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नोटिस किसी के नाम भेजा, निर्माण किसी का ध्वस्त कराया
Updated Thu, 31 Aug 2017 12:52 AM IST
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सहारनपुर। अवैध निर्माण ध्वस्त करने में सहारनपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। दरअसल, विभाग नेे अवैध निर्माण के लिए आलोक नाम के व्यक्ति को नोटिस जारी किया था। नोटिस की मियाद पूरी होने पर एसडीए की टीम बुधवार को आलोक द्वारा कराए गए अवैध निर्माण को ध्वस्त करने पहुंची थी, मगर किसी अन्य व्यक्ति का वैध निर्माण ध्वस्त कर आई। पीड़ित ने एसडीए अधिकारियों से मिलकर हुए नुकसान की भरपाई करने की मांग की है। अन्यथा संबंधित अधिकारियों के विरुद्घ कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।
विकास प्राधिकरण ने फाइनेस्ट आवर रिसोर्ट के पास 62 गुणा 205 के क्षेत्रफल में करीब पांच-पांच रद्दों की चिनाई होना पाया था, जिसमें 24 दुकानों की नींव भरी गई थी। यह अवैध निर्माण आलोक नाम के व्यक्ति द्वारा कराया गया था, जिसे एसडीए ने नोटिस जारी कर निर्माण ध्वस्त करने को कहा था। मगर आलोक ने नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया। नोटिस की समय सीमा खत्म होने पर प्राधिकरण की टीम ने बुधवार को अवैध निर्माण ध्वस्त करने पहुंची थी। मगर प्राधिकरण की टीम ने आलोक की बजाय गांव घोसीपुरा में खसरा नंबर 27 की जमीन पर हुई चारदीवारी को आलोक के द्वारा 24 दुकानों के लिए कराया गया अवैध निर्माण समझकर ध्वस्त कर दिया, जबकि हकीकत में यह निर्माण प्रताप नगर निवासी युगल अग्रवाल पुत्र अशोक अग्रवाल का था। युगल को स्थानीय लोगों ने एसडीए द्वारा निर्माण ध्वस्त करने की जानकारी दी। इसके बाद युगल एसडीए पहुंचे, जहां अधिकारियों से उसका निर्माण ध्वस्त कराने की वजह पूछी। इस पर अधिकारियों ने नोटिस दिखाया, जो किसी आलोक को जारी किया गया था। युगल का आरोप है कि ध्वस्त किया गया निर्माण किसी आलोक का नहीं, बल्कि उसका है, जिसे एसडीए के अधिकारियों ने भू-माफिया के साथ मिलकर जानबूझकर ध्वस्त किया है। बताया कि भू-माफिया इससे पहले भी उन्हें तरह-तरह से परेशान करते रहे हैं। उन्होंने एसडीए के अधिकारियों से हुए नुकसान की भरपाई करने की मांग की है। ऐसा नहीं होने पर उन्होंने कोर्ट जाने की चेतावनी दी है। उधर, प्राधिकरण के उपाध्यक्ष मनोज कुमार का कहना है कि वह मामले की जांच करा रहे हैं। यदि गलत कार्रवाई हुई है तो इसमें संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा जाएगा।
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विकास प्राधिकरण ने फाइनेस्ट आवर रिसोर्ट के पास 62 गुणा 205 के क्षेत्रफल में करीब पांच-पांच रद्दों की चिनाई होना पाया था, जिसमें 24 दुकानों की नींव भरी गई थी। यह अवैध निर्माण आलोक नाम के व्यक्ति द्वारा कराया गया था, जिसे एसडीए ने नोटिस जारी कर निर्माण ध्वस्त करने को कहा था। मगर आलोक ने नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया। नोटिस की समय सीमा खत्म होने पर प्राधिकरण की टीम ने बुधवार को अवैध निर्माण ध्वस्त करने पहुंची थी। मगर प्राधिकरण की टीम ने आलोक की बजाय गांव घोसीपुरा में खसरा नंबर 27 की जमीन पर हुई चारदीवारी को आलोक के द्वारा 24 दुकानों के लिए कराया गया अवैध निर्माण समझकर ध्वस्त कर दिया, जबकि हकीकत में यह निर्माण प्रताप नगर निवासी युगल अग्रवाल पुत्र अशोक अग्रवाल का था। युगल को स्थानीय लोगों ने एसडीए द्वारा निर्माण ध्वस्त करने की जानकारी दी। इसके बाद युगल एसडीए पहुंचे, जहां अधिकारियों से उसका निर्माण ध्वस्त कराने की वजह पूछी। इस पर अधिकारियों ने नोटिस दिखाया, जो किसी आलोक को जारी किया गया था। युगल का आरोप है कि ध्वस्त किया गया निर्माण किसी आलोक का नहीं, बल्कि उसका है, जिसे एसडीए के अधिकारियों ने भू-माफिया के साथ मिलकर जानबूझकर ध्वस्त किया है। बताया कि भू-माफिया इससे पहले भी उन्हें तरह-तरह से परेशान करते रहे हैं। उन्होंने एसडीए के अधिकारियों से हुए नुकसान की भरपाई करने की मांग की है। ऐसा नहीं होने पर उन्होंने कोर्ट जाने की चेतावनी दी है। उधर, प्राधिकरण के उपाध्यक्ष मनोज कुमार का कहना है कि वह मामले की जांच करा रहे हैं। यदि गलत कार्रवाई हुई है तो इसमें संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा जाएगा।
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