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एंबुलेंस के लिए घंटों अस्पताल में तड़पती रही प्रसूता
Updated Wed, 14 Jun 2017 12:47 AM IST
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एंबुलेंस के लिए घंटों अस्पताल में तड़पती रही प्रसूता
गंगोह (सहारनपुर)। प्रसव पीड़ा के चलते सीएचसी पहुंची एक महिला को रेफर किए जाने के बावजूद एंबुलेंस चालकों ने वाहन र्में इंधन ना होने का बहाना कर ले जाने से इंकार कर दिया। इससे महिला काफी देर तक सीएचसी के बाहर तड़पती रही। बाद में परिजनों को उसे निजी वाहन से सहारनपुर ले जाना पड़ा।
मंगलवार को गांव बुड्ढाखेड़ा निवासी मोनू अपनी गर्भवती पत्नी रूपा को प्रसव के लिए सीएचसी लेकर आया था। वहां चिकित्सक ने जांच के बाद महिला में खून की कमी को देखते हुए उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। परिजनों के अनुसार एंबुलेंस को फोन कर सूचना दी गई, लेकिन किसी ने फोन रिसीव नहीं किया। इसके बाद अस्पताल में खड़ी 102 एवं 108 एंबुलेंस के चालकों से चलने के लिए कहा गया तो उन्होंने तेल न होने का बहाना बनाते हुए जाने से इंकार कर दिया। इस दौरान प्रसव पीड़िता घंटों तड़पती रही, लेकिन चालकों का दिल नही पसीजा। उन्होंने सीएचसी प्रभारी डा. अनवर अंसारी की बात मानने से भी इंकार कर दिया। काफी देर के बाद परिजन किसी तरह निजी वाहन लेकर वहां पहुंचे। इसके बाद ही प्रसूता को ले जाया जा सका। इससे मरीजों और तीमारदारों में रोष व्याप्त है।
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गंगोह (सहारनपुर)। प्रसव पीड़ा के चलते सीएचसी पहुंची एक महिला को रेफर किए जाने के बावजूद एंबुलेंस चालकों ने वाहन र्में इंधन ना होने का बहाना कर ले जाने से इंकार कर दिया। इससे महिला काफी देर तक सीएचसी के बाहर तड़पती रही। बाद में परिजनों को उसे निजी वाहन से सहारनपुर ले जाना पड़ा।
मंगलवार को गांव बुड्ढाखेड़ा निवासी मोनू अपनी गर्भवती पत्नी रूपा को प्रसव के लिए सीएचसी लेकर आया था। वहां चिकित्सक ने जांच के बाद महिला में खून की कमी को देखते हुए उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। परिजनों के अनुसार एंबुलेंस को फोन कर सूचना दी गई, लेकिन किसी ने फोन रिसीव नहीं किया। इसके बाद अस्पताल में खड़ी 102 एवं 108 एंबुलेंस के चालकों से चलने के लिए कहा गया तो उन्होंने तेल न होने का बहाना बनाते हुए जाने से इंकार कर दिया। इस दौरान प्रसव पीड़िता घंटों तड़पती रही, लेकिन चालकों का दिल नही पसीजा। उन्होंने सीएचसी प्रभारी डा. अनवर अंसारी की बात मानने से भी इंकार कर दिया। काफी देर के बाद परिजन किसी तरह निजी वाहन लेकर वहां पहुंचे। इसके बाद ही प्रसूता को ले जाया जा सका। इससे मरीजों और तीमारदारों में रोष व्याप्त है।
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