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आंदोलन तोड़ने की साजिश, डरकर मोर्चा नहीं छोड़ेंगे किसान : नरेश टिकैत 

Wed, 27 Jan 2021 11:38 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 27 Jan 2021 11:38 PM IST
सार

  • भाकियू अध्यक्ष बोले, किसानों को गुमराह करके लालकिले तक ले जाया गया

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Conspiracy to break the agitation, farmers will not abandon fearfully: Naresh Tikait
naresh tikait - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश के बागपत में भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि किसानों का शांतिपूर्ण आंदोलन तोड़ने के लिए साजिश रची गई है। लालकिला जैसी एतिहासिक जगह पर इतनी कड़ी सुरक्षा के बीच किसानों के नाम पर सिर्फ कुछ लोग कैसे पहुंच गए। सीधे-सादे किसान तो दिल्ली का रास्ता भी नहीं जानते, उन्हें गुमराह करके और रास्ता भटकाकर ले जाया गया।

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दिल्ली में हिंसक झड़पों के बाद सिसौली लौटते हुए भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने राष्ट्रवंदना चौक पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार पूरी तरह फेल हो गई है। किसान इन साजिशों से घबराने वाले नहीं हैं, आंदोलन जारी रहेगा।
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आंदोलन में किसान की मौत हुई है, सरकार का कोई नुकसान नहीं हुआ है। किसानों के ट्रैक्टर तोड़ दिए गए। मृतक किसान के परिवार को एक करोड़ का मुआवजा मिलना चाहिए। किसानों की संपत्ति का जो नुकसान हुआ है, केंद्र सरकार को उसकी भरपाई करनी चाहिए। किसान आंदोलन के खिलाफ पूरी साजिश रची गई है। दिल्ली पुलिस कमजोर क्यों है। किसान मोर्चा छोड़ने वाले नहीं हैं। इस दौरान रविंद्र मुखिया, इंद्रपाल सिंह, वीरेंद्र लाटियान आदि मौजूद रहे।
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उपद्रव करने वाले भाकियू से नहीं, चिन्हित कर पुलिस को सौपेंगे 
बुधवार को नागल कस्बे के रेलवे रोड पर भाकियू कार्यकर्ताओं की बैठक हुई। इसमें प्रदेश उपाध्यक्ष चौधरी विनय कुमार ने कहा विगत 62 दिन से कृषि कानून वापस लेने के लिए किसान दिल्ली बॉर्डर पर शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने तारीख के अलावा किसानों को कुछ नहीं दिया, बल्कि किसानों का मजाक उड़ आती रही। दिल्ली में हुई घटना का दोषी किसानों को बता रही है और उनके विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कर झूठे फंसाने काम कर रही है, जबकि सरकार को निष्पक्ष जांच कराकर मामले में कदम उठाना चाहिए।


जिलाध्यक्ष चौधरी चरण सिंह ने कहा जिन लोगों ने ट्रैक्टर परेड में उपद्रव मचाया है, वह किसान यूनियन टिकैत के नहीं हो सकते और यूनियन अपने स्तर पर ऐसे लोगों को चिन्हित कर सरकार के हवाले करेगी। यदि सरकार कृषि कानून वापस नहीं लेती तो आने वाले समय में सांसद एवं विधायकों का घेराव होगा।

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