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हिंसा के आरोपियों को सजा दिलाना होगा पुलिस के लिए चुनौती
Updated Sat, 12 Aug 2017 12:16 AM IST
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सहारनपुर। बवाल और हिंसा के तीन मामलों में पुलिस ने 111 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। अभी तक लचर रवैया अपनाने वाली पुलिस के समक्ष मजबूती के साथ पैरवी कर आरोपियों को सजा दिलाना चुनौती रहेगी।
सहारनपुर में 20 अप्रैल से शुरू हुए बवालों के मामले में पुलिस तीन घटनाओं के 111 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर चुकी है। हालांकि पुलिस ने सबसे पहले हुए 20 अप्रैल के सड़क दूधली मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है। जबकि इस मामले में अब तक 18 आरोपी गिरफ्तार भी हो चुके हैं। लेकिन सड़क दूधली कांड में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है।
5 मई को शब्बीरपुर में हुए बवाल के बाद 9 मई को सहारनपुर में हिंसा की गई। इस हिंसा का आरोप भीम आर्मी के पदाधिकारियों पर लगाया गया। जिसमें भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर, राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन, जिलाध्यक्ष कमल वालिया, मंजीत सिंह, विकास, अंकित सहित दो सौ से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया। 23 मई को चंदपुर में हुए हमले के मामले में लगभग 32 मामले दर्ज किए गए और 500 से अधिक लोगों को नामजद समेत लगभग डेढ़ हजार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। भीम आर्मी के पदाधिकारियों चंद्रशेखर, विनय रतन, कमल वालिया तथा मंजीत सिंह समेत तीनों घटनाओं के मामले में 178 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
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पुलिस ने धीरे-धीरे दबाव और सिफारिशों के चलते निर्दोष मानकर छोड़ भी दिया, लेकिन जब हर व्यक्ति को निर्दोष बताते हुए सिफारिशें और दबाव आने लगा तो पुलिस ने चुपचाप उनके खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। आरोप पत्र दाखिल करने के बाद पुलिस के लिए मजबूती के साथ पैरवी कर आरोपियों को सजा दिलाना चुनौती रहेगा। क्योंकि पैरवी और कार्रवाई के अभाव के चलते सड़क दूधली कांड के आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। माना जा रहा है कि पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था बदलने के साथ ही पैरवी भी मजबूत और कमजोर हो रहीं हैं। ऐसे में पुलिस की पैरवी लचर हुई तो हिंसा और बवाल के मामले में आरोपी सजा से भी बच सकते हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर पैरवी न करने के लिए भी दबाव बनाया जा सकता है।
इनामी राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन और मंजीत की गिरफ्तारी कब
सहारनपुर। हिंसा के प्रमुख आरोपियों में शामिल 12-12 हजार के इनामी भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन और मंजीत सिंह को पुलिस अभी तक गिरफ्तार नहीं कर सकी है। जबकि घटना को तीन महीने से अधिक समय हो चुका है। भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण तथा जिलाध्यक्ष कमल वालिया की गिरफ्तारी के बाद से पुलिस ने सहारनपुर हिंसा के दो अन्य इनामी आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास ही बंद कर दिए हैं।
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सहारनपुर में 20 अप्रैल से शुरू हुए बवालों के मामले में पुलिस तीन घटनाओं के 111 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर चुकी है। हालांकि पुलिस ने सबसे पहले हुए 20 अप्रैल के सड़क दूधली मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है। जबकि इस मामले में अब तक 18 आरोपी गिरफ्तार भी हो चुके हैं। लेकिन सड़क दूधली कांड में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है।
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5 मई को शब्बीरपुर में हुए बवाल के बाद 9 मई को सहारनपुर में हिंसा की गई। इस हिंसा का आरोप भीम आर्मी के पदाधिकारियों पर लगाया गया। जिसमें भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर, राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन, जिलाध्यक्ष कमल वालिया, मंजीत सिंह, विकास, अंकित सहित दो सौ से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया। 23 मई को चंदपुर में हुए हमले के मामले में लगभग 32 मामले दर्ज किए गए और 500 से अधिक लोगों को नामजद समेत लगभग डेढ़ हजार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। भीम आर्मी के पदाधिकारियों चंद्रशेखर, विनय रतन, कमल वालिया तथा मंजीत सिंह समेत तीनों घटनाओं के मामले में 178 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
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पुलिस ने धीरे-धीरे दबाव और सिफारिशों के चलते निर्दोष मानकर छोड़ भी दिया, लेकिन जब हर व्यक्ति को निर्दोष बताते हुए सिफारिशें और दबाव आने लगा तो पुलिस ने चुपचाप उनके खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। आरोप पत्र दाखिल करने के बाद पुलिस के लिए मजबूती के साथ पैरवी कर आरोपियों को सजा दिलाना चुनौती रहेगा। क्योंकि पैरवी और कार्रवाई के अभाव के चलते सड़क दूधली कांड के आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। माना जा रहा है कि पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था बदलने के साथ ही पैरवी भी मजबूत और कमजोर हो रहीं हैं। ऐसे में पुलिस की पैरवी लचर हुई तो हिंसा और बवाल के मामले में आरोपी सजा से भी बच सकते हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर पैरवी न करने के लिए भी दबाव बनाया जा सकता है।
इनामी राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन और मंजीत की गिरफ्तारी कब
सहारनपुर। हिंसा के प्रमुख आरोपियों में शामिल 12-12 हजार के इनामी भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन और मंजीत सिंह को पुलिस अभी तक गिरफ्तार नहीं कर सकी है। जबकि घटना को तीन महीने से अधिक समय हो चुका है। भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण तथा जिलाध्यक्ष कमल वालिया की गिरफ्तारी के बाद से पुलिस ने सहारनपुर हिंसा के दो अन्य इनामी आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास ही बंद कर दिए हैं।