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कांग्रेस और सपा बन सकती हैं किंग मेकर
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सहारनपुर। जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव हो गया, अब होगी अध्यक्ष पद के लिए जंग। राजनीतिक दलों की निगाह भी जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर है, लेकिन एक भी दल ऐसी स्थिति में नहीं है जो पूर्ण बहुमत से अपनी पार्टी का अध्यक्ष निर्वाचित करने में सफल हो पाए। उसके लिए दूसरे दलों के प्रत्याशियों का समर्थन लेना होगा या यूं कहें तोड़फोड़ करनी होगी। लिहाजा वर्तमान समीकरणों में कांग्रेस, सपा और निर्दलीय सदस्य किंग मेकर की भूमिका में आ गए हैं।
जिले में कुल 49 जिला पंचायत सदस्य हैं। चूंकि सदस्यों द्वारा ही अध्यक्ष का निर्वाचन किया जाना है। उसके लिए बहुमत के तौर पर 25 सदस्य होने चाहिएं, लेकिन इस आंकड़े को कोई भी पार्टी नहीं छू पाई है। वर्तमान नतीजों में भाजपा को 14, बसपा को 14, कांग्रेस को 08, सपा को 05, आसपा (आजाद समाज पार्टी) को 01 और निर्दलीय 08 प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। इस लिहाज से एक भी राजनीतिक दल इस स्थिति में नहीं है कि वह अपना अध्यक्ष आसानी से बना सके। अब इसमें निर्दलीय जीतने वाले 08 सदस्यों के अलावा सपा और कांग्रेस की अहम भूमिका अध्यक्ष पद के चुनाव में होने जा रही है।
वहीं, अध्यक्ष पद को लेकर शुरू होने वाले चुनावी युद्ध में इन राजनीतिक दलों को अपने सदस्यों को टूटने से बचाने की चुनौती का भी सामना करना पड़ेगा। क्योंकि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में दूसरे दलों के सदस्यों को तोड़ने का पुराना इतिहास रहा है और कब कौन किससे पाले में चला जाए, उसका कोई भरोसा नहीं है। दूसरे दलों के सदस्यों को भरमाने के लिए तमाम प्रयास होते हैं और सदस्यों को घूमने के बहाने नजरबंद तक कर दिया जाता है।
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जिले में कुल 49 जिला पंचायत सदस्य हैं। चूंकि सदस्यों द्वारा ही अध्यक्ष का निर्वाचन किया जाना है। उसके लिए बहुमत के तौर पर 25 सदस्य होने चाहिएं, लेकिन इस आंकड़े को कोई भी पार्टी नहीं छू पाई है। वर्तमान नतीजों में भाजपा को 14, बसपा को 14, कांग्रेस को 08, सपा को 05, आसपा (आजाद समाज पार्टी) को 01 और निर्दलीय 08 प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। इस लिहाज से एक भी राजनीतिक दल इस स्थिति में नहीं है कि वह अपना अध्यक्ष आसानी से बना सके। अब इसमें निर्दलीय जीतने वाले 08 सदस्यों के अलावा सपा और कांग्रेस की अहम भूमिका अध्यक्ष पद के चुनाव में होने जा रही है।
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वहीं, अध्यक्ष पद को लेकर शुरू होने वाले चुनावी युद्ध में इन राजनीतिक दलों को अपने सदस्यों को टूटने से बचाने की चुनौती का भी सामना करना पड़ेगा। क्योंकि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में दूसरे दलों के सदस्यों को तोड़ने का पुराना इतिहास रहा है और कब कौन किससे पाले में चला जाए, उसका कोई भरोसा नहीं है। दूसरे दलों के सदस्यों को भरमाने के लिए तमाम प्रयास होते हैं और सदस्यों को घूमने के बहाने नजरबंद तक कर दिया जाता है।
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