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किसान के नाम पर बैंक से लिए पांच लाख का कर्ज
Updated Sat, 31 Mar 2018 12:12 AM IST
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सहारनपुर। रामपुर मनिहारान क्षेत्र के गांव उमाही कला निवासी एक किसान के नाम पर फर्जीवाड़ा कर बैंक से पांच लाख रुपये का कर्ज लेने का मामला सामने आया है। इतना ही नहीं उसके नाम से ग्रीन कार्ड भी जारी करा लिया गया। किसान की आरसी जारी होने पर मामले का खुलासा हुआ है। इस मामले में बैंक कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप है। पीड़ित मामले में कार्रवाई के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है।
गांव उमाही कला निवासी ब्रहमपाल ने बताया कि क्षेत्र में स्थित एक बैंक में कई वर्षों से उसका खाता है। उसके नाम किसान क्रेडिट कार्ड है। कुछ दिन पूर्व तहसील कर्मचारी बैंक से पांच लाख रुपये का कर्जा लेने और किश्त जमा ना कराने पर आरसी लेकर उसके घर पहुंचा। कर्मचारी ने बताया कि ब्रहमपाल ने बैंक से पांच लाख रुपये का कर्जा लिया हुआ है। पता चलते ही किसान के होश उड़ गए। ब्रहमपाल का कहना है कि उसने बैंक से कोई कर्जा नहीं लिया। इस संबंध में जब बैंक अधिकारियों से जाकर पूछा तो जानकारी मिली कि किसान के नाम पर वर्ष 2011 में कर्जा लिया गया था और ब्याज सहित अब उस पर आठ लाख रुपये का कर्जा हो गया। किसान मामले में कार्रवाई के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है। लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हो रही है।
आठ साल से क्यों नहीं किया तकाजा
सहारनपुर। आठ साल में कर्ज की किश्त के लिए बैंक की ओर से कोई तकाजा नहीं किया गया। किसान का आरोप है कि बैंक कर्मचारियों ने अज्ञात लोगों के साथ मिलीभगत कर उसके नाम पर कर्ज लिया। क्योंकि, बैंक में उसका खाता है और दस्तावेज भी जमा है। तत्कालीन बैंक मैनेजर ने खातों से संबंधित कुछ कोरे कागजातों पर हस्ताक्षर कराए थे।
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पहले भी हो चुके है फर्जीवाड़े
सहारनपुर। पूर्व भी इस तरह के मामले सामने आ चुुके हैं। जब कर्ज लेने वाले व्यक्ति को पता नहीं लगा कि उसके नाम से कर्ज लिया गया है। मगर, कार्रवाई में फर्जीवाड़ा करने वाला कोई भी शातिर अभी तक नहीं पकड़ा गया। इससे साफ है कि जिले में आम नागरिकों के साथ ठगी करने वाले शातिर सक्रिय हैं।
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गांव उमाही कला निवासी ब्रहमपाल ने बताया कि क्षेत्र में स्थित एक बैंक में कई वर्षों से उसका खाता है। उसके नाम किसान क्रेडिट कार्ड है। कुछ दिन पूर्व तहसील कर्मचारी बैंक से पांच लाख रुपये का कर्जा लेने और किश्त जमा ना कराने पर आरसी लेकर उसके घर पहुंचा। कर्मचारी ने बताया कि ब्रहमपाल ने बैंक से पांच लाख रुपये का कर्जा लिया हुआ है। पता चलते ही किसान के होश उड़ गए। ब्रहमपाल का कहना है कि उसने बैंक से कोई कर्जा नहीं लिया। इस संबंध में जब बैंक अधिकारियों से जाकर पूछा तो जानकारी मिली कि किसान के नाम पर वर्ष 2011 में कर्जा लिया गया था और ब्याज सहित अब उस पर आठ लाख रुपये का कर्जा हो गया। किसान मामले में कार्रवाई के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है। लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हो रही है।
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आठ साल से क्यों नहीं किया तकाजा
सहारनपुर। आठ साल में कर्ज की किश्त के लिए बैंक की ओर से कोई तकाजा नहीं किया गया। किसान का आरोप है कि बैंक कर्मचारियों ने अज्ञात लोगों के साथ मिलीभगत कर उसके नाम पर कर्ज लिया। क्योंकि, बैंक में उसका खाता है और दस्तावेज भी जमा है। तत्कालीन बैंक मैनेजर ने खातों से संबंधित कुछ कोरे कागजातों पर हस्ताक्षर कराए थे।
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पहले भी हो चुके है फर्जीवाड़े
सहारनपुर। पूर्व भी इस तरह के मामले सामने आ चुुके हैं। जब कर्ज लेने वाले व्यक्ति को पता नहीं लगा कि उसके नाम से कर्ज लिया गया है। मगर, कार्रवाई में फर्जीवाड़ा करने वाला कोई भी शातिर अभी तक नहीं पकड़ा गया। इससे साफ है कि जिले में आम नागरिकों के साथ ठगी करने वाले शातिर सक्रिय हैं।