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दूषित पानी ने ली एक और जान
ब्यूरो/अमर उजाला, नानौता
Updated Fri, 26 Aug 2016 12:45 AM IST
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नानौता क्षेत्र से बह रही कृष्णा नदी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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ग्राम भनेड़ा खेमचंद में कृष्णा नदी के दूषित पानी से फैली जानलेवा बीमारियों से जूझ रहे 56 वर्षीय ग्रामीण की मौत हो गई है। कृष्णा नदी में बढ़ते प्रदूषण को रोकने में प्रशासन नाकाम सिद्ध हो रहा है। प्रदूषित पानी के कारण गांव में एक वर्ष में 18 ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। जबकि तीन दर्जन ग्रामीण कैंसर से ग्रस्त हैं।
क्षेत्र से हो कर गुजर रही कृष्णा नदी का दूषित पानी क्षेत्र के गांव भनेड़ा खेमचंद में सर्वाधिक कहर बरपा रहा है। जिसके कारण गांव का पानी जहर बना है। दूषित पानी के कारण कई वर्षों से एलर्जी और सांस की बीमारी से जूझ रहे 56 वर्षीय चंद्रभान कश्यप बृहस्पतिवार को मौत हो गई।
गांव में दूषित पानी से ग्रामीणों में बढ़ती खतरनाक बीमारियों के चलते एक साल में पूरण सिंह, मौसम सिंह, सुरेशवती, राजपाल, ज्ञानवती, बबलू, सिपट्टर, कांता, बाला, कान सिंह, नरेश, सुदेश, जलवीरा, रस्मपाल, अतरू, संजू, सुमित्रा आदि ग्रामीणों की मौत कैंसर से हो चुकी है। जबकि दूषित जल के कारण गांव तीन दर्जन ग्रामीण कैंसर से पीड़ित हैं।
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गांव में कैंसर के पीड़ितों की मौत पर मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेते हुए 2 जून को राज्य योजना आयोग के सदस्य सुधीर कुमार, एसडीएम देवबंद, एसडीएम रामपुर मनिहारान और प्रदूषण विभाग की टीम को गांव में भेज कर जांच कराई।
गांव में पहुंचे राज्य योजना आयोग के सदस्य सुधीर कुमार ने गांव के नलों व दूषित नदी से पानी के नमूने लेकर ग्रामीणों को समस्या के स्थायी समाधान का आश्वासन दिया।
उधर, गांव के लोगों विक्रम सिंह, तरसेम सिंह, मलखान सिंह, श्यामवीर, कर्मवीर सिंह, सुनील बजरंगी, मनीष राणा, धर्मवीर सिंह ने बताया कि प्रशासन के आश्वासन मात्र दिखावा है। उन्होंने कृष्णा नदी में गिर रहे फैक्ट्रियों के दूषित पानी को रोकने और नदी की सफाई कराने के लिए अभियान चलाने की मांग की है।
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क्षेत्र से हो कर गुजर रही कृष्णा नदी का दूषित पानी क्षेत्र के गांव भनेड़ा खेमचंद में सर्वाधिक कहर बरपा रहा है। जिसके कारण गांव का पानी जहर बना है। दूषित पानी के कारण कई वर्षों से एलर्जी और सांस की बीमारी से जूझ रहे 56 वर्षीय चंद्रभान कश्यप बृहस्पतिवार को मौत हो गई।
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गांव में दूषित पानी से ग्रामीणों में बढ़ती खतरनाक बीमारियों के चलते एक साल में पूरण सिंह, मौसम सिंह, सुरेशवती, राजपाल, ज्ञानवती, बबलू, सिपट्टर, कांता, बाला, कान सिंह, नरेश, सुदेश, जलवीरा, रस्मपाल, अतरू, संजू, सुमित्रा आदि ग्रामीणों की मौत कैंसर से हो चुकी है। जबकि दूषित जल के कारण गांव तीन दर्जन ग्रामीण कैंसर से पीड़ित हैं।
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गांव में कैंसर के पीड़ितों की मौत पर मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेते हुए 2 जून को राज्य योजना आयोग के सदस्य सुधीर कुमार, एसडीएम देवबंद, एसडीएम रामपुर मनिहारान और प्रदूषण विभाग की टीम को गांव में भेज कर जांच कराई।
गांव में पहुंचे राज्य योजना आयोग के सदस्य सुधीर कुमार ने गांव के नलों व दूषित नदी से पानी के नमूने लेकर ग्रामीणों को समस्या के स्थायी समाधान का आश्वासन दिया।
उधर, गांव के लोगों विक्रम सिंह, तरसेम सिंह, मलखान सिंह, श्यामवीर, कर्मवीर सिंह, सुनील बजरंगी, मनीष राणा, धर्मवीर सिंह ने बताया कि प्रशासन के आश्वासन मात्र दिखावा है। उन्होंने कृष्णा नदी में गिर रहे फैक्ट्रियों के दूषित पानी को रोकने और नदी की सफाई कराने के लिए अभियान चलाने की मांग की है।