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Saharanpur News: निगम में फिर भ्रष्टाचार, डीएम से शिकायत के बाद बैठी जांच
Sun, 12 Jan 2025 05:34 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 12 Jan 2025 05:34 AM IST
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नगर निगम का गेट
सहारनपुर। नगर निगम में भ्रष्टाचार का एक और मामला सामने आया है। नामांतरण कराने के लिए लिपिक ने रिश्वत मांगी, जिसकी शिकायत पीड़ित ने जिलाधिकारी से की। जिलाधिकारी के आदेश पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। नगर निगम में यह हाल तो तब है जब भ्रष्टाचार के मामले में तीन लिपिक पहले ही निलंबित चल रहे हैं।
शारदानगर निवासी सुंदर देवी ने जिलाधिकारी मनीष बंसल को शिकायती पत्र दिया था। बताया कि वह शारदानगर में किराए के मकान में रहती हैं। उनके पति जगपाल सिंह की वर्ष 2001 में मृत्यु हो चुकी है। पति के नाम पर एक दुकान थी, जिसके नामांतरण के लिए उन्होंने नगर निगम में सपंर्क किया, जिससे की दुकान का गृहकर उनके नाम से हो जाए। इस संबंध में गृहकर के एक लिपिक से बात की तो वह दो सहयोगियों के साथ उनके घर पहुंचे।
दुकान के नामांतरण के लिए उन्होंने दस हजार रुपये लिए थे, जिसकी रसीद देने की बात कही थी। आरोप है कि अभी तक रसीद नहीं दी गई है और सात हजार रुपये की और मांग की जा रही है। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच के आदेश दे दिए। नगर निगम में रिश्वत मांगने का यह पहला मामला नहीं है। करीब पांच महीने पहले तीन लिपिक रिश्वत मांगने के मामले में निलंबित हो चुके हैं, जिनकी बहाली अभी तक भी नहीं हुई है।
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एक अन्य मामले में कराया गया समझौता
दो महीने पहले गृहकर अनुभाग के ही एक कर्मचारी ने एक व्यक्ति से काम के बदले पैसा लिया था। मामला नगर निगम के एक जिम्मेदार तक पहुंचा तो उन्होंने कर्मचारी पर कार्रवाई करने की बजाय समझौता कराया दिया, जिसमें रुपयों के लेनदेन की बात सामने आई थी। मामला नगर निगम में चर्चाओं में रहा था।
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जिलाधिकारी के माध्यम से एक शिकायती पत्र मिला है, जिसमें एक महिला ने गृहकर अनुभाग के लिपिक पर रुपये मांगने का आरोप लगाया है। कर अधीक्षक को निर्देश दिए गए हैं कि वह शिकायकर्ता और आरोपी लिपिक को नोटिस जारी करें। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो निश्चित रूप से निलंबन होगा।
- राजेश यादव, प्रभारी, गृहकर अनुभाग/अपर नगरायुक्त
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शारदानगर निवासी सुंदर देवी ने जिलाधिकारी मनीष बंसल को शिकायती पत्र दिया था। बताया कि वह शारदानगर में किराए के मकान में रहती हैं। उनके पति जगपाल सिंह की वर्ष 2001 में मृत्यु हो चुकी है। पति के नाम पर एक दुकान थी, जिसके नामांतरण के लिए उन्होंने नगर निगम में सपंर्क किया, जिससे की दुकान का गृहकर उनके नाम से हो जाए। इस संबंध में गृहकर के एक लिपिक से बात की तो वह दो सहयोगियों के साथ उनके घर पहुंचे।
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दुकान के नामांतरण के लिए उन्होंने दस हजार रुपये लिए थे, जिसकी रसीद देने की बात कही थी। आरोप है कि अभी तक रसीद नहीं दी गई है और सात हजार रुपये की और मांग की जा रही है। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच के आदेश दे दिए। नगर निगम में रिश्वत मांगने का यह पहला मामला नहीं है। करीब पांच महीने पहले तीन लिपिक रिश्वत मांगने के मामले में निलंबित हो चुके हैं, जिनकी बहाली अभी तक भी नहीं हुई है।
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एक अन्य मामले में कराया गया समझौता
दो महीने पहले गृहकर अनुभाग के ही एक कर्मचारी ने एक व्यक्ति से काम के बदले पैसा लिया था। मामला नगर निगम के एक जिम्मेदार तक पहुंचा तो उन्होंने कर्मचारी पर कार्रवाई करने की बजाय समझौता कराया दिया, जिसमें रुपयों के लेनदेन की बात सामने आई थी। मामला नगर निगम में चर्चाओं में रहा था।
जिलाधिकारी के माध्यम से एक शिकायती पत्र मिला है, जिसमें एक महिला ने गृहकर अनुभाग के लिपिक पर रुपये मांगने का आरोप लगाया है। कर अधीक्षक को निर्देश दिए गए हैं कि वह शिकायकर्ता और आरोपी लिपिक को नोटिस जारी करें। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो निश्चित रूप से निलंबन होगा।
- राजेश यादव, प्रभारी, गृहकर अनुभाग/अपर नगरायुक्त