{"_id":"57e57ee14f1c1b4f5aa82eb8","slug":"council-were-not-in-school-books","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं पहुंची परिषदीय स्कूलों में किताबें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहीं पहुंची परिषदीय स्कूलों में किताबें
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sat, 24 Sep 2016 12:48 AM IST
विज्ञापन
books
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर के साढ़ौली कदीम में सरकार के अनिवार्य एवं निशुल्क शिक्षा के दावे खोखले होते नजर आ रहे हैं। शिक्षण सत्र के पांच माह बीतने के बाद भी परिषदीय स्कूलों में किताबें तक नहीं पहुंच पाई हैं।
ऐसे में परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 20 हजार बच्चों का भविष्य अंधकारमय में नजर आ रहा है। विकास खंड साढ़ौली कदीम के परिषदीय स्कूलों में पांच माह बीतने के बाद भी शासन द्वारा किताबें नहीं भेजी जा सकी हैं।
ऐसे में इन स्कूलों में जाने वाले बच्चे कुछ समय खेलकर वापस घर चले आते हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले इन बच्चों के भविष्य का जिम्मेदार आखिर कौन बनेगा।
विज्ञापन
विकास खंड में संचालित 42 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 3950 बच्चें तथा 101 प्राथमिक विद्यालयों में 15960 बच्चे पंजीकृत है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले इन बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
अभिभावक रणजीत सिंह, केहर सिंह, मन्नूसिंह, दिलशाद, माजिद, इरशाद, फुरकान, सुखपाल सिंह, रमेशचंद, रिषीपाल सिंह आदि का कहना है कि सरकारी स्कूलों में उनके बच्चों को किताबें ही समय से नहीं मिल पा रही है तो पढ़ाई कैसे हो पाएगी।
ऐसे में वे बच्चों की शिक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। उधर, बीआरसी पवन कुमार का कहना था कि प्राथमिक विद्यालयों की अभी कोई किताब जिला स्तर से नहीं आई है।
उच्च प्राथमिक विद्यालयों में हिंदी, अंग्रेजी, गणित व कृषिविज्ञान की किताबें विद्यालयों में भेजी जा चुकी है। शेष किताबें आने पर विद्यालयों में भेज दी जाएगी। बीएसए बुद्धप्रिय सिंह ने बताया कि जूनियर स्कूलों में 50 प्रतिशत किताबें पहुंच गई है। बाकी में भी व्यवस्था की जा रही है।
विज्ञापन
ऐसे में परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 20 हजार बच्चों का भविष्य अंधकारमय में नजर आ रहा है। विकास खंड साढ़ौली कदीम के परिषदीय स्कूलों में पांच माह बीतने के बाद भी शासन द्वारा किताबें नहीं भेजी जा सकी हैं।
विज्ञापन
ऐसे में इन स्कूलों में जाने वाले बच्चे कुछ समय खेलकर वापस घर चले आते हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले इन बच्चों के भविष्य का जिम्मेदार आखिर कौन बनेगा।
विज्ञापन
विकास खंड में संचालित 42 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 3950 बच्चें तथा 101 प्राथमिक विद्यालयों में 15960 बच्चे पंजीकृत है। ऐसे में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले इन बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
अभिभावक रणजीत सिंह, केहर सिंह, मन्नूसिंह, दिलशाद, माजिद, इरशाद, फुरकान, सुखपाल सिंह, रमेशचंद, रिषीपाल सिंह आदि का कहना है कि सरकारी स्कूलों में उनके बच्चों को किताबें ही समय से नहीं मिल पा रही है तो पढ़ाई कैसे हो पाएगी।
ऐसे में वे बच्चों की शिक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं। उधर, बीआरसी पवन कुमार का कहना था कि प्राथमिक विद्यालयों की अभी कोई किताब जिला स्तर से नहीं आई है।
उच्च प्राथमिक विद्यालयों में हिंदी, अंग्रेजी, गणित व कृषिविज्ञान की किताबें विद्यालयों में भेजी जा चुकी है। शेष किताबें आने पर विद्यालयों में भेज दी जाएगी। बीएसए बुद्धप्रिय सिंह ने बताया कि जूनियर स्कूलों में 50 प्रतिशत किताबें पहुंच गई है। बाकी में भी व्यवस्था की जा रही है।