।
शनिवार को अपर सत्र न्यायधीश बाबूलाल केसरवानी ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद पति अरुण कुमार और ससुर गजे सिंह को सात वर्ष की सजा सुनाई है। साथ ही 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा भी सुनाई है।
स्ट्रीट लाइट को लेकर नौ साल पहले हुए झगड़े में विशेष न्यायाधीश ने तीन लोगों को पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट के निर्णय के बाद से तीनों के परिवार में हड़कंप मचा हुआ है।
16 मई 2007 को स्ट्रीट लाइट लगवाने को लेकर तत्कालीन चेयरमैन प्रतिनिधि उमेश त्यागी और सभासद ललित सूद के बीच कहासुनी और झगड़ा हो गया था।
मामले में उमेश त्यागी के भाई महेश त्यागी की ओर से मुकदमा दर्ज कराने के लिए कोतवाली सदर बाजार में तहरीर दी गई थी। उन्होंने ललित सूद और उनके दोनों भाइयों पर उमेश त्यागी पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया था।
तब से मामला कोर्ट में चल रहा था। मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट कक्ष संख्या एक सहारनपुर अमित पाल सिंह ने आरोपियों सुमित सूद, ललित सूद और राजेश उर्फ बॉबी को दोषी पाते हुए सजा सुनाई है।
तीनों को धारा 308 के तहत पांच साल के सश्रम कारावास की सजा और तीन-तीन हजार रुपये का अर्थ दंड लगाया है। धारा 452 के सिद्ध दोष अपराध के लिए तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा और दो-दो हजार रुपये का अर्थ दंड लगाया है।
धारा 323 सपठित धारा 34 के सिद्ध दोष अपराध के लिए छह महीने के सश्रम कारावास की सजा तथा एक-एक हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। धारा 506 के सिद्धदोष दोष अपराध के लिए दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
अर्थ दंड न दिए जाने पर अभियुक्त धारा 308 के अपराध के लिए तीन माह, धारा 452 के अपराध के लिए दो माह तथा धारा 324 के अपराध के लिए एक महीने का अतिरिक्त कारावास भोगेंगे। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
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चार साल पुराने एक मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश ने दो लोगों को चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर अर्थदंड भी लगाया गया है, जिसकी आधी राशि पीड़ित को देने के आदेश दिए गए हैं।
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जिला शासकीय अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि 25 नवंबर 2012 को विकास शर्मा बाइक पर सहारनपुर से देहरादून जा रहा था। छुटमलपुर के पास एक सफेद रंग की कार सवार लोगों ने उनका पीछा किया और छुटमलपुर से बाहर निकलते ही विकास को रोक लिया।
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उन्होंने विकास को तमंचे से आतंकित करते हुए कार में डाल लिया और देहरादून की ओर चल लिए। विकास के शोर मचाने पर राहगीरों ने उसे देख लिया। इसके बाद अपहरणकर्ता विकास को चोटिल अवस्था में सड़क पर छोड़कर भाग निकले।
थाना फतेहपुर में वारदात की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश (कक्ष संख्या-5) मुकेश कुमार सिंघल ने आरोपी सुधीर और जनेश्वर को दोषी पाते हुए धारा 364 और 511 के अपराध के लिए चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
साथ ही पांच-पांच हजार रुपये का अर्थ दंड भी लगाया है। अर्थ दंड की आधी राशि पीड़ित को देने के आदेश दिए गए हैं। अर्थ दंड न चुकाने की स्थिति में छह महीने का साधारण कारावास की सजा से दंडित करने को कहा है।
उधर, दहेज की मांग को लेकर विवाहिता को आग लगाकर हत्या करने के प्रयास में अदालत ने पति और ससुर को सात वर्ष के कारावास और तीस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
एडीजे बाबूलाल केसरवानी की अदालत में चल रहे वाद में वादी पक्ष के वकील ठा. सुरेंद्रपाल सिंह ने बताया कि मेरठ के सरधना के गांव मुनहेड़ा निवासी श्याम सिंह की बेटी प्रीति का विवाह बड़गांव के अंबहेटा चांद निवासी गजे सिंह के बेटे अरुण कुमार के साथ हुआ था। आरोप था कि शादी में कार न
मिलने पर पति अरुण कुमार और ससुर श्याम सिंह प्रीति के साथ अकसर मारपीट करते थे। इसे लेकर गांव में पंचायत भी हुई और पंचायत में अरुण और गजे सिंह ने माफी भी मांगी थी। लेकिन कुछ दिनों बाद फिर से वह मारपीट पर उतारू हो गए।
सुरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि 27 मार्च 2014 को आरोपियों ने प्रीति पर मिट्टी का तेल डाल आग लगाकर उसकी हत्या करने का प्रयास किया। लेकिन शोर की आवाज सुनकर मोहल्लेवासियों ने किसी तरह उसे बचा लिया था।
शनिवार को अपर सत्र न्यायधीश बाबूलाल केसरवानी ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद पति अरुण कुमार और ससुर गजे सिंह को सात वर्ष की सजा सुनाई है। साथ ही 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा भी सुनाई है।
स्ट्रीट लाइट को लेकर नौ साल पहले हुए झगड़े में विशेष न्यायाधीश ने तीन लोगों को पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट के निर्णय के बाद से तीनों के परिवार में हड़कंप मचा हुआ है।
16 मई 2007 को स्ट्रीट लाइट लगवाने को लेकर तत्कालीन चेयरमैन प्रतिनिधि उमेश त्यागी और सभासद ललित सूद के बीच कहासुनी और झगड़ा हो गया था।
मामले में उमेश त्यागी के भाई महेश त्यागी की ओर से मुकदमा दर्ज कराने के लिए कोतवाली सदर बाजार में तहरीर दी गई थी। उन्होंने ललित सूद और उनके दोनों भाइयों पर उमेश त्यागी पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया था।
तब से मामला कोर्ट में चल रहा था। मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट कक्ष संख्या एक सहारनपुर अमित पाल सिंह ने आरोपियों सुमित सूद, ललित सूद और राजेश उर्फ बॉबी को दोषी पाते हुए सजा सुनाई है।
तीनों को धारा 308 के तहत पांच साल के सश्रम कारावास की सजा और तीन-तीन हजार रुपये का अर्थ दंड लगाया है। धारा 452 के सिद्ध दोष अपराध के लिए तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा और दो-दो हजार रुपये का अर्थ दंड लगाया है।
धारा 323 सपठित धारा 34 के सिद्ध दोष अपराध के लिए छह महीने के सश्रम कारावास की सजा तथा एक-एक हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। धारा 506 के सिद्धदोष दोष अपराध के लिए दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
अर्थ दंड न दिए जाने पर अभियुक्त धारा 308 के अपराध के लिए तीन माह, धारा 452 के अपराध के लिए दो माह तथा धारा 324 के अपराध के लिए एक महीने का अतिरिक्त कारावास भोगेंगे। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।