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बच्चों की पोशाक वितरण में कोरोना बना अड़चन

Thu, 03 Sep 2020 11:33 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 03 Sep 2020 11:33 PM IST
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Corona becomes bottleneck in children's dress distribution
सहारनपुर। परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों तक पोशाक पहुंचने में कोरोना अड़चन बना है। हालांकि ज्यादातर बच्चों को पोशाक उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है। मगर यह भी सच है कि कोरोना के कारण बच्चों की छुट्टियां होने के चलते पोशाक के लिए उनकी माप नहीं हो पा रही है।
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जिले में एक लाख 83 हजार 555 बच्चों को पोशाक का वितरण का लक्ष्य मिला था। पोशाक के लिए सात करोड़ 59 लाख रुपये सहारनपुर को मिले थे, इनमें से सात करोड़ 22 लाख रुपया जुलाई माह में ही एसएमसी (स्कूल मैनेजमेंट कमेटी) के खातों में भेजा। पोशाक का वितरण 31 जुलाई तक हो जाना चाहिए, मगर कोरोना को देखकर शासन ने इसे बढ़ाकर 15 अगस्त किया। चूंकि पूर्व में स्कूल खुले रहते थे तो स्वयं सहायता समूह के टेलर स्कूलों में आकर एक साथ बच्चों की माप ले जाते थे, इसके बाद पोशाक बनकर आ जाती थी। विभागीय अधिकारी दावा कर रहे हैं कि सभी स्कूलों में पोशाक का वितरण हो चुका है, जिनकी रिपोर्ट भी विभाग के पास आ चुकी है। मगर एक हकीकत यह भी है कि पोशाक सभी विद्यार्थियों को नहीं मिली है। कुछ ऐसे विद्यार्थी हैं, जिनकी माप नहीं होने की वजह से पोशाक तैयार नहीं हो सकी है या फिर बुलाने के बावजूद उनके स्कूल नहीं आने की वजह से वह पोशाक प्राप्त नहीं कर सके ंहैं। इसकी प्रमुख वजह कोरोना की वजह से बीते पांच माह से बच्चों की छुट्टियां होना है।
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एपीएल बच्चों का नहीं आया पैसा
जिले में एपीएल (गरीबी रेखा से ऊपर) के बच्चों की संख्या 14 हजार 108 है। इनकी पोशाक का पैसा उत्तर प्रदेेश सरकार अलग से भेजती है। मगर इस बार विभाग को केवल 2461 बच्चों की ही पोशाक का पैसा प्राप्त हुआ है, जो कई माह पहले एसएमसी के खातों में ट्रांसफर किया जा चुका है। मगर शेष 11 हजार 647 बच्चों की पोशाक का पैसा अभी तक नहीं पहुंचा है, जो पोशाक मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
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दो पोशाक के 600 रुपये
सरकार हर बच्चे की दो पोशाक के लिए 600 रुपये भेजती है। यानी 300 रुपये में एक पोशाक तैयार होती है। इससे पहले दो पोशाक के 400 रुपये भेजे जाते थे।
यह है नियम
जिन स्कूलों में पोशाक एक लाख रुपये या उससे अधिक की होती है। वहां टेंडर की प्रक्रिया अपनाने का नियम है। एक लाख से नीचे के बजट पर कोटेशन जारी होती है। इसमें तीन से चार फर्म का खुद चयन किया जाता है। जिस भी फर्म की कोटेशन सबसे कम होती है उसे ठेका दे दिया जाता है।

जनपद में 90 फीसदी से अधिक बच्चों को पोशाक का वितरण किया जा चुका है। जो बच्चे रह गए हैं वह माप नहीं दे पाने की वजह से रहे हैं। इसके अलावा गर बी रेखा से ऊपर के बच्चों का कम पैसा आया था, जो ट्रांसफर किया जा चुका है। और पैसे के लिए मांग भेजी है। जल्द ही शत प्रतिशत बच्चों को पोशाक का वितरण हो जाएगा। - रमेंद्र कुमार सिंह, बीएसए, सहारनपुर ।
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