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कोल्हू पर गन्ना डालने की मजबूरी, लागत भी नहीं हो रही पूरी
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प्रवीण कुमार
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। घर के दैनिक खर्च चलाने और मिल से पर्याप्त संख्या में पर्चियां नहीं आने के कारण किसान अपने गन्ने को मजबूरी में चीनी मिल के रेट से डेढ़ सौ रुपये प्रति क्विंटल कम तक कोल्हू पर डाल रहे हैं। चीनी मिल में जहां भाव साढ़े तीन सौ रुपये का है, वहीं कोल्हू पर दो सौ रुपये प्रति क्विंटल खरीद की जा रही है। इस भाव में लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है। गेहूं की समय से बुवाई की चिंता नुकसान उठा कर खेत खाली करने को मजबूर कर रही है। किसान और किसान नेता इसके लिए सरकार की गलत नीतियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
नहीं चली मिल, घर के अनाज के लिए काट रहे गन्ना
विकास खंड साढौली कदीम के गांव चकखीजरपुर निवासी किसान बिशंबर सिंह का कहना है कि क्षेत्र की चीनी मिल अभी चल नहीं पाई है। गन्ना क्रय केन्द्र की पर्याप्त पर्ची नहीं मिल पाने के चलते उसे कोल्हू में दो सौ रुपये क्विंटल के भाव से अपना गन्ना डालने को बाध्य होना पड़ रहा है। इसमें लागत भी पूरी नहीं हो रही है। गन्ने की पेडी की फसल को खाली कर उन्हें गेहूं की फसल की बुवाई भी करनी है।
मजबूरी में डाल रहे गन्ना
दल्हेड़ी गांव निवासी किसान सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने 20 बीघा गन्ने की फसल की बुवाई कर रखी है। नानौता सहकारी चीनी मिल का आज रस्मी शुभारंभ हुआ है, लेकिन मिल से अभी तक एक भी पर्ची नहीं आई है। ऐसे में उसे गेहूं की बुवाई करने के लिए अपना गन्ना 200 रुपये प्रति क्विंटल कोल्हू में डालने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
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घर के खर्च निकालने को कोल्हू पर डाल रहे गन्ना
नागल निवासी प्रवीण कुमार का कहना है कि घर के अनेक खर्चे होते हैं। बच्चों की फीस, बहन बेटियों की कोथली, दवाइयां आदि के लिए मजबूरी में गन्ने को कोल्हू पर डालना पड़ रहा है। उनके क्षेत्र में ज्यादातर किसान गन्ने की फसल पर ही निर्भर हैं।
कामदारों की लापरवाही से नहीं मिल रही पर्चियां
भाकियू टिकैत के जिलाध्यक्ष चौ. राजपाल सिंह का कहना है कि गन्ना सर्वे में कामदारों द्वारा लापरवाही बरती गई है जिसके कारण बहुत से किसानों की मिल पर्ची नहीं आ रही है। इससे गेहूं बुवाई प्रभावित हो रही है और किसानों को दो से ढाई सौ रुपये प्रति क्विंटल गन्ना चरखी में डालना पड़ रहा है जिससे किसानों को घाटा हो रहा है।
गन्ना किसानों की बदहाली को सरकार जिम्मेदार
भाकियू अराजनैतिक के जिलाध्यक्ष नरेश स्वामी का कहना है कि गन्ना किसानों की बदहाली के लिए प्रदेश सरकार जिम्मेदार है। सरकार गंभीर हो तो समय से चीनी मिलें चलें और भुगतान भी 14 दिन के अंदर हो। अब किसानों को अपना गन्ना मात्र दो सौ रुपये क्विंटल पर लुटाना पड़ रहा है। इसमें उसकी लागत तक नहीं निकल पा रही है।
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नहीं चली मिल, घर के अनाज के लिए काट रहे गन्ना
विकास खंड साढौली कदीम के गांव चकखीजरपुर निवासी किसान बिशंबर सिंह का कहना है कि क्षेत्र की चीनी मिल अभी चल नहीं पाई है। गन्ना क्रय केन्द्र की पर्याप्त पर्ची नहीं मिल पाने के चलते उसे कोल्हू में दो सौ रुपये क्विंटल के भाव से अपना गन्ना डालने को बाध्य होना पड़ रहा है। इसमें लागत भी पूरी नहीं हो रही है। गन्ने की पेडी की फसल को खाली कर उन्हें गेहूं की फसल की बुवाई भी करनी है।
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मजबूरी में डाल रहे गन्ना
दल्हेड़ी गांव निवासी किसान सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने 20 बीघा गन्ने की फसल की बुवाई कर रखी है। नानौता सहकारी चीनी मिल का आज रस्मी शुभारंभ हुआ है, लेकिन मिल से अभी तक एक भी पर्ची नहीं आई है। ऐसे में उसे गेहूं की बुवाई करने के लिए अपना गन्ना 200 रुपये प्रति क्विंटल कोल्हू में डालने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
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घर के खर्च निकालने को कोल्हू पर डाल रहे गन्ना
नागल निवासी प्रवीण कुमार का कहना है कि घर के अनेक खर्चे होते हैं। बच्चों की फीस, बहन बेटियों की कोथली, दवाइयां आदि के लिए मजबूरी में गन्ने को कोल्हू पर डालना पड़ रहा है। उनके क्षेत्र में ज्यादातर किसान गन्ने की फसल पर ही निर्भर हैं।
कामदारों की लापरवाही से नहीं मिल रही पर्चियां
भाकियू टिकैत के जिलाध्यक्ष चौ. राजपाल सिंह का कहना है कि गन्ना सर्वे में कामदारों द्वारा लापरवाही बरती गई है जिसके कारण बहुत से किसानों की मिल पर्ची नहीं आ रही है। इससे गेहूं बुवाई प्रभावित हो रही है और किसानों को दो से ढाई सौ रुपये प्रति क्विंटल गन्ना चरखी में डालना पड़ रहा है जिससे किसानों को घाटा हो रहा है।
गन्ना किसानों की बदहाली को सरकार जिम्मेदार
भाकियू अराजनैतिक के जिलाध्यक्ष नरेश स्वामी का कहना है कि गन्ना किसानों की बदहाली के लिए प्रदेश सरकार जिम्मेदार है। सरकार गंभीर हो तो समय से चीनी मिलें चलें और भुगतान भी 14 दिन के अंदर हो। अब किसानों को अपना गन्ना मात्र दो सौ रुपये क्विंटल पर लुटाना पड़ रहा है। इसमें उसकी लागत तक नहीं निकल पा रही है।

बिशम्बर सिंह- फोटो : SAHARANPUR

नरेश स्वामी- फोटो : SAHARANPUR

राजपाल सिंह- फोटो : SAHARANPUR

सुरेंद्र सिंह- फोटो : SAHARANPUR