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दलित और ठाकुर आए आमने-सामने, तनाव
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sun, 25 Jun 2017 12:20 AM IST
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गांव भायला में बना तनाव।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर के देवबंद में दरवाजा लगाने को लेकर भायला गांव में ठाकुर व दलित समाज के लोग आमने सामने आ गए। जानकारी मिलते ही पुलिस अधिकारी आनन फानन में फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों के गुस्साए लोगों को समझाकर शांत किया।
शनिवार की दोपहर भायला गांव निवासी ठाकुर सुशील कुमार मकान के पीछे से गुजर रही गली में दरवाजा लगाने के लिए दीवार को तोड़ रहा था। जिसका वहां रहने वाले दलित परिवारों ने विरोध किया तो दोनों पक्ष आमने सामने आ गए।
इससे पहले मामला बढ़ता सूचना मिलने पर कोतवाल पंकज कुमार त्यागी फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए और गुस्साए लोगों को समझाकर शांत किया। सुशील गली में दरवाजा लगाने पर अड़ा था, जबकि दलित समाज के लोग इसका विरोध कर रहे थे।
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जिसको देखते हुए उपजिलाधिकारी रामविलास यादव ने अग्रिम आदेश तक यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश पुलिस को दिए हैं। उधर, दलित समाज के श्रीराम, प्रदीप, सोनू, महीपाल, छोटा, सौराज सिंह आदि ने तहसीलदार को दिए प्रार्थना पत्र में कहा कि लगभग 20 वर्ष पूर्व परिजन आबादी के लिए उक्त रास्ता शासन की ओर से छोड़ा गया था।
जिस पर किसी और बिरादरी का चलना फिरना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठाकुर समाज के लोग ताकत के बल पर रास्ता खोलना चाहते हैं जो कानून के खिलाफ है।
उन्होंने तहसीलदार से मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है। कोतवाल पंकज त्यागी का कहना है कि दोनों पक्षों को समझाकर शांत कर दिया गया। उपजिलाधिकारी के जो भी आदेश होंगे शांति व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस उसका पालन करेगी।
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शनिवार की दोपहर भायला गांव निवासी ठाकुर सुशील कुमार मकान के पीछे से गुजर रही गली में दरवाजा लगाने के लिए दीवार को तोड़ रहा था। जिसका वहां रहने वाले दलित परिवारों ने विरोध किया तो दोनों पक्ष आमने सामने आ गए।
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इससे पहले मामला बढ़ता सूचना मिलने पर कोतवाल पंकज कुमार त्यागी फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए और गुस्साए लोगों को समझाकर शांत किया। सुशील गली में दरवाजा लगाने पर अड़ा था, जबकि दलित समाज के लोग इसका विरोध कर रहे थे।
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जिसको देखते हुए उपजिलाधिकारी रामविलास यादव ने अग्रिम आदेश तक यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश पुलिस को दिए हैं। उधर, दलित समाज के श्रीराम, प्रदीप, सोनू, महीपाल, छोटा, सौराज सिंह आदि ने तहसीलदार को दिए प्रार्थना पत्र में कहा कि लगभग 20 वर्ष पूर्व परिजन आबादी के लिए उक्त रास्ता शासन की ओर से छोड़ा गया था।
जिस पर किसी और बिरादरी का चलना फिरना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठाकुर समाज के लोग ताकत के बल पर रास्ता खोलना चाहते हैं जो कानून के खिलाफ है।
उन्होंने तहसीलदार से मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है। कोतवाल पंकज त्यागी का कहना है कि दोनों पक्षों को समझाकर शांत कर दिया गया। उपजिलाधिकारी के जो भी आदेश होंगे शांति व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस उसका पालन करेगी।